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भारत के 19.7 करोड़ कामगारों पर AI का असर: हर 4 में से 1 भारतीय पर संकट, नौकरी जाएगी या निखरेगी?

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI ) के कारण भारत के रोजगार की तस्वीर बदल सकती है। AI के इस्तेमाल से कुछ काम तेजी से और आसानी से हो सकेंगे, लेकिन कई नौकरियों में इंसानों की जरूरत भी कम हो सकती है।
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Oct 16, 2026
AI impact on job
सांकेतिक इमेज (सोर्स- Chatgpt)

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आने वाले सालों में भारत के रोजगार का नक्शा बदल सकता है। कुछ काम तेज और आसान होंगे, तो कई नौकरियों में इंसानों की जरूरत घट सकती है। ग्रेट लेक्स इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट, चेन्नई की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक देश में करीब 19.7 करोड़ कामगार ऐसे काम में हैं, जिनके रूटीन हिस्से आगे चलकर मशीनें संभाल सकती हैं। वहीं करीब 4.6 करोड़ कामगार ऐसे पेशों में हैं, जहां AI उनकी क्षमता और काम की रफ्तार बढ़ा सकता है।

किसने तैयार की रिपोर्ट?

AI, ऑटोमेशन एंड इंडियाज वर्कफोर्स: हू गेन्स, हू इज एक्सपोज्ड, एंड हाउ पॉलिसी कैन शेप द फ्यूचर शीर्षक वाला यह शोधपत्र रविवार 11 अक्टूबर को जारी हुआ था। इसे मुख्य आर्थिक सलाहकार वी. अनंत नागेश्वरन ने जारी किया। इसके लेखक संस्थान के सेंटर फॉर फाइनेंस एंड इकोनॉमिक्स रिसर्च की प्रमुख विद्या महाम्बरे, IMT गाजियाबाद के सहायक प्रोफेसर विवेक जाधव और तमिलनाडु के मुख्यमंत्री के अतिरिक्त सचिव (IAS) विष्णु वेणुगोपालन हैं। अध्ययन का आधार आवधिक श्रम बल सर्वेक्षण (PLFS) का आंकड़ा है।

4 में से 1 का क्या मतलब है?

रिपोर्ट के अनुसार करीब 15.05 करोड़ कामगार, यानी कामकाजी उम्र की आबादी का 24.6 प्रतिशत, AI से प्रभावित होने वाले पेशों में हैं। यहां से 4 में से 1 का आंकड़ा लिया गया है। अध्ययन में 11.4 प्रतिशत कामगारों पर काम के कुछ हिस्से AI द्वारा बदले जाने का जोखिम और 7.6 प्रतिशत को उत्पादकता में फायदे का अनुमान बताया गया है। रिपोर्ट साफ कहती है कि 19.7 करोड़ का आंकड़ा सभी नौकरियां खत्म होने का संकेत नहीं है। यह उन लोगों की संख्या है जिनके काम में रूटीन टास्क का हिस्सा ज्यादा है।

युवा और महिलाओं पर असर

15 से 24 साल के करीब 39.4 प्रतिशत कामगार ज्यादा रूटीन वाले काम में हैं। शहरों में यह हिस्सा 55 प्रतिशत तक पहुंच जाता है। AI से प्रभावित महिलाओं में 37.6 प्रतिशत का काम AI का पूरक है, जबकि पुरुषों में 28.4 प्रतिशत का।

रिपोर्ट के मुताबिक इसकी वजह महिलाओं का स्वास्थ्य और शिक्षा जैसे गैर-रूटीन कामों में ज्यादा होना है। हालांकि 20 से 29 साल की सिर्फ 18 प्रतिशत महिलाएं वेतन वाले रोजगार में हैं, जबकि इसी उम्र के करीब 79 प्रतिशत पुरुष हैं।

राज्यों की तस्वीर

केरल में AI एक्सपोजर सबसे ज्यादा 42 प्रतिशत है। हरियाणा में 37.9 और तमिलनाडु में 32.9 प्रतिशत है। मध्य प्रदेश में यह सबसे कम 16.1 प्रतिशत के आसपास है। हिमाचल प्रदेश में AI से प्रभावित 43.3 प्रतिशत कामगारों को AI से मदद मिल सकती है। उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड और मध्य प्रदेश में काम के प्रतिस्थापन का दबाव ज्यादा बताया गया है। पंजाब में रूटीन वाले कामों में लगे कामगारों की हिस्सेदारी सबसे अधिक 44.6 प्रतिशत है।

बेरोजगारी की चिंता

रिपोर्ट के अनुसार 2025 में 15 से 64 साल के दो करोड़ से ज्यादा लोग बेरोजगार थे, जिनमें 1.87 करोड़ की उम्र 15 से 34 साल थी। 20-29 साल के स्नातकों में बेरोजगारी दर कुल दर से दोगुनी से ज्यादा रही।

दूसरे अध्ययन क्या कहते हैं?

IIM अहमदाबाद और वाधवानी फाउंडेशन के सर्वे में 55 प्रतिशत व्हाइट-कॉलर कर्मचारियों ने कार्यस्थल पर AI टूल इस्तेमाल करने की बात कही। 72 प्रतिशत ने माना कि AI से प्रदर्शन बेहतर होता है और 53 प्रतिशत को नई नौकरियां बनने की उम्मीद है। यह सर्वे साफ दिखाता है कि AI का असर शुरू हो चुका है।

सरकार और नीति पर सुझाव

रिपोर्ट के लेखकों ने स्कूलों में AI शिक्षा, AI टूल्स तक आसान पहुंच और रूटीन काम वाले कामगारों व युवाओं के लिए प्रशिक्षण की सिफारिश की है। उनके अनुसार AI का कुल असर दिखने में समय लगेगा, क्योंकि कंपनियों में इसे अपनाने की रफ्तार असमान है। फिर भी "इंतजार करने के बजाय पहले से तैयारी" जरूरी है।

Updated on:
16 Oct 2026 08:47 pm
Published on:
16 Oct 2026 08:47 pm
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