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रागी, बाजरा या ज्वार: बच्चों के शारीरिक और मानसिक विकास के लिए कौन सा अनाज है सबसे बेस्ट?

क्या बच्चों के लिए मिलेट्स सच में फायदेमंद हैं? जानिए AIIMS और रिसर्च के अनुसार रागी, बाजरा और ज्वार कैसे बढ़ाते हैं बच्चों की हाइट, वजन और हीमोग्लोबिन।
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Aug 20, 2026
Superfood
थाली में जोड़ें यह देसी अनाज (AI)

आधुनिक जीवनशैली में बच्चों का खान-पान प्रोसेस्ड फूड, रिफाइंड फ्लोर (मैदा) और अत्यधिक चीनी की तरफ तेजी से झुका है। इसके परिणामस्वरूप बच्चों में कम उम्र में ही पोषण संबंधी कमियां, मोटापा, एनीमिया और पाचन तंत्र से जुड़ी समस्याएं आम हो गई हैं। ऐसे में पारंपरिक मोटे अनाज यानी 'मिलेट्स' एक मजबूत समाधान बनकर उभरे हैं। बाजरा, रागी, ज्वार, कोदो, कुटकी और कंगनी जैसे श्रीअन्न केवल पारंपरिक खान-पान का हिस्सा नहीं हैं, बल्कि यह वैज्ञानिक रूप से सिद्ध पोषण के पावरहाउस हैं। बच्चों की नियमित थाली में मिलेट्स को शामिल करके उनके शारीरिक विकास, हड्डियों की मजबूती, रोग प्रतिरोधक क्षमता और मानसिक एकाग्रता में उल्लेखनीय सुधार लाया जा सकता है।

वैज्ञानिक प्रमाण: बच्चों के विकास पर मिलेट्स का प्रभाव

मिलेट्स बच्चों के समग्र विकास को गति देने में कैसे मदद करते हैं, इसे कई वैज्ञानिक अध्ययनों और मेटा-एनालिसिस द्वारा प्रमाणित किया जा चुका है:

शारीरिक वृद्धि में तीव्र सुधार: एक व्यापक सिस्टेमैटिक रिव्यू और मेटा-एनालिसिस के अनुसार, जब नियमित आहार में सामान्य पॉलिश किए गए चावल की जगह मिलेट्स शामिल किए गए, तो बच्चों के शारीरिक विकास में गुणात्मक परिवर्तन देखा गया। अध्ययन के अनुसार:

  • ऊंचाई में औसतन 28.2% तक का सुधार।
  • वजन में औसतन 26% की वृद्धि।
  • मिड-अपर आर्म सर्कमफेरेंस (MUAC - मांसपेशियों की मजबूती का पैमाना) में 39% की बढ़ोतरी।
  • छाती के घेराव में 37% का इजाफा।

एनीमिया और कुपोषण पर प्रहार: तेलंगाना के आदिवासी क्षेत्रों में किए गए एक वर्षीय क्लिनिकल हस्तक्षेप में बच्चों को मिलेट्स, दाल और मूंगफली आधारित फॉर्मूलेशन दिया गया। इस अध्ययन के परिणाम अत्यंत उत्साहजनक रहे:

  • बच्चों की औसत ऊंचाई में 3.2 सेमी और वजन में 1.68 किग्रा की वृद्धि दर्ज की गई।
  • बच्चों का हीमोग्लोबिन स्तर 9.70 ग्राम/डीएल से बढ़कर 11.08 ग्राम/डीएल हो गया, जिससे बच्चे मध्यम एनीमिया की श्रेणी से पूरी तरह बाहर निकल आए।
  • समुदाय आधारित मॉडल की सफलता: आंध्र प्रदेश के ग्रामीण इलाकों में संचालित “मदर्स किचन” पहल के तहत माताओं को मिलेट्स से स्वादिष्ट व्यंजन बनाना सिखाया गया। इसके परिणामस्वरूप बच्चों में कुपोषण (अंडरवेट) की दर 35% से घटकर 21.3% पर आ गई।
  • स्कूल स्तर पर बेहतर स्वीकार्यता: कर्नाटक में 1500 किशोरों पर किए गए मिड-डे मील अध्ययन में पाया गया कि मिलेट्स आधारित आहार से स्टंटिंग (उम्र के अनुपात में कम लंबाई) और बीएमआई (बॉडी मास इंडेक्स) में स्पष्ट सुधार हुआ।

बच्चों के लिए मिलेट्स के मुख्य स्वास्थ्य लाभ

  • हड्डियों और दांतों की मजबूती: रागी में प्राकृतिक कैल्शियम की मात्रा किसी भी अन्य सामान्य अनाज की तुलना में कई गुना अधिक (344 मि.ग्रा./100 ग्राम) होती है। बढ़ती उम्र में बच्चों की हड्डियों की सघनता और दांतों के विकास के लिए यह सर्वोत्तम है।
  • रक्त निर्माण और ऊर्जा: बाजरा और कुटकी आयरन के समृद्ध स्रोत हैं। यह शरीर में लाल रक्त कोशिकाओं के निर्माण को बढ़ाते हैं, जिससे बच्चों में थकान, कमजोरी और एकाग्रता की कमी जैसी समस्याएं दूर होती हैं।
  • स्वस्थ पाचन तंत्र: मिलेट्स में घुलनशील और अघुलनशील फाइबर प्रचुर मात्रा में होते हैं। यह बच्चों में कब्ज, गैस और पेट दर्द की आम समस्या को खत्म करते हैं तथा आंतों के माइक्रोबायोम को स्वस्थ रखते हैं।
  • संतुलित ऊर्जा और मेटाबॉलिज्म: मिलेट्स का ग्लाइसेमिक इंडेक्स कम होता है, जिससे शरीर को पूरे दिन धीमी और स्थिर गति से ऊर्जा मिलती रहती है। इससे बच्चों में हाइपरएक्टिविटी या सुस्ती की समस्या नहीं होती।

पैकेज्ड फूड बनाम घर का बना मिलेट आहार

बाजार में उपलब्ध तैयार मिलेट स्नैक्स, कुकीज और सीरियल्स को खरीदते समय सतर्कता बरतनी चाहिए:

एम्स (AIIMS) बिबिनगर के एक अध्ययन में पाया गया कि बाजार में मिलने वाले कई पैकेज्ड मिलेट उत्पादों में वास्तविक पोषक तत्व (विशेषकर कैल्शियम) कम होते हैं तथा उनमें प्रिजर्वेटिव्स, अतिरिक्त चीनी और सोडियम मिलाया जाता है।

पैकेजिंग पर अक्सर उम्र-उपयुक्त पोषण और संभावित एलर्जन की पूरी जानकारी नहीं होती। इसलिए, बच्चों के लिए घर पर ताजी सामग्री के साथ पारंपरिक और नए मिलेट व्यंजन तैयार करना सबसे सुरक्षित और अधिक पौष्टिक विकल्प है।

बच्चों की थाली में मिलेट्स शामिल करने के व्यावहारिक तरीके

बच्चों के खान-पान में बदलाव हमेशा सहज और चरणबद्ध होना चाहिए:

  • शुरुआत छोटे स्तर पर करें: सप्ताह में 2 से 3 दिन एक समय के भोजन में मिलेट्स जोड़ें।
  • स्मार्ट ब्लेंडिंग तकनीक: यदि बच्चे स्वाद के कारण सीधे मिलेट्स नहीं खाते, तो उन्हें नियमित अनाज के साथ मिलाकर दें। जैसे:
  • गेहूं के आटे में 20-30% ज्वार या रागी का आटा मिलाना।
  • चावल और दाल की खिचड़ी में थोड़ा लिटिल मिलेट या फॉक्सटेल मिलेट मिलाना।

बच्चों की पसंदीदा डिशेज का मिलेट रूपांतरण:

  • रागी: रागी-दूध शीरा, रागी पैनकेक, रागी इडली या चॉकलेट-रागी मफिन।
  • बाजरा: बाजरा-मेथी पूरी, बाजरा खिचड़ी या बाजरे की कुरकुरी टिक्की।
  • ज्वार/फॉक्सटेल: ज्वार उपमा, मिलेट डोसा या फॉक्सटेल मिलेट पुलाव।
  • डेयरी के साथ संयोजन: रागी को दूध या दही के साथ पकाने से कैल्शियम और प्रोटीन का अवशोषण शरीर में और बेहतर तरीके से होता है।

चिकित्सकीय सलाह

मिलेट्स बच्चों के पोषण संबंधी अंतर को पाटने का एक अत्यंत किफायती, प्राकृतिक और प्रभावी जरिया हैं। स्वाद और नवाचार के मेल से इन्हें बच्चों की दैनिक दिनचर्या का सहज हिस्सा बनाया जा सकता है।

(डिस्क्लेमर: यह लेख केवल सामान्य जागरूकता और पोषण संबंधी जानकारी के उद्देश्य से तैयार किया गया है। किसी भी बच्चे को विशेष एलर्जी, पाचन विकार या गंभीर स्वास्थ्य स्थिति होने पर आहार में बड़ा बदलाव करने से पहले पीडियाट्रिशियन अथवा प्रमाणित क्लीनिकल न्यूट्रिशनिस्ट से परामर्श अवश्य लें।)

Updated on:
20 Aug 2026 06:07 pm
Published on:
20 Aug 2026 06:07 pm