
एयर पॉल्यूशन को अक्सर सांस संबंधी समस्याओं से जोड़कर देखा जाता है, लेकिन यह आपके फेफड़ों के साथ-साथ आपके हृदय और रक्त वाहिकाओं, यानी आपके कार्डियोवैस्कुलर स्वास्थ्य के लिए भी उतना ही खतरनाक है। मेडिकल कम्युनिटी में, इसे अब एक बड़ा रिस्क फैक्टर माना जाता है।
डॉक्टर्स का कहना है कि जब हम प्रदूषित हवा में सांस लेते हैं, तो इसमें मौजूद अल्ट्रा-फाइन पार्टिकल्स (खासकर PM 2.5) फेफड़ों के नेचुरल फिल्ट्रेशन सिस्टम को पार करके ब्लडस्ट्रीम में चले जाते हैं और सीधे दिल और ब्लड वेसल को नुकसान पहुंचाते हैं।
हवा में मौजूद छोटे कणों, जैसे PM 2.5 और PM 10 के संपर्क में आने से शरीर में सूजन और ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस हो सकता है। ये कण इतने छोटे होते हैं कि वे फेफड़ों से होते हुए खून में जा सकते हैं, जिससे खून की नसों के काम करने के तरीके पर बुरा असर पड़ सकता है और शरीर की ब्लड प्रेशर को कंट्रोल करने की क्षमता कम हो सकती है।
विशेषज्ञों के मुताबिक, जब हम प्रदूषित हवा में सांस लेते हैं, तो शरीर 'सिम्पैथेटिक नर्वस सिस्टम' को एक्टिवेट कर सकता है, जिससे हार्ट रेट बढ़ सकता है और ब्लड वेसल सिकुड़ सकती हैं। इससे ब्लड प्रेशर कुछ समय के लिए बढ़ सकता है। जिन लोगों को पहले से ही हाई ब्लड प्रेशर (हाइपरटेंशन) है, उनके लिए खराब क्वालिटी वाली हवा में लंबे समय तक रहने से दिल और ब्लड वेसल पर और ज्यादा दबाव पड़ सकता है। यह कनेक्शन खास तौर पर इसलिए जरूरी है, क्योंकि इसका असर हमेशा तुरंत नहीं दिखता। एक व्यक्ति पूरी तरह से हेल्दी महसूस कर सकता है, भले ही उसका दिल और ब्लड वेसल इस एनवायरनमेंटल स्ट्रेस पर रिएक्ट कर रहे हों।
जब AQI लेवल बहुत ज्यादा हो, तो लोगों को बाहर ज्यादा मेहनत वाली फिजिकल एक्टिविटी से बचना चाहिए (खासकर ज्यादा ट्रैफिक वाली जगहों पर)। हाई ब्लड प्रेशर वाले लोगों को रेगुलर अपने ब्लड प्रेशर को मॉनिटर करना चाहिए। घर के अंदर की एयर क्वालिटी पर भी ध्यान देना जरूरी है।
हालांकि एयर पॉल्यूशन हाई ब्लड प्रेशर के हर मामले का अकेला कारण नहीं है, लेकिन यह एक एनवायरनमेंटल रिस्क फैक्टर है जिसे अक्सर नजरअंदाज कर दिया जाता है। अपने दिल और ब्लड वेसल की हेल्थ को सुरक्षित रखने के लिए हमें सिर्फ डाइट और एक्सरसाइज से आगे बढ़कर उस हवा के असर पर भी ध्यान देना चाहिए जिसमें हम सांस लेते हैं।
डॉक्टर्स का कहना है कि एयर पॉल्यूशन अब सिर्फ सांस की बीमारियों तक ही सीमित नहीं है। हाई एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) लेवल और बढ़े हुए ब्लड प्रेशर के बीच एक बड़ा, लेकिन अक्सर नजरअंदाज किया जाने वाला लिंक है। हवा में मौजूद बारीक पार्टिकुलेट मैटर (खासकर PM2.5) के संपर्क में आने से शरीर में सूजन हो सकती है, जिससे खून की नसें सिकुड़ सकती हैं और उनका नॉर्मल काम रुक सकता है। नतीजतन, इससे दिल पर ज्यादा दबाव पड़ता है, जिससे ब्लड प्रेशर बढ़ सकता है।
जिन लोगों को पहले से ही हाई ब्लड प्रेशर, हृदय संबंधी बीमारियां या डायबिटीज है, और जो बुजुर्ग हैं, उनमें इसका खतरा सबसे अधिक होता है। ज्यादा पॉल्यूशन के समय, बाहर ज्यादा मेहनत वाली फिजिकल एक्टिविटी से बचना चाहिए। जब AQI का स्तर बहुत ज्यादा हो, तो बाहर निकलने से बचें। अगर आपको पहले से ही कोई स्वास्थ्य जोखिम है, तो अपने ब्लड प्रेशर पर नजर रखें।
इसके अलावा, डॉक्टर द्वारा बताई गई दवाएं नियमित रूप से लें। अगर सीने में दर्द या सांस लेने में तकलीफ महसूस हो, तो इसे नजरअंदाज न करें। हालांकि, हाई AQI का मतलब यह नहीं है कि आपको हाइपरटेंशन (हाई ब्लड प्रेशर) हो ही जाएगा, लेकिन यह निश्चित रूप से एक एनवायरनमेंटल रिस्क फैक्टर है जो आपकी हेल्थ पर बुरा असर डाल सकता है।