
Organic fertilizer soil health : जैविक खाद के क्या फायदे हैं, PC- Chatgpt
जैविक खाद खेत की मिट्टी में कार्बनिक पदार्थ बढ़ाने और उसकी भौतिक व जैविक गुणवत्ता सुधारने का महत्वपूर्ण माध्यम है। गोबर की सड़ी खाद, कम्पोस्ट, वर्मी कम्पोस्ट और हरी खाद मिट्टी की संरचना, जलधारण क्षमता और सूक्ष्मजीवी गतिविधियों को बेहतर बनाने में मदद कर सकते हैं। हालांकि, जैविक खाद का असर रासायनिक उर्वरकों की तरह तुरंत दिखाई नहीं देता। इसलिए बेहतर परिणाम के लिए इसे मिट्टी जांच के आधार पर संतुलित उर्वरक प्रबंधन के साथ इस्तेमाल करना अधिक प्रभावी तरीका है। ICAR भी जैविक खाद, हरी खाद और जैव उर्वरकों को रासायनिक उर्वरकों के साथ एकीकृत करने पर जोर देता है।
गोबर की खाद और कम्पोस्ट जैसे जैविक पदार्थ मिट्टी में कार्बनिक पदार्थ बढ़ाते हैं। इससे मिट्टी की संरचना और उसकी जलधारण क्षमता में सुधार हो सकता है। खासकर ऐसी जमीन में जहां जैविक पदार्थ कम हो, नियमित रूप से अच्छी तरह तैयार जैविक खाद का इस्तेमाल मिट्टी की गुणवत्ता बनाए रखने में मदद कर सकता है।
हालांकि, इसका असर मिट्टी के प्रकार, खाद की गुणवत्ता और इस्तेमाल की मात्रा पर निर्भर करता है। इसलिए केवल खाद डालना पर्याप्त नहीं है; मिट्टी की वास्तविक स्थिति को समझना भी जरूरी है।
जैविक खाद मिट्टी में कार्बनिक पदार्थ उपलब्ध कराती है, जो लाभकारी सूक्ष्मजीवों की गतिविधि को बढ़ावा दे सकता है। इससे पोषक तत्वों के चक्रण और पौधों को उनकी उपलब्धता में मदद मिलती है।
ICAR के अनुसार कम्पोस्ट, वर्मी कम्पोस्ट, जैव खाद और हरी खाद को एकीकृत पोषक तत्व प्रबंधन में शामिल करने से मिट्टी की जैविक गतिविधि और पोषक तत्वों की उपलब्धता को बेहतर किया जा सकता है।
मिट्टी को केवल एक या दो पोषक तत्वों की जरूरत नहीं होती। लगातार और जरूरत से ज्यादा यूरिया या अन्य रासायनिक उर्वरकों का इस्तेमाल पोषक तत्वों का असंतुलन पैदा कर सकता है और लागत भी बढ़ा सकता है। ICAR ने किसानों को मिट्टी जांच के आधार पर संतुलित उर्वरक इस्तेमाल करने और यूरिया के अत्यधिक उपयोग से बचने की सलाह दी है।
इसका मतलब यह नहीं है कि रासायनिक उर्वरक पूरी तरह छोड़ देना चाहिए। सही तरीका है—मिट्टी जांच के आधार पर जैविक खाद, जैव उर्वरक और जरूरत के अनुसार रासायनिक उर्वरकों का संतुलित इस्तेमाल।
हां, कुछ परिस्थितियों में जैविक खाद और जैव उर्वरकों के इस्तेमाल से रासायनिक उर्वरकों की जरूरत कम हो सकती है। लेकिन इसकी कोई एक निश्चित प्रतिशत सीमा सभी फसलों और खेतों पर लागू नहीं होती।
मिट्टी की उर्वरता, फसल की पोषक तत्व जरूरत, उपलब्ध जैविक खाद और पिछले वर्षों के उर्वरक इस्तेमाल के आधार पर मात्रा तय करनी चाहिए। इसलिए “रासायनिक खाद आधी कर दें” जैसी सामान्य सलाह के बजाय मिट्टी जांच आधारित सिफारिश अपनाना ज्यादा सुरक्षित है।
केंद्र सरकार की परंपरागत कृषि विकास योजना (PKVY) और मिशन ऑर्गेनिक वैल्यू चेन डेवलपमेंट फॉर नॉर्थ ईस्टर्न रीजन (MOVCDNER) के तहत जैविक खेती और जैविक इनपुट को बढ़ावा दिया जा रहा है। 30 जून 2026 तक PKVY के तहत 18.93 लाख हेक्टेयर क्षेत्र को कवर किया गया था और 33.63 लाख किसानों को लाभ मिला था। MOVCDNER के तहत 2.36 लाख हेक्टेयर क्षेत्र और 2.74 लाख किसान कवर किए गए थे।
GOBARdhan से जुड़े संयंत्रों में तैयार जैविक उर्वरकों के लिए सरकार Market Development Assistance (MDA) के तहत ₹1,500 प्रति मीट्रिक टन सहायता देती है। यह सहायता मुख्य रूप से उत्पादकों के लिए है, इसे सीधे किसान को मिलने वाली नकद सब्सिडी समझना सही नहीं होगा।
गोबर या कम्पोस्ट पूरी तरह सड़ा हुआ और अच्छी गुणवत्ता का होना चाहिए। अधपकी खाद डालने से पोषक तत्वों की उपलब्धता और फसल पर असर पड़ सकता है। खाद को खेत में अच्छी तरह मिलाने से उसका प्रभाव बेहतर तरीके से फैलता है।
गोबर की खाद, कम्पोस्ट या वर्मी कम्पोस्ट की एक समान मात्रा हर खेत के लिए सही नहीं होती। फसल की जरूरत, मिट्टी की स्थिति और उपलब्ध खाद के पोषक तत्वों के आधार पर मात्रा तय करें।
मिट्टी जांच के बाद कृषि विभाग या कृषि विज्ञान केंद्र की सिफारिश को प्राथमिकता देना सबसे बेहतर तरीका है।
जैव उर्वरक और जैविक खाद एक ही चीज नहीं हैं। जैव उर्वरक में विशिष्ट लाभकारी सूक्ष्मजीव होते हैं, जबकि कम्पोस्ट और गोबर की खाद मुख्यतः जैविक पदार्थ और पोषक तत्व उपलब्ध कराते हैं।
जैव उर्वरक का बीज उपचार या मिट्टी में इस्तेमाल करते समय उत्पाद के लेबल और कृषि विशेषज्ञ की अनुशंसित मात्रा व विधि का पालन करें। ICAR के प्रशिक्षण कार्यक्रमों में भी जैव उर्वरकों के बीज उपचार और मिट्टी में प्रयोग की तकनीक पर किसानों को प्रशिक्षण दिया जा रहा है।
पूरी तरह जैविक खाद पर निर्भर रहने से सभी फसलों की पोषक तत्व जरूरत पूरी हो जाए, यह जरूरी नहीं है। इसी तरह केवल रासायनिक उर्वरकों पर निर्भर रहना भी संतुलित पोषण का सही तरीका नहीं है।
सबसे बेहतर रणनीति एकीकृत पोषक तत्व प्रबंधन (INM) है। इसमें जैविक खाद, हरी खाद, फसल अवशेष, जैव उर्वरक और जरूरत के अनुसार रासायनिक उर्वरकों को मिट्टी जांच और फसल की आवश्यकता के अनुसार जोड़ा जाता है।
| तरीका | संभावित फायदा |
|---|---|
| गोबर की सड़ी खाद | मिट्टी में जैविक पदार्थ बढ़ाने में मदद |
| कम्पोस्ट | मिट्टी की संरचना और पोषक तत्व प्रबंधन में मदद |
| वर्मी कम्पोस्ट | जैविक पदार्थ और पोषक तत्वों का स्रोत |
| हरी खाद | जैविक पदार्थ और पोषक तत्व चक्र में मदद |
| जैव उर्वरक | लाभकारी सूक्ष्मजीव उपलब्ध कराता है |
| मिट्टी जांच | सही मात्रा में उर्वरक तय करने में मदद |
| एकीकृत पोषण प्रबंधन | जैविक और रासायनिक स्रोतों का संतुलित इस्तेमाल |
जैविक खाद को रासायनिक उर्वरक का तत्काल विकल्प मानने के बजाय मिट्टी की दीर्घकालिक सेहत सुधारने वाले इनपुट के रूप में देखना ज्यादा उचित है। अच्छी तरह सड़ी जैविक खाद के साथ मिट्टी जांच आधारित रासायनिक उर्वरक, हरी खाद और जैव उर्वरक का संतुलित इस्तेमाल लागत, पोषक तत्वों की उपलब्धता और मिट्टी की गुणवत्ता के बीच बेहतर संतुलन बना सकता है।
Updated on:
31 Aug 2026 04:00 pm
Published on:
31 Aug 2026 04:00 pm
