
संगीत थेरेपी से तनाव कम करने का प्रभाव अब वैज्ञानिक रूप से भी सिद्ध हो रहा है। एक हालिया व्यापक समीक्षा (2022) में 47 अध्ययनों और 2,747 प्रतिभागियों के आंकड़ों के आधार पर यह पाया गया कि संगीत थेरेपी तनाव से राहत देने में मददगार साबित हो सकती है। यह प्रभाव मनोवैज्ञानिक तनाव (जैसे चिंता, बेचैनी) में दिखा और शारीरिक तनाव संकेतों (जैसे हृदय गति, रक्तचाप, हार्मोन स्तर) में भी सुधार के रूप में सामने आया।
संगीत थेरेपी और सामान्य संगीत सुनने (Music Listening) में अंतर होता है। संगीत थेरेपी में एक प्रशिक्षित संगीत चिकित्सक व्यक्तिगत आवश्यकताओं के अनुसार संगीत का चयन और संचालन करता है, जबकि सामान्य संगीत सुनने में यह विशेषज्ञता नहीं होती। यही कारण है कि संगीत थेरेपी का प्रभाव सामान्य संगीत सुनने की तुलना में अधिक प्रभावशाली पाया गया।
एक अन्य अध्ययन (2024) में शोधकर्ताओं ने तनाव परीक्षण (Trier Social Stress Test) के बाद चार समूहों, शोधकर्ता द्वारा चुना गया संगीत, स्वयं चुना गया संगीत, पानी की आवाज और मौन की तुलना की। परिणामों में केवल शोधकर्ता द्वारा चुने गए संगीत समूह में कोर्टिसोल (तनाव हार्मोन) के बढ़ने की प्रवृत्ति को धीमा करने का संकेत मिला; अन्य समूहों में यह प्रभाव साफ नहीं था।
छात्रों पर आधारित एक समूह संगीत थेरेपी अध्ययन (6 सप्ताह तक) में, संगीत थेरेपी समूह में चिंता (STAI-S), आत्म-रिपोर्टेड तनाव और कोर्टिसोल स्तर में नियंत्रण समूह की तुलना में कमी देखी गई।
भारत में भी संगीत थेरेपी के सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं। एक पायलट अध्ययन में, डिप्रेशन के मरीजों पर राग बिल्हारी आधारित भारतीय शास्त्रीय संगीत थेरेपी का प्रभाव देखा गया। DASS‑21 स्केल पर डिप्रेशन, चिंता और तनाव के स्कोर में सांख्यिकीय रूप से महत्वपूर्ण कमी मिली। इसके अलावा, भारत के प्रमुख संस्थानों जैसे AIIMS दिल्ली और NIMHANS बेंगलुरु में संगीत थेरेपी को इंटीग्रेटिव केयर मॉडल का हिस्सा बनाया जा रहा है और अध्ययन बताते हैं कि संगीत सुनने या इसमें भाग लेने से कोर्टिसोल जैसे तनाव हार्मोन में कमी आती है और विश्राम बढ़ता है।
तनाव से राहत पाने का एक सरल और प्रभावी तरीका संगीत थेरेपी वैज्ञानिक आधार पर भी मजबूत सिद्ध हो रहा है। यह मन को शांत करता है और शरीर के तनाव संकेतों को भी नियंत्रित करता है।
संगीत थेरेपी वह प्रक्रिया है जिसमें एक प्रशिक्षित संगीत चिकित्सक व्यक्ति की भावनात्मक और शारीरिक स्थिति के अनुसार संगीत का चयन करता है और उसे सुनने या सक्रिय रूप से भाग लेने के लिए मार्गदर्शन देता है। यह सामान्य संगीत सुनने से अलग है, क्योंकि इसमें विशेषज्ञ की भूमिका होती है, जो संगीत को व्यक्ति की आवश्यकताओं के अनुसार ढालता है।
वैज्ञानिक अध्ययनों से पता चला है कि संगीत थेरेपी तनाव के मनोवैज्ञानिक और शारीरिक दोनों पहलुओं में सुधार लाती है। 2022 की एक मेटा‑विश्लेषण समीक्षा में यह स्पष्ट हुआ कि संगीत थेरेपी का प्रभाव तनाव को कम कर सकता है। एक अन्य अध्ययन में शोधकर्ता द्वारा चुने गए संगीत ने कोर्टिसोल के बढ़ने को धीमा किया, जबकि अन्य विकल्पों में यह प्रभाव स्पष्ट नहीं था। वहीं, 6‑सप्ताह की समूह संगीत थेरेपी ने चिंता और तनाव में बड़े और मध्यम स्तर के प्रभाव दिखाए, साथ ही कोर्टिसोल में भी कमी आई।
भारत में भी राग‑आधारित संगीत थेरेपी ने डिप्रेशन, चिंता और तनाव में सुधार दिखाया है, जैसे राग बिल्हारी पर आधारित एक पायलट अध्ययन में DASS‑21 (डिप्रेशन एंग्जायटी स्ट्रेस स्केल-21) स्कोर में स्पष्ट कमी मिली। AIIMS और NIMHANS जैसे संस्थानों ने इसे इंटीग्रेटिव केयर में शामिल किया है और अध्ययन बताते हैं कि संगीत से कोर्टिसोल में कमी और विश्राम में वृद्धि होती है।
(डिस्क्लेमरः ध्यान रखें कि संगीत थेरेपी एक पूरक उपाय है, डॉक्टर या मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ की सलाह का विकल्प नहीं। यदि तनाव बहुत अधिक है, नींद नहीं आती या दैनिक जीवन प्रभावित हो रहा है, तो विशेषज्ञ से मिलना आवश्यक है। यह लेख चिकित्सा सलाह का विकल्प नहीं है।)