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बायोफर्टिलाइजर क्या है? जानें कैसे सुधर सकती है मिट्टी और फसल की सेहत

क्या आप जानते हैं कि आपकी फसलें बिना रासायनिक खाद के भी भरपूर हो सकती हैं? बायोफर्टिलाइजर का जादू जानकर आप अपनी खेती को नई ऊंचाइयों पर ले जा सकते हैं।
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भारत

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Adarsh Thakur

Aug 30, 2026

Organic Farming

सांकेतिक इमेजः एआई

खेती में बायोफर्टिलाइजर (जैविक खाद) का उपयोग बढ़ रहा है, क्योंकि यह रासायनिक खाद पर निर्भरता घटाकर मिट्टी की सेहत सुधारने और फसल उत्पादन बढ़ाने में मदद करता है। आइए जानते हैं कि बायोफर्टिलाइजर क्या है, इसके फायदे, उपयोग के तरीके और किसान भाइयों के लिए व्यावहारिक सुझाव।

बायोफर्टिलाइजर क्या है?

बायोफर्टिलाइजर जीवित सूक्ष्मजीवों का मिश्रण होता है, जैसे नाइट्रोजन फिक्स करने वाले (जैसे राइजोबियम, अजोस्पिरिलम), फॉस्फोरस घुलनशील करने वाले (PSB), और पौधों को बढ़ावा देने वाले (PGPR)। ये मिट्टी में पोषक तत्वों की उपलब्धता बढ़ाते हैं, मिट्टी की उर्वरता सुधारते हैं और रासायनिक खाद की मात्रा कम कर सकते हैं।

उत्पादन में सुधार के प्रमाण

एक अध्ययन में पाया गया कि बायोफर्टिलाइजर के उपयोग से औसतन 1.5 टन प्रति हेक्टेयर तक फसल उत्पादन बढ़ा, विशेषकर जब यह नाइट्रोजन फिक्सर और फॉस्फेट सॉल्विलाइजर के साथ मिलाकर उपयोग किया गया।

ICAR-भारतीय मिट्टी विज्ञान संस्थान, भोपाल के BIOMIX नामक मिश्रित बायोफर्टिलाइजर ने विभिन्न फसलों में लाभ दिखाया, चावल में 13%, गेहूं में 9%, दालों में 13%, तेल वाली फसलों में 14%, और सब्जियों में 10% तक उत्पादन बढ़ा।

टमाटर पर एक अध्ययन में PSB, अजोबैक्टर और ट्राइकोडर्मा जैसे बायोफर्टिलाइजर ने मिट्टी की उर्वरता, पोषक तत्वों की उपलब्धता और फसल उत्पादन में सुधार दिखाया।

काले चने में गोबर खाद और बायोफर्टिलाइजर के साथ रासायनिक फॉस्फोरस मिलाकर उपयोग करने पर उत्पादन और फॉस्फोरस अवशोषण में वृद्धि देखी गई।

ऑर्गेनिक बासमती चावल पर लंबे समय तक बायोफर्टिलाइजर, गोबर खाद और फसल अवशेषों के साथ प्रयोग करने पर मिट्टी में कार्बनिक पदार्थ में वृद्धि हुई, और अनाज की गुणवत्ता, प्रोटीन, मिलिंग रेट और उत्पादन में सुधार हुआ।

कैसे करें बायोफर्टिलाइजर का उपयोग

ICFRE की रिपोर्ट के अनुसार, 5–10 किलोग्राम बायोफर्टिलाइजर को 80–100 किलोग्राम मिट्टी या कंपोस्ट के साथ मिलाकर 10–12 घंटे तक छोड़ दें, फिर अंतिम जुताई में खेत में मिला दें।

ICAR की सलाह है कि बीजों को 2.5–5 मिलीलीटर तरल बायोफर्टिलाइजर के साथ पानी मिलाकर उपचारित करें, या पौधों की जड़ों को 10–20 लीटर पानी में घोल बनाकर 10–15 मिनट डुबोकर रोपाई करें।

ICAR-भोपाल ने बताया कि तरल इनोकुलेंट की 4–5 मिलीलीटर मात्रा 1 किलोग्राम बीज को कोट करने के लिए पर्याप्त है।

किसानों के लिए सुझाव

  • बायोफर्टिलाइजर को रासायनिक खाद के साथ मिलाकर उपयोग करें, जैसे 75–100% RDF के साथ, ताकि लागत कम हो और उत्पादन बराबर या बेहतर हो।
  • मिश्रित बायोफर्टिलाइजर (जैसे BIOMIX) चुनें, जो नाइट्रोजन फिक्सर, फॉस्फेट सॉल्विलाइजर और PGPR को एक साथ मिलाता है, इससे कई फसलों में बेहतर परिणाम मिलते हैं।
  • मिट्टी की स्थिति (जैसे pH, कार्बनिक पदार्थ) और फसल के हिसाब से बायोफर्टिलाइजर चुनें, मेटा-विश्लेषण में यह पाया गया कि इन कारकों से प्रभाव में अंतर आता है।
  • प्रयोग से पहले छोटे हिस्से में परीक्षण करें, हर खेत की मिट्टी अलग होती है, इसलिए पहले सीमित क्षेत्र में प्रयोग कर देखें।
  • बायोफर्टिलाइजर खरीदने से पहले प्रमाणित स्रोत से ही लें और स्टोरेज निर्देशों का पालन करें, गलत भंडारण से जीवाणु मर सकते हैं।

जोखिम और सावधानी

बायोफर्टिलाइजर का असर मिट्टी की स्थिति, जलवायु और फसल पर निर्भर करता है। इसलिए यह जरूरी है कि आप प्रयोग से पहले छोटे स्तर पर परीक्षण करें।

गलत अनुपात या अनुपयुक्त मिश्रण से लाभ कम हो सकता है, इसलिए निर्देशों का पालन करें।

बायोफर्टिलाइजर अकेले चमत्कार नहीं है, इसे संतुलित पोषण, सिंचाई और फसल प्रबंधन के साथ मिलाकर ही उपयोग करें।

आगे क्या करें?

आप अपने खेत में बायोफर्टिलाइजर का उपयोग शुरू कर सकते हैं, पहले छोटे हिस्से में, फिर धीरे-धीरे पूरे खेत में। मिट्टी की जांच कराएं और स्थानीय कृषि विभाग या कृषि विश्वविद्यालय से सलाह लें। इससे लागत कम होगी, मिट्टी स्वस्थ होगी और उत्पादन में सुधार होगा।

बायोफर्टिलाइजर एक कारगर, टिकाऊ और लागत-कुशल तरीका है जो रासायनिक खाद पर निर्भरता घटाकर मिट्टी और किसान दोनों के लिए लाभदायक है।

बायोफर्टिलाइजर के उपयोग से उत्पादन में वृद्धि होती है और यह पर्यावरण के लिए भी अनुकूल है। यह मिट्टी की संरचना को सुधारता है और जल धारण क्षमता को बढ़ाता है, जिससे सिंचाई की आवश्यकता कम होती है।

इसके अलावा, बायोफर्टिलाइजर का उपयोग करने से किसानों को दीर्घकालिक लाभ होता है, क्योंकि यह मिट्टी की जैविक गतिविधियों को बढ़ावा देता है, जिससे फसल की गुणवत्ता और पोषण मूल्य में सुधार होता है।

कुल मिलाकर, बायोफर्टिलाइजर का उपयोग एक स्थायी कृषि पद्धति की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, जो किसानों की आय में वृद्धि और पर्यावरण संरक्षण दोनों में सहायक है।