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शिकायत दर्ज हुई, लेकिन इंसाफ नहीं मिला: सरकारी विभागों के खिलाफ 70 हजार से ज्यादा भ्रष्टाचार की शिकायतें

केंद्रीय सतर्कता आयोग (CVC) की सालाना रिपोर्ट में चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, वर्ष 2025 में सरकारी विभागों और संस्थानों के खिलाफ भ्रष्टाचार की 70 हजार से अधिक शिकायतें दर्ज हुईं।
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भारत

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Vinay Shakya

Sep 03, 2026

corruption in government departments

सांकेतिक इमेज (Chatgpt)

केंद्रीय सतर्कता आयोग (CVC) की वार्षिक रिपोर्ट 2025 ने सरकारी विभागों और सार्वजनिक संस्थानों में भ्रष्टाचार की तस्वीर एक बार फिर सामने ला दी है। रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2025 में विभिन्न मुख्य सतर्कता अधिकारियों को कुल 70,584 भ्रष्टाचार की शिकायतें प्राप्त हुईं। यह आंकड़ा बताता है कि सरकारी तंत्र में जवाबदेही को लेकर आम लोगों की शिकायतें अब भी बड़ी संख्या में दर्ज हो रही हैं।

कुल शिकायतों में 64,905 का निपटान

मुख्य सतर्कता अधिकारियों को सरकारी विभागों के खिलाफ कुल 70,584 भ्रष्टाचार की शिकायतें प्राप्त हुईं। रिपोर्ट के मुताबिक, 31 दिसंबर 2025 तक इनमें से 64,905 शिकायतों का निपटारा कर दिया गया, जबकि साल के अंत तक 5,679 शिकायतें प्रक्रियाधीन रहीं। नियम के अनुसार सीवीओ को शिकायतों की जांच 3 महीने के भीतर पूरी करनी होती है, लेकिन इसके बावजूद 2,002 शिकायतें तीन महीने से भी अधिक समय से लंबित पाई गईं। यानी लगभग हर तीसरी बकाया शिकायत तय समय सीमा को पार कर चुकी थी। आयोग समय-समय पर सीवीओ के पास लंबित शिकायतों की समीक्षा कर इनके त्वरित निपटारे की कोशिश करता है।

बैंक और रेलवे में सर्वाधिक शिकायतें

शिकायतों की संख्या के लिहाज से बैंकिंग क्षेत्र सबसे ऊपर रहा। बैंकों के खिलाफ सबसे ज्यादा 9,933 शिकायतें दर्ज हुईं, जिनमें से 9,520 का निपटारा किया जा चुका है। इसके साथ ही 413 शिकायतें लंबित हैं। इनमें से भी 52 शिकायतें 3 महीने से अधिक समय से अटकी हुई थीं। शिकायतों के मामले में रेलवे दूसरे स्थान पर रहा।

रेलवे में 9,381 शिकायतों में से 8,754 निपटाई गईं और 627 लंबित रहीं। इसके बाद आवास एवं शहरी मामलों के मंत्रालय की 6,531 और स्थानीय निकायों (दिल्ली सरकार को छोड़कर, जिसमें दिल्ली जल बोर्ड, MCD, NDMC और DSIIDC शामिल हैं) की 4,834 शिकायतें आईं।

कोयला क्षेत्र से 4,118, वित्त क्षेत्र से 3,107, दिल्ली सरकार से 2,804, पेट्रोलियम मंत्रालय से 2,722, दिल्ली पुलिस से 2,633 और सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय से 2,139 शिकायतें दर्ज हुईं। इनके अलावा मानव संसाधन विकास मंत्रालय से जुड़ी 2,030, श्रम मंत्रालय से 1,894, बीमा कंपनियों से 1,536, दूरसंचार क्षेत्र से 1,469, रक्षा मंत्रालय से 1,410, उपभोक्ता मामलों से 1,123, इस्पात मंत्रालय से 1,023 और डाक विभाग से 1,003 शिकायतें प्राप्त हुईं।

कार्रवाई के लिए भेजी गईं शिकायतें

रिपोर्ट के मुताबिक, CVC ने पूरे साल के दौरान कुल 18,651 शिकायतें आगे की कार्रवाई के लिए संबंधित विभागों को भेजीं। इनमें सबसे बड़ा हिस्सा 4,110 शिकायतें स्थानीय निकायों (दिल्ली सरकार को छोड़कर) से जुड़ी थीं। इसके अलावा 1,749 शिकायतें बैंकों, 1,428 रेलवे और 1,318 पेट्रोलियम मंत्रालय से संबंधित थीं। वहीं, दिल्ली सरकार के खिलाफ 1,307 और रक्षा मंत्रालय से जुड़ी 1,016 शिकायतें कार्रवाई के लिए भेजी गईं। यह आंकड़े दिखाते हैं कि शिकायत मिलने और उस पर ठोस कार्रवाई शुरू होने के बीच का अनुपात हर विभाग में अलग-अलग है।

CVC की भूमिका और पिछला ट्रेंड

केंद्रीय सतर्कता आयोग देश की सर्वोच्च सतर्कता संस्था है, जो केंद्र सरकार के विभागों, सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों और बैंकों में भ्रष्टाचार-रोधी निगरानी का काम करती है। यह हर विभाग में तैनात मुख्य सतर्कता अधिकारियों (सीवीओ) के जरिए काम करता है और गंभीर मामलों में अभियोजन की मंजूरी में देरी को लेकर संबंधित मंत्रालयों को नियमित रिमाइंडर भी भेजता रहा है। पिछले 5 वर्षों के रुझान को देखें तो बैंक और रेलवे लगातार शिकायतों की सूची में शीर्ष पर बने हुए हैं, जो इन दोनों क्षेत्रों में जनता के सीधे और बड़े पैमाने पर संपर्क को दर्शाता है। बैंकिंग लेनदेन और रेलवे टिकटिंग-भर्ती जैसी सेवाएं आम नागरिक के रोजमर्रा जीवन से सीधे जुड़ी होती हैं, इसलिए यहां शिकायतों की संख्या स्वाभाविक रूप से ज्यादा रहती है।