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धनतेरस पर सोना खरीदने जा रहे हैं? बिल चुकाने से पहले जान लें 6 जरूरी बातें, वरना पछताएंगे

त्योहारी सीजन में धनतेरस या दिवाली पर सोना खरीदने से पहले कुछ महत्वपूर्ण बातें जान लेना बेहद जरूरी है। आइए जानते हैं कि खरीदारी के दौरान कौन-कौन सी बातों का ध्यान रखना जरूरी है?
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Updated: 2 Nov 2026, 3:57 PM IST
buying gold
सांकेतिक इमेज (सोर्स- Janani)

त्योहारी सीजन में धनतेरस और दिवाली के दौरान सोना खरीदना भारतीय परिवारों की परंपरा का अहम हिस्सा रहा है। इस साल धनतेरस 6 नवंबर को मनाई जाएगी और बड़ी संख्या में लोग सोने-चांदी के आभूषण, सिक्के और अन्य कीमती वस्तुएं खरीदेंगे।

खरीदारी के समय क्या ध्यान रखें?

कई बार ग्राहक केवल सोने की कीमत देखकर खरीदारी कर लेते हैं, जबकि अंतिम बिल में कई अन्य शुल्क शामिल होते हैं। जिसकी वजह से कुल लागत काफी बढ़ जाती है। इसलिए भुगतान करने से पहले बिल में शामिल सभी चीजों को ध्यान से चेक करना बेहद जरूरी है।

सोने की शुद्धता, वजन और कीमत

सोने की कीमत किसी भी ज्वेलरी बिल का सबसे बड़ा हिस्सा होती है। अलग-अलग ज्वेलर्स के यहां सोने के भाव में अंतर हो सकता है। खरीदारी करते समय यह सुनिश्चित करें कि बिल में दर्ज प्रति ग्राम कीमत उसी कैरेट के सोने के अनुसार हो, जिसे आप खरीद रहे हैं। उदाहरण के लिए 22 कैरेट और 18 कैरेट सोने की कीमतें अलग होती हैं। अलग-अलग दुकानों के रेट की तुलना करना भी फायदेमंद हो सकता है।

मेकिंग चार्ज की जानकारी लें

सोने के आभूषण खरीदते समय मेकिंग चार्ज की जानकारी लें। मेकिंग चार्ज आभूषण को डिजाइन और तैयार करने की लागत होती है। कई ज्वेलर्स इसे सोने की कीमत का 1 प्रतिशत मानकर जोड़ते हैं, जबकि कुछ प्रति ग्राम के हिसाब से तय राशि लेते हैं।

आभूषण की डिजाइन जितनी जटिल होगी, मेकिंग चार्ज उतना अधिक हो सकता है। ऐसे में खरीदारी से पहले यह पूछना बेहतर रहता है कि मेकिंग चार्ज फिक्स है या इसमें मोलभाव की गुंजाइश है।

मेकिंग चार्ज किस आधार पर लिया गया?

कुछ ज्वेलर्स आभूषण बनाने की प्रक्रिया में सोने की संभावित बर्बादी को आधार बनाकर वेस्टेज चार्ज भी लेते हैं। कई बार यह शुल्क मेकिंग चार्ज में शामिल होता है और कई बार अलग से जोड़ा जाता है। इसलिए ग्राहक को यह स्पष्ट कर लेना चाहिए कि वेस्टेज चार्ज किस आधार पर लिया जा रहा है, ताकि एक ही लागत के लिए 2 बार भुगतान न करना पड़े।

शुद्धता की पहचान- BIS हॉलमार्क

सोने की शुद्धता की पहचान के लिए बीआईएस हॉलमार्क बेहद महत्वपूर्ण है। खरीदारी करते समय गहनों पर BIS हॉलमार्क और HUID नंबर अवश्य चेक करें। यदि बिल में हॉलमार्किंग चार्ज अलग से जोड़ा गया है, तो उसका स्पष्ट विवरण मांगना चाहिए। यह सुनिश्चित करता है कि खरीदा गया सोना प्रमाणित और शुद्ध है।

सोने के आभूषणों पर सामान्य तौर पर 3 प्रतिशत GST लगाया जाता है। यह टैक्स सोने की कीमत और मेकिंग चार्ज सहित कुल मूल्य पर लागू होता है। बिल में GST की गणना सही तरीके से की गई है या नहीं, इसकी जांच अवश्य करें। साथ ही यह भी सुनिश्चित करें कि टैक्स की जानकारी बिल में स्पष्ट रूप से दर्ज हो।

सिर्फ कीमत नहीं, पूरी संरचना समझना जरूरी

बाजार के जानकारों का कहना है कि धनतेरस पर सोना खरीदते समय केवल कीमत नहीं, बल्कि बिल की पूरी संरचना को समझना जरूरी है। सही हॉलमार्क, उचित मेकिंग चार्ज, पारदर्शी वेस्टेज शुल्क और सही जीएसटी सुनिश्चित करके ग्राहक अनावश्यक खर्च से बच सकते हैं। निवेश के उद्देश्य से खरीदारी करने वाले ग्राहकों के लिए सोने के सिक्के, बार या गोल्ड ईटीएफ जैसे विकल्प भी आभूषणों की तुलना में अधिक किफायती साबित हो सकते हैं।

Updated on:
2 Nov 2026, 3:57 PM IST
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