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भारतीय रेलवे का नया नियम: डिजिटल टिकट का स्क्रीन शॉट या व्हाट्सएप फॉरवर्ड दिखाने पर लगेगा भारी जुर्माना

भारतीय रेलवे ने डिजिटल टिकटों के प्रदर्शन को लेकर सख्त नियम लागू किए हैं, जिसके तहत स्क्रीनशॉट या व्हाट्सएप फॉरवर्ड दिखाना अवैध माना गया है। ऐसा करने पर यात्रियों को बिना टिकट यात्रा मानकर भारी जुर्माना भरना पड़ सकता है।
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Sep 03, 2026
Railway Digital Ticket Rule News.
रेलवे डिजिटल टिकट नियम: अब व्हाट्सएप या स्क्रीनशॉट पर टिकट दिखाना पड़ेगा भारी, बिना टिकट यात्रा मानी जाएगी। ( फोटो: Google Gemini.)

भारतीय रेलवे ने यात्रियों की सुविधा और टिकट चेकिंग प्रक्रिया में पारदर्शिता लाने के लिए डिजिटल टिकटिंग नियमों को लेकर एक अहम स्पष्टीकरण जारी किया है। आधुनिक तकनीक के इस दौर में जहां अधिकतर यात्री काउंटर की लंबी लाइनों से बचने के लिए मोबाइल ऐप्स (जैसे यूटीएस - UTS) के माध्यम से अनारक्षित या जनरल टिकट बुक करते हैं, वहीं छोटी-सी लापरवाही अब भारी वित्तीय दंड का कारण बन सकती है।

नियमों के विरुद्ध बताते हुए बिना टिकट यात्रा की श्रेणी में रखने का प्रावधान

रेलवे बोर्ड के नए दिशानिर्देशों के अनुसार, यदि कोई यात्री अपने स्मार्टफोन पर व्हाट्सएप, अन्य मैसेजिंग प्लेटफॉर्म या गैलरी में सेव किए गए स्क्रीनशॉट के माध्यम से डिजिटल टिकट दिखाता है, तो उसे वैध नहीं माना जाएगा। रेलवे प्रशासन ने इसे स्पष्ट रूप से नियमों के विरुद्ध बताते हुए बिना टिकट यात्रा की श्रेणी में रखने का प्रावधान किया है।

ट्रेन में डिजिटल टिकट यात्रा के दौरान केवल वैध और लाइव ऐप इंटरफेस पर ही दिखाएं, स्क्रीनशॉट या व्हाट्सएप फॉरवर्ड अमान्य है। इंफो ग्राफ में लिखे 'प्रिंद' शब्द को 'प्रिंट' पढ़ें। ( फोटो: Google Gemini)


ऐसे हो सकता है टिकट का सत्यापन

इस कदम के पीछे मुख्य उद्देश्य फर्जी टिकटों के प्रसार को रोकना और रेलवे राजस्व प्रणाली को सुरक्षित करना है। रेलवे के नियमों के मुताबिक, जब कोई यात्री मोबाइल ऐप के जरिए टिकट बुक करता है, तो उस टिकट का सत्यापन केवल संबंधित ऐप के आधिकारिक सर्वर, लाइव इंटरफेस और उसके वैध क्यूआर कोड (QR Code) या जीपीएस वैलिडेशन के माध्यम से ही संभव है।

पकड़े जाने पर जुर्माना और नियमानुसार कानूनी कार्रवाई भी हो सकती है

स्क्रीनशॉट या किसी अन्य थर्ड-पार्टी ऐप पर फॉरवर्ड किया गया टिकट आसानी से एडिट या पुराना हो सकता है, जिससे टिकट चेकिंग स्टाफ (TTE) के लिए उसकी प्रामाणिकता की पुष्टि करना असंभव हो जाता है। रेलवे अधिनियम के तहत वैध टिकट के अभाव में पकड़े जाने पर न केवल उचित किराया बल्कि भारी जुर्माना और नियमानुसार कानूनी कार्रवाई भी की जा सकती है।

पारंपरिक काउंटर से भौतिक टिकट प्राप्त करना अधिक सुरक्षित विकल्प

विशेषज्ञों का सुझाव है कि यात्रियों को हमेशा आधिकारिक ऐप के भीतर जाकर ही अपना लाइव टिकट दिखाना चाहिए। यदि नेटवर्क की समस्या हो या फोन की बैटरी डिस्चार्ज होने का जोखिम हो, तो स्टेशन पर उपलब्ध ऑटोमैटिक टिकट वेंडिंग मशीन (ATVM) या पारंपरिक काउंटर से भौतिक टिकट प्राप्त करना अधिक सुरक्षित विकल्प है। यात्रियों को यह भी ध्यान रखना चाहिए कि रेलवे के डिजिटल प्लेटफॉर्म पर सुरक्षा मानक अत्यंत कड़े कर दिए गए हैं, इसलिए यात्रा के दौरान किसी भी प्रकार की असुविधा से बचने के लिए तकनीकी रूप से पूरी तरह सत्यापित और अपडेटेड डिजिटल टिकट का ही उपयोग करें।

Updated on:
03 Sept 2026 03:39 pm
Published on:
03 Sept 2026 03:39 pm