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क्या आपके बचत खाते में रखा पैसा पूरी तरह सुरक्षित है? जानिए DICGC बीमा की पूरी कहानी

DICGC Deposit Insurance India : जानिए बैंक में रखा आपका पैसा कितना सुरक्षित है, DICGC का ₹5 लाख का बीमा नियम कैसे काम करता है और बैंक डूबने की स्थिति में आपको अपना पैसा वापस कैसे मिलेगा।
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Aug 14, 2026
Saving Account
क्या बैंक में आपका पैसा सुरक्षित?

बैंक में पैसा जमा करना ज्यादातर लोगों के लिए सबसे सुरक्षित विकल्प माना जाता है। वेतन से लेकर बचत और आपातकालीन फंड तक, करोड़ों भारतीय अपना पैसा बचत खाते, फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) और अन्य बैंक खातों में रखते हैं। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि अगर किसी बैंक पर संकट आ जाए या उसका लाइसेंस रद्द हो जाए, तो आपके जमा पैसे का क्या होगा?

बहुत से लोगों को यह पता नहीं होता कि बैंक में जमा उनकी पूरी राशि की गारंटी नहीं होती। भारत में जमाकर्ताओं की सुरक्षा के लिए एक विशेष व्यवस्था है, जिसे डिपॉजिट इंश्योरेंस एंड क्रेडिट गारंटी कॉरपोरेशन (DICGC) कहा जाता है। यही संस्था यह तय करती है कि बैंक डूबने की स्थिति में आपको कितना पैसा वापस मिलेगा।

DICGC क्या है?

DICGC, भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की पूर्ण स्वामित्व वाली सहायक संस्था है। इसका काम बैंकों में जमा राशि का बीमा करना है ताकि किसी बैंक के संकट में आने पर जमाकर्ताओं का पैसा पूरी तरह न डूबे।

  • बचत खाता (Savings Account)
  • चालू खाता (Current Account)
  • फिक्स्ड डिपॉजिट (FD)
  • रिकरिंग डिपॉजिट (RD)

यानी बैंक में जमा आपकी अधिकांश सामान्य बचत DICGC के दायरे में आती है।

कितनी राशि सुरक्षित होती है?

वर्तमान नियमों के अनुसार DICGC प्रत्येक जमाकर्ता को प्रति बैंक ₹5 लाख तक का बीमा कवरेज देता है। इसमें मूलधन (Principal) और उस पर मिलने वाला ब्याज दोनों शामिल होते हैं।

उदाहरण के लिए यदि किसी बैंक में आपके:

  • बचत खाते में ₹3 लाख हैं
  • FD में ₹1.5 लाख हैं
  • ब्याज मिलाकर कुल राशि ₹4.8 लाख है

तो पूरी राशि बीमा के तहत सुरक्षित रहेगी। लेकिन यदि कुल राशि ₹8 लाख है, तो केवल ₹5 लाख तक की रकम बीमित होगी। बाकी ₹3 लाख पर DICGC की गारंटी नहीं होगी।

क्या एक बैंक की अलग-अलग शाखाओं में पैसा रखने से फायदा मिलेगा?

नहीं। यदि आपके एक ही बैंक की कई शाखाओं में खाते हैं, तो सभी खातों की राशि जोड़कर बीमा सीमा तय की जाती है। उदाहरण से समझें शाखा A में बचत खाता ₹2 लाख, शाखा B में FD ₹2 लाख की, शाखा C में RD ₹2 लाख की तो कुल मिलाकर हुए ₹6 लाख। ऐसी स्थिति में DICGC केवल ₹5 लाख तक ही सुरक्षा देगा।

अलग-अलग बैंकों में पैसा रखने का क्या फायदा है?

DICGC का कवरेज प्रति बैंक लागू होता है। मान लीजिए बैंक A में 5 लाख, बैंक B में 5 लाख, C में 5 लाख रुपए हैं तो तीनों बैंकों में आपकी पूरी ₹15 लाख की राशि बीमित मानी जाएगी, क्योंकि हर बैंक के लिए अलग-अलग ₹5 लाख की सीमा लागू होती है। यही कारण है कि बड़े निवेशक अक्सर अपनी राशि अलग-अलग बैंकों में बांटकर रखते हैं।

संयुक्त खाते (Joint Account) में क्या नियम हैं?

DICGC 'एक ही अधिकार और क्षमता' (Same Right and Same Capacity) के आधार पर बीमा देता है। उदाहरण के लिए समझिए, व्यक्तिगत खाता, पति-पत्नी का संयुक्त खाता, साझेदारी फर्म का खाता, ट्रस्ट का खाता। इन सभी को अलग-अलग क्षमता माना जा सकता है और प्रत्येक श्रेणी पर अलग बीमा सीमा लागू हो सकती है। इसलिए कुछ मामलों में व्यक्ति कानूनी रूप से अधिक बीमा कवरेज प्राप्त कर सकता है।

बैंक डूब जाए तो पैसा कब मिलता है?

यदि RBI किसी बैंक पर प्रतिबंध लगाता है या उसका लाइसेंस रद्द कर देता है, तो DICGC बीमित राशि का भुगतान करता है।

वर्तमान नियमों के अनुसार:

  • बैंक आवश्यक जानकारी DICGC को भेजता है।
  • DICGC दावे की जांच करता है।
  • पात्र जमाकर्ताओं को भुगतान किया जाता है।

2021 में कानून में बदलाव के बाद ऐसी स्थिति में 90 दिनों के भीतर भुगतान की व्यवस्था की गई है, ताकि जमाकर्ताओं को वर्षों तक इंतजार न करना पड़े।

भारत में कितने बैंक DICGC के तहत आते हैं?

मार्च 2025 तक कुल लगभग 1,982 बैंक DICGC के तहत बीमित थे। इनमें 139 वाणिज्यिक बैंक और 1,843 सहकारी बैंक शामिल थे। इसका मतलब है कि भारत का अधिकांश बैंकिंग तंत्र इस सुरक्षा व्यवस्था के दायरे में आता है। दिलचस्प आंकड़ा: अधिकांश खाताधारक पूरी तरह सुरक्षित हैं

DICGC के आंकड़ों के अनुसार:

  • लगभग 97.6% जमा खाते पूरी तरह बीमित हैं।
  • लेकिन कुल जमा राशि का केवल करीब 41-43% हिस्सा ही बीमित है।

ऐसा इसलिए क्योंकि अधिकांश लोगों की जमा राशि ₹5 लाख से कम है, जबकि बड़े खातों में करोड़ों रुपये जमा होते हैं, जिनका केवल एक हिस्सा ही बीमा के दायरे में आता है।

अपने पैसे को सुरक्षित रखने के लिए क्या करें?

यदि आपके बैंक खातों में बड़ी राशि है, तो कुछ सावधानियां आपके जोखिम को कम कर सकती हैं।

ध्यान रखने योग्य बातें

  • एक ही बैंक में ₹5 लाख से ज्यादा राशि रखने से बचें।
  • बड़ी रकम को अलग-अलग बैंकों में विभाजित करें।
  • संयुक्त खातों और अलग-अलग वैध क्षमता वाले खातों के नियम समझें।
  • समय-समय पर जांच करें कि आपका बैंक DICGC के तहत बीमित है।
  • केवल ब्याज दर देखकर बैंक न चुनें, उसकी वित्तीय स्थिति भी देखें।
Updated on:
14 Aug 2026 02:14 pm
Published on:
14 Aug 2026 02:14 pm