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कैंसर से लड़ाई में भारत की नई रणनीति, रोकथाम, स्क्रीनिंग, इलाज और आर्थिक सुरक्षा पर एक साथ जोर

India Cancer Control Strategy : भारत में कैंसर से बचाव और इलाज के लिए रोकथाम, स्क्रीनिंग, एचपीवी वैक्सीन, आयुष्मान भारत और सस्ती दवाओं पर एकीकृत रणनीति बनाई गई है। जानें इसके मुख्य बिंदु।
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India Cancer Control Strategy

India Cancer Control Strategy : देश में कैंसर से कैसे होगा बचाव, PC- Chatgpt

भारत में कैंसर के बढ़ते मामलों को देखते हुए सरकार ने रोकथाम, शीघ्र पहचान, उपचार और वित्तीय सहायता को जोड़ने वाली बहुआयामी रणनीति अपनाई है। इसका उद्देश्य केवल कैंसर का इलाज करना नहीं, बल्कि बीमारी की समय रहते पहचान करना और मरीजों तक उपचार की पहुंच आसान बनाना भी है।

कैंसर नियंत्रण के लिए केंद्र सरकार ने 2010 में राष्ट्रीय कैंसर, मधुमेह, हृदय रोग एवं स्ट्रोक रोकथाम एवं नियंत्रण कार्यक्रम (NPCDCS) शुरू किया था। यह कार्यक्रम जागरूकता बढ़ाने, शुरुआती जांच, समय पर उपचार और बेहतर रेफरल व्यवस्था पर केंद्रित है।

इसके तहत जिला अस्पतालों और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में गैर-संचारी रोग (NCD) क्लीनिक, डे-केयर सुविधाएं और विशेष उपचार सेवाएं विकसित की गई हैं। साथ ही, देशभर में 19 स्टेट कैंसर इंस्टीट्यूट (SCI) और 20 टर्शियरी कैंसर केयर सेंटर (TCCC) स्थापित किए गए हैं। नए एम्स संस्थानों में भी कैंसर जांच और उपचार की सुविधाओं का विस्तार किया गया है।

सर्वाइकल कैंसर रोकथाम की बड़ी पहल

सर्वाइकल कैंसर की रोकथाम के लिए सरकार ने फरवरी 2026 में राष्ट्रीय एचपीवी टीकाकरण अभियान शुरू किया। इस अभियान का लक्ष्य 14 वर्ष की किशोरियों को नि:शुल्क एचपीवी वैक्सीन उपलब्ध कराना है।

यह कदम महत्वपूर्ण है क्योंकि एचपीवी संक्रमण सर्वाइकल कैंसर का प्रमुख कारण माना जाता है। हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि केवल टीकाकरण पर्याप्त नहीं है। नियमित स्क्रीनिंग और समय पर उपचार की व्यवस्था भी उतनी ही आवश्यक है, ताकि बीमारी की शुरुआती अवस्था में पहचान हो सके।

विशेषज्ञ अब अधिक क्षमता वाले जिलों में पारंपरिक VIA परीक्षण के साथ-साथ HPV टेस्टिंग जैसी आधुनिक स्क्रीनिंग तकनीकों के विस्तार पर भी जोर दे रहे हैं।

इलाज की लागत कम करने पर फोकस

कैंसर का इलाज अक्सर महंगा होता है, इसलिए सरकार ने वित्तीय सुरक्षा को भी रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा बनाया है। आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (PM-JAY) के तहत लाखों कैंसर मरीजों को उपचार सहायता मिली है। इस योजना से ग्रामीण क्षेत्रों के मरीजों को विशेष लाभ मिला है, जिससे आर्थिक कारणों से इलाज छूटने की समस्या कम हुई है।

इसके अलावा हेल्थ मिनिस्टर कैंसर पेशेंट फंड (HMCPF) आर्थिक रूप से कमजोर मरीजों को उपचार के लिए वित्तीय सहायता उपलब्ध कराता है। गंभीर मामलों में सहायता राशि लाखों रुपये तक पहुंच सकती है।

बजट और दवाओं पर राहत

स्वास्थ्य क्षेत्र को मजबूत करने के लिए बजट 2026-27 में भी विशेष प्रावधान किए गए हैं। कैंसर और कुछ दुर्लभ रोगों के उपचार में उपयोग होने वाली चुनिंदा दवाओं पर शुल्क राहत दी गई है। साथ ही, बायोफार्मा और स्वास्थ्य अनुसंधान को बढ़ावा देने के लिए नई पहलों की घोषणा की गई है। इसका उद्देश्य उपचार को अधिक सुलभ और किफायती बनाना है।

डिजिटल तकनीक और शोध पर बढ़ता जोर

कैंसर से निपटने में डिजिटल स्वास्थ्य तकनीकों की भूमिका भी बढ़ रही है। राष्ट्रीय स्तर पर कैंसर डेटा संग्रह, इलेक्ट्रॉनिक मेडिकल रिकॉर्ड, डिजिटल ऑन्कोलॉजी और वर्चुअल ट्यूमर बोर्ड जैसी व्यवस्थाओं को मजबूत किया जा रहा है।

साथ ही, भारतीय परिस्थितियों के अनुरूप कैंसर अनुसंधान को बढ़ावा देने के लिए भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (ICMR) और अन्य संस्थानों के सहयोग से शोध कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं।

अभी भी मौजूद हैं कई चुनौतियां

हालांकि नीतिगत स्तर पर महत्वपूर्ण प्रगति हुई है, लेकिन चुनौतियां अभी भी बनी हुई हैं। देश में कैंसर स्क्रीनिंग का दायरा अभी सीमित है और राज्यों के बीच इसमें बड़ा अंतर देखने को मिलता है।

ग्रामीण और दूरदराज क्षेत्रों में एचपीवी वैक्सीन के प्रति जागरूकता बढ़ाने की जरूरत है। वहीं डिजिटल स्वास्थ्य प्रणालियों और आधुनिक जांच सुविधाओं को जमीनी स्तर तक पहुंचाना भी एक बड़ी चुनौती बनी हुई है।

आम लोगों के लिए इसका क्या मतलब है?

यदि आपके परिवार में किशोरियां हैं, तो एचपीवी टीकाकरण की जानकारी स्थानीय स्वास्थ्य केंद्र, पीएचसी, सीएचसी या आयुष्मान आरोग्य मंदिर से प्राप्त की जा सकती है। महिलाओं के लिए सर्वाइकल, स्तन और मुख कैंसर की नियमित जांच बेहद महत्वपूर्ण है। समय पर पहचान होने पर उपचार की सफलता की संभावना काफी बढ़ जाती है।

यदि किसी व्यक्ति को कैंसर का निदान होता है, तो आयुष्मान भारत जैसी योजनाएं उपचार के खर्च को कम करने में मदद कर सकती हैं, जिससे बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच आसान होती है।

विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले वर्षों में स्क्रीनिंग कवरेज बढ़ाने, एचपीवी टीकाकरण के विस्तार, डिजिटल स्वास्थ्य ढांचे को मजबूत करने और स्थानीय जरूरतों पर आधारित अनुसंधान को बढ़ावा देने पर विशेष ध्यान देना होगा।

भारत की कैंसर नियंत्रण रणनीति अब केवल उपचार तक सीमित नहीं है। रोकथाम, शुरुआती पहचान, आधुनिक इलाज, आर्थिक सहायता और डिजिटल स्वास्थ्य ढांचे को एक साथ जोड़कर कैंसर के बढ़ते बोझ को कम करने का प्रयास किया जा रहा है। यदि इन पहलों का प्रभावी क्रियान्वयन जारी रहता है, तो आने वाले वर्षों में कैंसर से होने वाली मृत्यु और आर्थिक बोझ दोनों को कम करने में महत्वपूर्ण सफलता मिल सकती है।