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महादेव ऐप मामले के मास्टरमाइंड सौरभ चंद्राकर का ओमान से प्रत्यर्पण, आरोपी को भारत लेकर आई CBI टीम

महादेव ऐप अवैध सट्टेबाजी सिंडिकेट के प्रमोटर और मुख्य आरोपी सौरभ चंद्राकर के खिलाफ बड़ी कार्रवाई हुई है। CBI टीम सौरभ चंद्राकर को प्रत्यर्पण के बाद ओमान से भारत लेकर आई है।
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भारत

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Vinay Shakya

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Updated: 1 Nov 2026, 9:29 PM IST

saurabh chandrakar extradited from oman

सौरभ चंद्राकर का ओमान से प्रत्यर्पण (सोर्स- IANS)

केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने महादेव ऐप अवैध सट्टेबाजी सिंडिकेट के प्रमोटर और मुख्य आरोपी सौरभ चंद्राकर को ओमान से प्रत्यर्पित करके भारत वापस लाने में सफलता हासिल की है। सीबीआई की एक विशेष टीम उसे ओमान से भारत लेकर आई है। अब उसे रायपुर स्थित सीबीआई की विशेष अदालत में पेश किया जाएगा।

दो मामलों में वांछित है सौरभ चंद्राकर

सौरभ चंद्राकर CBI के दो मामलों में वांछित है, जिनमें पहले ही आरोप-पत्र दाखिल किए जा चुके हैं। इसके अलावा प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के एक मामले में भी उसके खिलाफ अभियोजन शिकायत दाखिल की जा चुकी है।

यह प्रत्यर्पण भारत के लिए बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है। इससे विदेशों में बैठकर भारतीय नागरिकों के खिलाफ अपराध करने वाले भगोड़ों को वापस लाकर भारतीय कानून के तहत कार्रवाई करने के प्रयासों को मजबूती मिली है।

महादेव मामले की CBI जांच

छत्तीसगढ़ सरकार के अनुरोध पर सीबीआई ने महादेव ऑनलाइन बुक मामलों की जांच शुरू की थी। जांच में सामने आया कि महादेव ऑनलाइन बुक देश के सबसे बड़े अवैध ऑनलाइन सट्टेबाजी नेटवर्क में से एक था, जिसे भारत के बाहर से संचालित किया जाता था।

यह नेटवर्क क्रिकेट, फुटबॉल, ताश के खेल और अन्य आयोजनों पर अवैध सट्टेबाजी कराता था। इसके लिए देशभर में फ्रेंचाइजी आधारित "पैनल" और "ब्रांच" का नेटवर्क बनाया गया था, जो लोगों को जोड़ने और उनसे पैसे लेने का काम करता था।

जांच में यह भी पता चला कि अवैध सट्टेबाजी से होने वाली कमाई को बड़ी संख्या में फर्जी बैंक खातों के जरिए घुमाया जाता था। कई स्तर के लेनदेन के बाद इस रकम को हवाला के माध्यम से विदेश भेजा जाता था। सीबीआई के अनुसार, इस अवैध कमाई का एक हिस्सा कुछ सरकारी अधिकारियों और कर्मचारियों को संरक्षण राशि के रूप में भी दिया जाता था, ताकि सिंडिकेट बिना किसी रुकावट के अपना कारोबार चला सके।

CBI ने दर्ज किया था केस

सीबीआई ने इस मामले में भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 1988, भारतीय दंड संहिता की आपराधिक साजिश, धोखाधड़ी और जालसाजी से जुड़ी धाराओं तथा छत्तीसगढ़ जुआ (प्रतिषेध) अधिनियम के तहत आरोप-पत्र दाखिल किए हैं। सौरभ चंद्राकर इन मामलों में प्रमुख आरोपियों में शामिल है। वहीं प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने इस सिंडिकेट से जुड़ी भारत और विदेशों में स्थित कई संपत्तियों को जब्त किया है।

सौरभ चंद्राकर के खिलाफ जारी रेड कॉर्नर नोटिस के आधार पर रॉयल ओमान पुलिस ने उसे ढूंढकर हिरासत में लिया था। इसके बाद सीबीआई और ईडी ने उसके खिलाफ जुटाए गए सबूतों के साथ ओमान सरकार को औपचारिक प्रत्यर्पण प्रस्ताव भेजा। भारत सरकार की विभिन्न एजेंसियों, इंटरपोल और ओमान के अधिकारियों के सहयोग से प्रत्यर्पण प्रक्रिया पूरी की गई। प्रत्यर्पण मंजूर होने के बाद सीबीआई की टीम मस्कट पहुंची और उसे भारत लेकर आई।

सीबीआई ने इस कार्रवाई में सहयोग के लिए ओमान सरकार और रॉयल ओमान पुलिस का आभार जताया है। एजेंसी ने कहा कि यह दोनों देशों के बीच मजबूत संबंधों और अंतरराष्ट्रीय संगठित अपराध के खिलाफ साझा प्रतिबद्धता का उदाहरण है। सीबीआई के अनुसार, आरोपी का मेडिकल परीक्षण कराया जाएगा और ट्रांजिट रिमांड मिलने के बाद उसे रायपुर ले जाया जाएगा। इसके बाद उसे सीबीआई के विशेष न्यायाधीश के समक्ष पेश किया जाएगा।