
झारखंड में पिछले 16 दिनों से चल रहा छात्र आंदोलन सोमवार देर रात खत्म हुआ जब राज्य की ग्रामीण विकास, ग्रामीण कार्य एवं पंचायती राज मंत्री दीपिका पांडे सिंह ने रांची सदर अस्पताल पहुंचकर अनशनकारी छात्र नेता देवेंद्र नाथ महतो को अपने हाथों से जूस पिलाकर उनका अनशन समाप्त कराया। इस मौके पर स्वास्थ्य मंत्री डॉ. इरफान अंसारी और JLKM विधायक जयराम महतो भी मौजूद रहे।
दीपिका ने कहा भी कि पेपर लीक धांधली पर झारखंड एक उदाहरण सेट करेगा। बयान से ये साफ हो रहा है कि सरकार बड़ी कार्रवाई कर सकती है। आइए, दीपिका पांडे सिंह के बाेर में विस्तार से समझते हैं-
JPSC (झारखंड लोक सेवा आयोग) और JSSC (झारखंड कर्मचारी चयन आयोग) की परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों और पेपर लीक के विरोध में देवेंद्र नाथ महतो, उम्मे हबीबा और राहुल क्रांति सहित कई युवा नेता लंबे समय से अनिश्चितकालीन अनशन पर बैठे थे। अनशन के कारण स्वास्थ्य बिगड़ने के बाद देवेंद्र नाथ महतो को रांची सदर अस्पताल में भर्ती कराया गया था, लेकिन अस्पताल में भी आंदोलन की गतिविधियां जारी रहीं।
सोमवार शाम मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने JSSC-CGL परीक्षा और TDPL (टेंडर डिजाइनेटेड प्राइवेट लिमिटेड) द्वारा आयोजित सभी विवादित परीक्षाओं को रद्द करने की बड़ी घोषणा की। इसके बाद आधी रात के बाद देवेंद्र नाथ महतो ने सदर अस्पताल में मंत्री दीपिका पांडे सिंह के हाथों जूस पीकर अपना अनशन तोड़ा। उनके साथ अनशन पर बैठीं उम्मे हबीबा और राहुल क्रांति ने भी अपना अनशन समाप्त कर दिया।
अनशन तोड़ने के बाद देवेंद्र नाथ महतो ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन, कांग्रेस सांसद राहुल गांधी और राज्य के मंत्रियों दीपिका पांडे सिंह व इरफान अंसारी का धन्यवाद किया और परीक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के लिए सख्त कानूनों व सुधारों की मांग दोहराई।
मीडिया से बातचीत में दीपिका पांडे सिंह ने कहा कि सरकार झारखंड में शुरू हुए छात्र आंदोलन, खासकर परीक्षा सुधारों से जुड़े मुद्दों के प्रति हमेशा संवेदनशील रही है और मुख्यमंत्री खुद आंदोलन की गतिविधियों पर बारीकी से नजर रखे हुए थे। हालांकि, CBI जांच की मांग पर सरकार के रुख को लेकर सवाल अब भी बरकरार हैं, जिसका जवाब मंत्री ने मीडिया के सामने देने की कोशिश की।
22 जून 1976 को रांची के एक राजनीतिक परिवार में जन्मीं दीपिका पांडे सिंह की मां प्रतिभा पांडे महिला कांग्रेस की पूर्व प्रदेश अध्यक्ष रह चुकी हैं। उन्होंने सेंट जेवियर्स कॉलेज, रांची से बीएससी (जीवविज्ञान), जेवियर इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल सर्विस, रांची से सूचना प्रबंधन में पीजी डिप्लोमा और को-ऑपरेटिव कॉलेज, जमशेदपुर से एलएलबी की पढ़ाई की है।
राजनीति में उनकी शुरुआत झारखंड युवा कांग्रेस से हुई, जहां वे महासचिव और बाद में राष्ट्रीय सचिव बनीं। 2019 में उन्होंने कांग्रेस-झामुमो-राजद गठबंधन की उम्मीदवार के रूप में महागामा सीट से चुनाव लड़ा और 89,224 वोट पाकर भाजपा के अशोक कुमार को 12,499 वोटों से हराया। 2024 में उन्होंने दोबारा जीत दर्ज की, इस बार 1,14,069 वोट हासिल कर अशोक कुमार को 18,645 वोटों के अंतर से पराजित किया।
5 दिसंबर 2024 को मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के मंत्रिमंडल विस्तार में उन्हें शामिल किया गया। जारी अधिसूचना के अनुसार उन्हें पंचायती राज, ग्रामीण कार्य और ग्रामीण विकास विभागों का दायित्व सौंपा गया है। गौरतलब है कि इससे पहले, चुनाव-पूर्व कार्यकाल में जुलाई 2024 में उनके पास कुछ समय के लिए कृषि, पशुपालन एवं सहकारिता विभाग भी था, लेकिन दिसंबर 2024 के मंत्रिमंडल विस्तार के बाद यह विभाग कांग्रेस की ही विधायक शिल्पी नेहा तिर्की को सौंप दिया गया, जबकि आपदा प्रबंधन विभाग की जिम्मेदारी डॉ. इरफान अंसारी को दी गई। खुद दीपिका पांडे सिंह ने हाल ही में एक कार्यक्रम में स्वीकार किया कि इस बार जनता के भरोसे से उन्हें पहले से बड़ा और अहम मंत्रालय — ग्रामीण विकास व पंचायती राज — मिला है।
मई 2026 में रांची में आयोजित 'iGOT कर्मयोगी' पोर्टल की राज्य स्तरीय कार्यशाला में उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया था कि वे केवल दिमाग से नहीं, बल्कि दिल से भी काम करें और जनता को खाली हाथ न लौटाएं — यह बयान उनकी अब की भूमिका से भी मेल खाता प्रतीत होता है, जहां उन्होंने आंदोलनरत छात्रों के बीच खुद पहुंचकर संवाद और सहानुभूति दिखाई।
चुनाव आयोग में दाखिल 2024 के हलफनामे के अनुसार दीपिका पांडे सिंह की कुल संपत्ति करीब ₹6.07 करोड़ है, जिसमें ₹2.94 करोड़ चल संपत्ति और ₹3.13 करोड़ अचल संपत्ति शामिल है। उन पर करीब ₹1.08 करोड़ की देनदारियां भी हैं। 2019 के मुकाबले उनकी संपत्ति में उल्लेखनीय बढ़ोतरी दर्ज हुई है।
छात्र आंदोलन को शांत कराने में निभाई गई भूमिका ने एक बार फिर दीपिका पांडे सिंह को झारखंड की राजनीति में एक संवेदनशील और सक्रिय चेहरे के रूप में स्थापित किया है। युवा कांग्रेस से मंत्री पद तक का उनका सफर दिखाता है कि वे संकट की घड़ी में सीधे मैदान में उतरकर संवाद बनाने की रणनीति अपनाती रही हैं। हालांकि, JPSC-JSSC परीक्षा विवाद पर CBI जांच की मांग को लेकर सरकार का रुख अब भी सवालों के घेरे में है, और आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि सरकार इस मामले में आगे क्या कदम उठाती है।