
इस बार, 2026 में जन्माष्टमी अगस्त में नहीं, बल्कि सितंबर की शुरुआत में है और इसका शुभ समय (मुहूर्त) मध्यरात्रि में आता है। आइए जानते हैं, पंचांग और ज्योतिष के अनुसार इस बार जन्माष्टमी कब और कैसे मनाना शुभ रहेगा।
पंचांग और ज्योतिषीय गणनाओं के अनुसार, 2026 में भाद्रपद कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि 4 सितंबर की रात 2:25 बजे शुरू होकर 5 सितंबर की रात 12:13 बजे समाप्त होगी। ऐसे में जन्माष्टमी का मुख्य उत्सव 4 सितंबर की रात को ही मनाया जाना शुभ है।
इस बार जन्माष्टमी की निशीथ पूजा का शुभ समय (मध्यरात्रि काल) 4 सितंबर की रात 11:57 बजे से 5 सितंबर की रात 12:43 बजे तक रहेगा। यह समय भगवान कृष्ण के जन्म के क्षण के अनुरूप माना जाता है और पूजा-अर्चना के लिए सबसे शुभ माना जाता है।
व्रत पारण, अर्थात व्रत खोलने का समय भी महत्वपूर्ण है। ज्योतिषीय परंपरा के अनुसार, पारण तब किया जाता है जब अष्टमी तिथि और रोहिणी नक्षत्र समाप्त हो जाएं। इस वर्ष यह समय 5 सितंबर की सुबह सूर्योदय के बाद का माना गया है। कुछ स्रोतों में पारण का समय 5 सितंबर की सुबह 6:01 बजे के बाद बताया गया है।
ज्योतिष और परंपराओं में यह अंतर भी ध्यान देने योग्य है कि स्मार्त परंपरा के अनुसार जन्माष्टमी 4 सितंबर को मनाई जाती है, जबकि वैष्णव या इस्कॉन परंपरा में रोहिणी नक्षत्र के मेल को प्राथमिकता देते हुए 5 सितंबर को उत्सव मनाया जा सकता है। वहीं घरेलू स्तर पर अधिकांश लोग 4 सितंबर की रात को ही पूजा-अर्चना करेंगे।
| विषय | विवरण |
|---|---|
| जन्माष्टमी तिथि | 4 सितंबर 2026 (रात 2:25 बजे से प्रारंभ) |
| अष्टमी तिथि समाप्ति | 5 सितंबर 2026, रात 12:13 बजे |
| निशीथ पूजा मुहूर्त | 4 सितंबर रात 11:57 बजे – 5 सितंबर रात 12:43 बजे |
| व्रत पारण समय | 5 सितंबर सुबह सूर्योदय के बाद (लगभग 6:00 बजे के बाद) |
(डिस्क्लेमरः यह लेख ज्योतिष शास्त्र की पारंपरिक मान्यताओं पर आधारित है, वैज्ञानिक तथ्य पर नहीं। कृपया इसे आस्था के रूप में लें और महत्वपूर्ण निर्णयों से पहले विशेषज्ञ की सलाह लें।)