
कभी कभी किसी बड़े सपने की शुरुआत बहुत छोटी सी जिज्ञासा से होती है। ऐसी ही कहानी है 21 साल की अनुप्रिया नागर की, जिन्होंने अर्थशास्त्र की पढ़ाई के दौरान स्टीव जॉब्स के बारे में एक असाइनमेंट किया। इस रिसर्च ने उन्हें नीम करोली बाबा की आध्यात्मिक दुनिया तक पहुंचाया और आगे चलकर यही जुड़ाव फिल्म हनुमान अंश के निर्माण की वजह बना। आज यह फिल्म अपनी कमाई और अनोखी कहानी के कारण चर्चा में है। चलिए जानते हैं इस फिल्म की प्रोड्यूसर (निर्माता) अनुप्रिया की कहानी।
अनुप्रिया ब्रिटेन की यूनिवर्सिटी ऑफ बाथ में इकोनॉमिक्स की पढ़ाई कर रही थीं। एक यूनिवर्सिटी प्रोजेक्ट के दौरान उन्होंने स्टीव जॉब्स के कारोबारी जीवन और विचारों पर शोध किया। इसी दौरान उन्हें जॉब्स के भारत आने और नीम करोली बाबा से जुड़े उनके आध्यात्मिक अनुभवों के बारे में पता चला। इसके बाद अनुप्रिया ने बाबा के जीवन और शिक्षाओं को और गहराई से समझने की कोशिश की।
रिपोर्टों के अनुसार, उन्होंने इस विषय पर करीब एक साल तक रिसर्च की। इसी दौरान उनकी मुलाकात फिल्म निर्देशक विशाल चतुर्वेदी से हुई, जो पहले से नीम करोली बाबा पर फिल्म बनाने की योजना पर काम कर रहे थे। यह मुलाकात आगे चलकर हनुमान अंश के निर्माण की शुरुआत बनी।
अनुप्रिया का फिल्म निर्माण में आने का कोई पहले से तय इरादा नहीं था। वह पढ़ाई के बाद कला और कारोबार से जुड़े क्षेत्र में काम करने की योजना बना रही थीं। लेकिन नीम करोली बाबा के जीवन से जुड़ी उनकी रुचि ने उन्हें एक अलग दिशा में आगे बढ़ाया।
उन्होंने निर्देशक विशाल चतुर्वेदी के साथ मिलकर फिल्म बनाने का फैसला किया। रिपोर्टों के अनुसार, अनुप्रिया की उम्र उस समय सिर्फ 21 साल थी और यह उनका पहला प्रोडक्शन प्रोजेक्ट था।
हनुमान अंश को करीब 1.75 से 2 करोड़ रुपये के बजट में बनाया गया बताया जा रहा है। फिल्म ने शुरुआत में बहुत धीमी कमाई की। रिलीज के पहले दिन इसका कलेक्शन करीब 10 लाख रुपये रहा। पहले हफ्ते में भी फिल्म की कमाई सीमित रही, लेकिन बाद में दर्शकों की चर्चा और मुंहजबानी प्रचार से इसकी रफ्तार बढ़ने लगी।
फिल्म की कमाई के आंकड़ों में अलग अलग रिपोर्टों के अनुसार अंतर है। द इंडियन एक्सप्रेस की 6 सितंबर 2026 की रिपोर्ट के मुताबिक, फिल्म ने 30वें दिन भारत में 100 करोड़ रुपये का ग्रॉस कलेक्शन पार कर लिया। वहीं, ट्रेड रिपोर्टों में भारत का नेट कलेक्शन करीब 99.13 करोड़ रुपये बताया गया।
यह सफलता इसलिए खास है क्योंकि फिल्म में कोई बड़ा स्टार नहीं है और इसका बजट भी बहुत कम बताया गया है। हालांकि, बॉक्स ऑफिस की पूरी कमाई को निर्माता का मुनाफा नहीं माना जा सकता, क्योंकि टिकटों की कमाई का हिस्सा वितरकों और सिनेमाघरों को भी जाता है।
हनुमान अंश नीम करोली बाबा के जीवन और शिक्षाओं से प्रेरित एक भक्ति आधारित फिल्म है। इसकी कहानी एक ऐसे दुखी युवक के इर्द गिर्द घूमती है, जो अपनी मां को खोने के बाद ईश्वर की तलाश करता है। इस यात्रा में उसे सेवा, प्रेम और मानवता का महत्व समझ में आता है।
फिल्म के निर्देशक विशाल चतुर्वेदी ने बताया कि शूटिंग के दौरान सेट पर शाकाहारी भोजन रखा गया था। उन्होंने खुद रोज हनुमान चालीसा का पाठ किया और करीब साढ़े चार महीने तक फलाहार का पालन किया। यह फिल्म के आध्यात्मिक विषय के प्रति उनकी व्यक्तिगत प्रतिबद्धता को दिखाता है।
अनुप्रिया की कहानी सिर्फ एक फिल्म की सफलता तक सीमित नहीं है। यह दिखाती है कि किसी विषय के प्रति गहरी जिज्ञासा और मेहनत से नई दिशा मिल सकती है। एक कॉलेज असाइनमेंट से शुरू हुआ सफर उन्हें फिल्म निर्माण तक ले गया और उनकी पहली फिल्म ने दर्शकों के बीच खास जगह बनाई।
उनकी कहानी उन युवाओं के लिए भी प्रेरणा है, जो पढ़ाई के दौरान किसी नए क्षेत्र में रुचि विकसित करते हैं। हालांकि, फिल्म निर्माण जैसे क्षेत्र में सफलता के लिए केवल उत्साह नहीं, बल्कि रिसर्च, सही टीम और दर्शकों की पसंद को समझना भी जरूरी है।
फिल्म की सफलता के बाद अनुप्रिया और टीम ने इसके दो और हिस्से बनाने की योजना की जानकारी दी है। अगर यह योजना आगे बढ़ती है, तो हनुमान अंश एक बड़ी फिल्म सीरीज का रूप ले सकती है।
फिलहाल, फिल्म की सफलता ने यह जरूर साबित किया है कि दर्शक केवल बड़े सितारों और भारी बजट वाली फिल्मों को ही पसंद नहीं करते। अगर कहानी में भावनात्मक जुड़ाव हो और विषय दर्शकों के मन से जुड़ जाए, तो छोटी फिल्म भी बड़ी सफलता हासिल कर सकती है।