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दिल्ली के स्कूल-कॉलेजों में दहशत, फर्जी धमकी भरे ई-मेल, जानिए असली खतरा या सिर्फ हॉक्स?

Delhi schools colleges hoax email क्या आप जानते हैं कि आपके बच्चों का स्कूल कब खतरे में आ सकता है? बढ़ते बम धमकी वाले ई-मेल्स ने दिल्ली के शैक्षणिक संस्थानों में खौफ का माहौल बना दिया है। जानिए, इस गंभीर समस्या से निपटने के लिए दिल्ली पुलिस ने क्या कदम उठाए हैं!
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भारत

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Sanjana Kumar

Aug 31, 2026

Delhi schools colleges hoax email

Delhi schools colleges hoax email: AI Creative

Delhi schools colleges hoax email: नई दिल्ली में स्कूल और कॉलेजों को भेजे जा रहे हॉक्स (झूठे) बम धमकी वाले ई-मेल्स की बढ़ती लहर ने न केवल सुरक्षा व्यवस्था को चुनौती दी है, बल्कि छात्रों, अभिभावकों और शिक्षण संस्थानों में चिंता की लहर भी फैला दी है। हाल ही में दिल्ली पुलिस ने इस समस्या से निपटने के लिए एक विशेष साइबर जांच सेल बनाने का निर्णय लिया है, जो इस खतरे से निपटने में अहम भूमिका निभा सकता है।

D4C में बनेगा हॉक्स बम ई‑मेल इन्वेस्टिगेशन सेल

दिल्ली पुलिस ने 31 अगस्त 2026 को घोषणा की है कि राजधानी में एक हाई-टेक दिल्ली साइबर क्राइम कोऑर्डिनेशन सेंटर (D4C) स्थापित किया जा रहा है। इसमें एक अलग हॉक्स बम ई-मेल इन्वेस्टिगेशन सेल होगा, जो स्कूल-कॉलेज, अस्पताल और सरकारी कार्यालयों को भेजे जाने वाले बम धमकी वाले ई-मेल्स की जांच करेगा।

यह सेल VPN, गुमनाम या स्पूफ ई-मेल्स और तकनीकी माध्यम से भेजे गए धमकी संदेशों की 24 घंटे निगरानी करेगा और टेलीकॉम, इंटरनेट व ई-मेल सेवा प्रदाताओं के साथ मिलकर डिजिटल साक्ष्य जुटाएगा।

हालिया घटनाओं की टाइमलाइन और पैटर्न

  • 3 अगस्त 2026 को दिल्ली के कई स्कूलों को बम धमकी वाले ई-मेल्स प्राप्त हुए। पुलिस, बम निरोधक दल, डॉग स्क्वॉड और अग्निशमन विभाग ने स्कूलों को खाली कराया और परिसर की जांच की। किसी भी संदिग्ध वस्तु का पता नहीं चला। सरदार पटेल विद्यालय ने अभिभावकों को सूचित किया कि परिसर सुरक्षित घोषित होने के बाद कक्षाएं फिर से शुरू होंगी।
  • इससे पहले, फरवरी 2026 में दिल्ली विधानसभा, लाल किला और दो स्कूलों को भेजे गए धमकी भरे ई-मेल्स को पुलिस ने हॉक्स करार दिया था। ई-मेल्स में 'Delhi BanayGa KHALISTAN' जैसे संदेश थे। धमकी में विस्फोट की समय-सीमा भी दी गई थी। जांच में कोई विस्फोटक नहीं मिला।
  • अगस्त 2025 में लगभग 20 कॉलेजों, जिनमें जेसस एंड मैरी कॉलेज भी शामिल था, को धमकी भरे ई-मेल्स मिले। पुलिस ने पाया कि ई-मेल्स VPN के माध्यम से भेजे गए थे।
  • जुलाई 2025 में तीन दिनों में नौ स्कूलों और एक कॉलेज को धमकी भरे ई-मेल्स भेजे गए। इनमें स्टीफेंस कॉलेज और सेंट थॉमस स्कूल जैसे प्रतिष्ठित संस्थान शामिल थे। सभी को खाली कराया गया, लेकिन कोई विस्फोटक नहीं मिला।
  • इसी महीने की शुरुआत में, 42 स्कूलों और तीन कॉलेजों को धमकी भरे ई-मेल्स भेजे गए, जिनमें बताया गया कि कक्षाओं में विस्फोटक छिपाए गए हैं। ये ई-मेल्स यूरोप स्थित atomicmail.io सेवा से भेजे गए थे।
  • पुलिस डेटा बताता है, जनवरी से अगस्त 2025 तक दिल्ली‑NCR में लगभग 74 शैक्षणिक संस्थानों (70 स्कूल और 4 कॉलेज) को धमकी भरे ई-मेल्स प्राप्त हुए।

क्या स्कूल-कॉलेजों के लिए खतरा है?

इन धमकी भरे ई-मेल्स ने शैक्षणिक संस्थानों में भय और अस्थिरता पैदा कर दी है। हालांकि अब तक सभी मामले हॉक्स साबित हुए हैं, लेकिन बार-बार घटित होने वाली ये घटनाएं सुरक्षा व्यवस्था की कमजोरियों को उजागर करती हैं।

VPN और गुमनाम ई-मेल सेवाओं के इस्तेमाल से अपराधी की पहचान करना मुश्किल हो जाता है। इससे यह स्पष्ट होता है कि स्कूल-कॉलेजों को तकनीकी रूप से अधिक सुरक्षित बनाना आवश्यक है।

D4C और हॉक्स ई‑मेल सेल की भूमिका

D4C में स्थापित यह नया सेल तकनीकी जांच और निगरानी को मजबूत करेगा। VPN और स्पूफ ई-मेल्स की पहचान, डिजिटल साक्ष्य जुटाना और ई-मेल सेवा प्रदाताओं के साथ तालमेल बनाना इस सेल की मुख्य जिम्मेदारियां होंगी। इससे न केवल जांच तेज होगी, बल्कि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने में भी मदद मिलेगी।

पाठकों के लिए क्या मायने रखता है

  • अभिभावकों और छात्रों को घबराने के बजाय सतर्क रहना चाहिए। सोशल मीडिया पर अफवाहों के प्रसार को रोकें, क्योंकि इससे स्थिति और बिगड़ सकती है।
  • स्कूल‑कॉलेजों को चाहिए कि वे अपने साइबर सुरक्षा ढांचे को मजबूत करें, जैसे ई-मेल फिल्टरिंग, संदिग्ध लिंक पर क्लिक न करना और नियमित सुरक्षा ऑडिट कराना।
  • प्रशासन को चाहिए कि वे आपातकालीन प्रतिक्रिया योजनाओं को अपडेट रखें, जैसे कि इवैक्यूएशन ड्रिल, संचार चैनल और पुलिस‑फायर ब्रिगेड के साथ तालमेल।

अब आगे क्या?

D4C के सक्रिय होने के बाद जांच तेज और प्रभावी होगी। लेकिन यह केवल शुरुआत है। स्कूल‑कॉलेजों को अपनी सुरक्षा रणनीतियों को समय-समय पर अपडेट करना होगा। साइबर जागरूकता और तकनीकी तैयारियों को बढ़ावा देना अब प्राथमिकता बन चुका है।

दिल्ली में हॉक्स बम ई-मेल्स की बाढ़ ने शैक्षणिक संस्थानों की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। हालांकि अब तक कोई वास्तविक खतरा नहीं पाया गया है, लेकिन इन घटनाओं ने डिजिटल सुरक्षा की आवश्यकता को स्पष्ट कर दिया है। D4C में बनने वाला हॉक्स ई-मेल सेल एक सकारात्मक कदम है, लेकिन असली सुरक्षा तब सुनिश्चित होगी, जब स्कूल-कॉलेज, पुलिस और टेक्नोलॉजी प्रदाता मिलकर सतर्कता और तैयारी को मजबूत करेंगे।