
भारत की समुद्री सुरक्षा वैश्विक स्तर और अधिक मजबूत होती दिख रही है। हाल ही में भारत ने कई महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं, जिनसे यह स्पष्ट होता है कि समुद्री सुरक्षा अब राष्ट्रीय हित के लिए और अधिक सशक्त की जा रही है।
फरवरी 2026 में विशाखापत्तनम में आयोजित नौवें इंडियन ओशन नेवल सिम्पोजियम (IONS) में भारत ने 33 देशों के नौसेना प्रमुखों और समुद्री सुरक्षा एजेंसियों के प्रतिनिधियों के बीच अध्यक्षता संभाली। यह भारत का 16 वर्ष बाद इस मंच पर पुनः नेतृत्व ग्रहण करना था, जो उसकी समुद्री कूटनीति और क्षेत्रीय सहयोग की दिशा में एक बड़ा संकेत है।
इसी प्रकार, मार्च 2026 में ‘इंडियन ओशन शिप (IOS) SAGAR’ अभियान की दूसरी कड़ी शुरू हुई, जिसमें भारतीय नौसेना और मित्र देशों की नौसेनाओं ने मिलकर बंदरगाह दौरे, संयुक्त अभ्यास और पेशेवर आदान-प्रदान किए। यह पहल भारत की समुद्री सहयोग नीति को और अधिक मजबूत करती है।
मई 2026 में ‘Indian Navy Maritime Security Strategy 2026 (INMSS‑2026)’ जारी की गई, जो पिछले दो दशकों में भारत की तीसरी सार्वजनिक समुद्री रणनीति है। इससे पूर्व ‘Freedom to Use the Seas’ (2007) और ‘Ensuring Secure Seas’ (2015) दस्तावेज प्रकाशित हुए थे। INMSS‑2026 में समुद्री रणनीति को अधिक स्पष्ट और समकालीन चुनौतियों के अनुरूप परिभाषित किया गया है, जैसे कि समुद्र के नीचे की महत्वपूर्ण संरचनाओं (Critical Undersea Infrastructure) पर ग्रे-जोन युद्ध की बढ़ती धमकी।
मई 2026 में क्वाड (भारत, अमेरिका, जापान, ऑस्ट्रेलिया) ने नई समुद्री निगरानी पहल की घोषणा की, जिससे चारों देशों की निगरानी क्षमताओं को जोड़कर क्षेत्र में वास्तविक समय में जानकारी साझा की जा सकेगी।
जुलाई 2026 में भारत और जापान ने समुद्री सुरक्षा, रक्षा तकनीक, जहाज निर्माण और आर्थिक सुरक्षा पर सहयोग बढ़ाने के लिए एक रोडमैप अपनाया। जापान ने ‘स्वतंत्र और खुले इंडो‑प्रशांत’ की नीति के तहत समुद्री सुरक्षा सहयोग को विशेष महत्व दिया है।
भारत ने समुद्री सुरक्षा के लिए अपने निगरानी तंत्र को भी मजबूत किया है। IMO (International Maritime Organization) के माध्यम से भारत ने सभी सदस्य देशों से IFC‑IOR (Information Fusion Centre – Indian Ocean Region) में स्वैच्छिक जहाज रिपोर्टिंग की अपील की, जिससे हिंद महासागर क्षेत्र में सुरक्षा घटनाओं पर त्वरित और समन्वित प्रतिक्रिया संभव हो सके।
इसके अतिरिक्त, DG शिपिंग और भारतीय नौसेना ने मिलकर ‘Maritime Security Advisory’ जारी किए हैं—जैसे कि जुलाई और अगस्त 2026 में खाड़ी क्षेत्र और काला सागर में भारतीय नाविकों की सुरक्षा के लिए सलाहें। IFC‑IOR ने नियमित ‘Weekly Maritime Security Update’ जारी करना भी आरंभ किया है, जो क्षेत्रीय घटनाओं पर नजर बनाए रखता है।
भारत की समुद्री नीति का आधार ‘SAGAR’ (Security and Growth for All in the Region) पहल है, जिसे मार्च 2015 में प्रस्तुत किया गया था। इसके बाद 2018 में ‘इंडो‑प्रशांत दृष्टिकोण’ आया, जो क्षेत्रीय सहयोग और नियम‑आधारित व्यवस्था पर बल देता है।
2020 के गलवान संघर्ष ने भारत की समुद्री रणनीति को और अधिक सक्रिय और सतर्क बना दिया। संसद की एक समिति ने पाया कि चीन की बढ़ती उपस्थिति और आर्थिक प्रभाव ने भारत को अपने नौसैनिक आधुनिकीकरण को तेज करने के लिए विवश किया है।
इसके अतिरिक्त, समुद्री व्यापार मार्गों की सुरक्षा, ऊर्जा आपूर्ति और वैश्विक व्यापार के लिए समुद्री मार्गों की अहमियत ने भारत को समुद्री प्रभुत्व की दिशा में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया है।
भारत की समुद्री सुरक्षा पहलें न केवल क्षेत्रीय शांति और व्यापार सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण हैं, बल्कि यह भारत को एक ‘नेट सिक्योरिटी प्रोवाइडर’ के रूप में स्थापित कर रही हैं। इससे भारत की अंतरराष्ट्रीय छवि मजबूत होती है और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं में स्थिरता आती है।
इन बिंदुओं पर भी गौर करें-