
सांकेतिक इमेज (सोर्स- Chatgpt)
भारत और यूरोपीय मुक्त व्यापार संघ (EFTA) के बीच व्यापार एवं आर्थिक साझेदारी समझौते (टीईपीए) से वर्ष 2040 तक भारत में 10 लाख से 20 लाख तक नए प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार पैदा होने की संभावना है। इसके साथ ही, इससे औद्योगिक प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा मिलने और उच्च गुणवत्ता वाले निवेश आकर्षित होने की उम्मीद है। यह जानकारी उद्योग मंडल एसोचैम की ओर से शुक्रवार को दी गई।
भारत-ईएफटीए व्यापार एवं आर्थिक साझेदारी समझौते (टीईपीए) के एक साल पूरे होने पर जारी बयान में भारतीय वाणिज्य एवं उद्योग मंडल महासंघ (एसोचैम) ने कहा कि इस समझौते के तहत ईएफटीए ने 15 वर्षों में भारत में 100 अरब डॉलर का निवेश करने की प्रतिबद्धता जताई है। इसमें पहले दशक के दौरान 50 अरब डॉलर का निवेश शामिल है।
बयान में कहा गया कि इस प्रतिबद्धता को वास्तविक परियोजनाओं, विनिर्माण इकाइयों, स्वच्छ ऊर्जा उपक्रमों और रोजगार के अवसरों में बदलना होगा। उन्नत विनिर्माण और ग्रीन हाइड्रोजन से इस अगले चरण को गति मिलने की उम्मीद है।
भारत-ईएफटीए व्यापार एवं आर्थिक साझेदारी समझौते के साथ स्विट्जरलैंड, नॉर्वे, आइसलैंड और लिकटेंस्टीन के साथ भारत की साझेदारी की मजबूत शुरुआत हुई है। यह साझेदारी धीरे-धीरे एक व्यापार समझौते से आगे बढ़कर निवेश, नवाचार और रोजगार के मंच के रूप में विकसित हो रही है।
एसोचैम के अध्यक्ष निर्मल के. मिंडा ने कहा- अगला कदम टीईपीए के तहत 100 अरब डॉलर के निवेश और 10 लाख प्रत्यक्ष रोजगार के महत्वाकांक्षी लक्ष्य को व्यवहार्य परियोजनाओं और रोजगार के अवसरों में बदलना है। मिंडा ने कहा कि उन्नत विनिर्माण और ग्रीन हाइड्रोजन में काफी संभावनाएं हैं और इन साझेदारियों में सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) को भी अभिन्न हिस्सा बनाना होगा।
एसोचैम के अध्यक्ष निर्मल के. मिंडा के अनुसार, टीईपीए ने भारतीय निर्यातकों के लिए बड़े बाजार तक पहुंच के अवसर खोले हैं। ईएफटीए ने अपनी 92.2 प्रतिशत टैरिफ श्रेणियों पर शुल्क रियायतें देने की पेशकश की है, जिससे भारत के 99.6 प्रतिशत निर्यात को बाजार पहुंच मिलने का रास्ता खुला है।
उद्योग मंडल ने अनुमान जताया कि इस समझौते से फार्मास्यूटिकल्स, कपड़ा, इंजीनियरिंग उत्पाद, रसायन, आभूषण, प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थ और समुद्री उत्पाद जैसे क्षेत्रों को लाभ मिल सकता है। वहीं, भारत ने डेयरी, सोया और कोयला जैसे संवेदनशील क्षेत्रों के हितों की सुरक्षा के लिए प्रतिबद्धताएं तय की हैं। दोनों पक्षों के बीच द्विपक्षीय व्यापार बढ़कर 26.7 अरब डॉलर पर पहुंच गया है, जिससे आगे विस्तार के लिए एक मजबूत आधार तैयार हुआ है। दुनिया भर से ईएफटीए देशों का सालाना आयात करीब 628 अरब डॉलर है, जो भारतीय कारोबारियों के लिए एक बड़ा अवसर प्रस्तुत करता है।
एसोचैम के महासचिव सौरभ सान्याल ने कहा- ईएफटीए देशों के जैविक रसायनों के आयात में भारत की 8.9 प्रतिशत हिस्सेदारी बताती है कि कितनी संभावनाएं मौजूद हैं। इसी तरह की सफलता फार्मास्यूटिकल्स, मशीनरी, बिजली के उपकरणों, ऑटोमोबाइल, चिकित्सा उपकरणों और कपड़ा क्षेत्र में भी दोहराई जा सकती है। सौरभ सान्याल ने कहा कि महाराष्ट्र, कर्नाटक, केरल और पूर्वोत्तर के राज्यों को कृषि उत्पादों, समुद्री खाद्य पदार्थों, कॉफी और मसालों के निर्यात से लाभ मिल सकता है। टीईपीए बड़े उद्योगों के साथ-साथ एमएसएमई, स्टार्टअप और किसानों के लिए भी अवसर उपलब्ध कराता है।
एसोचैम के बयान में कहा गया कि ग्रीन हाइड्रोजन सहयोग का एक उभरता हुआ क्षेत्र है। वर्ष 2030 तक सालाना कम से कम 50 लाख टन ग्रीन हाइड्रोजन उत्पादन का भारत का लक्ष्य नॉर्वे की समुद्री प्रौद्योगिकी, आइसलैंड की भू-तापीय ऊर्जा संबंधी विशेषज्ञता और स्विट्जरलैंड की इलेक्ट्रोलाइजर तकनीक के साथ अच्छी तरह मेल खाता है।
AI, रोबोटिक्स और उन्नत विनिर्माण भी सहयोग के संभावनाशील क्षेत्र हैं। भारत की उत्पादन से जुड़ी प्रोत्साहन (पीएलआई) योजनाएं, सेमीकॉन इंडिया 2.0 और इंडिया एआई मिशन, सटीक इंजीनियरिंग तथा ऑटोमेशन के क्षेत्र में ईएफटीए की विशेषज्ञता के साथ सहयोग के लिए मजबूत आधार प्रदान करते हैं।
Updated on:
16 Oct 2026 07:17 pm
Published on:
16 Oct 2026 07:17 pm
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