
दूध से बने स्नैक्स का स्वाद और पोषण दोनों ही हमें आकर्षित करते हैं, चाहे वो हल्के-फुल्के पनीर टिक्के हों या मीठे-मीठे खोये के लड्डू। हर कोई इन्हें बेहद पसंद करता है।
लेकिन सवाल यह है कि क्या ये सच में “सुपरफूड” कहलाने लायक हैं? चलिए, स्वाद और विज्ञान दोनों की नजर से इस सवाल का जवाब जानते हैं।
दूध में कई जरूरी पोषक तत्व होते हैं, जिनमें प्रोटीन, कैल्शियम, विटामिन B12, B2 (राइबोफ्लेविन), विटामिन A, D, फॉस्फोरस, और पोटैशियम शामिल हैं। यह कैल्शियम का प्रमुख स्रोत है और इसे “न्यूट्रिएंट-डेंस” यानी पोषक तत्वों से भरपूर खाद्य माना जाता है।
एक व्यापक समीक्षा में पाया गया कि रोजाना लगभग 200 मिलीलीटर दूध पीने से हृदय रोग, स्ट्रोक, उच्च रक्तचाप, मोटापा, मेटाबॉलिक सिंड्रोम, टाइप 2 डायबिटीज, और ऑस्टियोपोरोसिस जैसी बीमारियों का जोखिम कम हो सकता है। हालांकि, कुछ मामलों में जैसे प्रोस्टेट कैंसर या लैक्टोज असहिष्णुता (Lactose Intolerance) में सावधानी बरतनी चाहिए।
खोया, पनीर और छेना जैसे उत्पाद भारतीय व्यंजनों में स्वाद और पोषण दोनों जोड़ते हैं। खोया में प्रति 100 ग्राम लगभग 315 किलो कैलोरी और 14.8 ग्राम प्रोटीन होता है। पनीर में प्रति 100 ग्राम में लगभग 16 ग्राम प्रोटीन और 274 किलो कैलोरी होती है। ये स्नैक्स प्रोटीन, कैल्शियम और ऊर्जा का अच्छा स्रोत हैं।
“सुपरफूड” शब्द अक्सर मार्केटिंग में इस्तेमाल होता है, लेकिन वैज्ञानिक दृष्टि से इसका मतलब होता है, ऐसा खाद्य जो कम मात्रा में भी बहुत पोषण दे। दूध और उससे बने स्नैक्स पोषक तत्वों से भरपूर हैं, लेकिन उनका सेवन संतुलित मात्रा में होना चाहिए।
कुछ लोगों में लैक्टोज असहिष्णुता या दूध एलर्जी हो सकती है। ऐसे में डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है। डेयरी उत्पादों के फायदे व्यापक रूप से सिद्ध हैं, लेकिन सावधानी भी जरूरी है।
यदि आप स्वस्थ विकल्प चाहते हैं, तो कम वसा वाला पनीर या छेना चुनें और खोया आधारित मिठाइयों में चीनी कम करें। साथ ही, डेयरी के साथ अन्य पौष्टिक खाद्य जैसे फल, सब्जियां, दालें भी शामिल करें, ताकि भोजन संतुलित और स्वादिष्ट बने।
यदि आप दूध से बने स्नैक्स का आनंद लेते हैं, तो उन्हें संतुलित मात्रा में शामिल करें, जैसे त्योहारों या खास मौकों पर। रोजमर्रा में हल्का पनीर या छेना बेहतर विकल्प हो सकता है, जबकि खोया जैसे कैलोरी-भरे स्नैक्स सीमित मात्रा में ही लें।