Patrika+

AI और डेटा सेंटर्स की वजह से मंडरा रहा गंभीर खतरा; बिजली-पानी पर छाया संकट, भारत के लिए बड़ी चुनौती

तेजी से बढ़ रहे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के इस्तेमाल की वजह से नया संकट पैदा हो गया है। AI के बढ़ते इस्तेमाल की वजह से डेटा सेंटर्स भी बढ़ रहे हैं। ये AI डेटा सेंटर्स में अधिक बिजली और पानी की खपत होती है।
3 min read
Aug 23, 2026
AI data centers
सांकेतिक इमेज (सोर्स-Chatgpt)

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की दुनिया जितनी तेजी से आगे बढ़ रही है। इसी तेजी के साथ डेटा सेंटरों की बिजली भूख भी बढ़ रही है। स्वतंत्रता दिवस के भाषण में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस चुनौती की तरफ इशारा किया था। प्रधानमंत्री ने कहा था कि AI और डेटा सेंटरों को चौबीसों घंटे चलाने के लिए देश को भारी मात्रा में बिजली और ऊर्जा की जरूरत पड़ेगी। बिना पर्याप्त ऊर्जा के डिजिटल इंडिया का यह नया सपना पूरा होना मुश्किल है। इसी तरह ठाणे में अमेजॉन के एक डेटा सेंटर प्रोजेक्ट के खिलाफ स्थानीय लोगों के विरोध भी किया है। स्थानीय लोगों का कहना है कि पहले से पानी की किल्लत झेल रहे शहर पर नया दबाव और बढ़ जाएगा।

डेटा सेंटरों के लिए बिजली की मांग बढ़ी

AI डेटा सेंटरों से असाधारण ऊर्जा की खपत हो रही है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, 2025 के अंत तक दुनिया की कुल डेटा सेंटर क्षमता का करीब एक-तिहाई हिस्सा सिर्फ AI अनुप्रयोगों के लिए समर्पित हो सकता है। अमेरिका में डेटा सेंटरों की बिजली खपत 2023 के 4.4 प्रतिशत से बढ़कर 2028 तक 12 प्रतिशत तक पहुंच सकती है। इलेक्ट्रॉनिक्स एवं आईटी मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, भारत की डेटा सेंटर क्षमता 2020 में करीब 375 मेगावाट थी, जो 2025 तक बढ़कर लगभग 1,500 मेगावाट हो चुकी है। ऊर्जा मंत्रालय का अनुमान है कि 2031-32 तक अकेले डेटा सेंटरों की बिजली मांग बढ़कर 13.56 गीगावाट तक पहुंच सकती है।

निवेश के आंकड़े भी इस रफ्तार की गवाही देते हैं। भारत की डेटा सेंटर क्षमता 2030 तक 3 से 3.6 गीगावाट और 2035 तक 7 से 8 गीगावाट तक पहुंच सकती है, जबकि वित्त वर्ष 2031 तक यह क्षमता करीब छह गुना बढ़कर 10.5 गीगावाट हो सकती है। जिसके लिए बिजली क्षेत्र में 20 अरब डॉलर से ज्यादा के अतिरिक्त निवेश की जरूरत होगी। साल 2026 की पहली छमाही में ही देश की परिचालन डेटा सेंटर क्षमता 59 प्रतिशत बढ़कर 1.8 गीगावाट तक पहुंच गई, और प्रति डेवलपर बिजली खपत इसी अवधि में करीब 19 गुना बढ़ गई।

AI डेटा सेंटर्स और चुनौतियां

AI डेटा सेंटर्स के लिए चुनौती सिर्फ बिजली तक सीमित नहीं है। 100 मेगावाट के एक बड़े हाइपरस्केल डेटा सेंटर को ठंडा रखने के लिए रोजाना करीब 20 लाख लीटर पानी की जरूरत पड़ सकती है, जिससे पहले से जल-संकट झेल रहे चेन्नई और बेंगलुरु जैसे शहरों पर दबाव और बढ़ सकता है। AI डेटा सेंटर्स में एक सर्वर रैक को ही 40 से 130 किलोवाट तक बिजली चाहिए हो सकती है।

इस चुनौती से निपटने के लिए सरकार कई मोर्चों पर काम कर रही है। सबसे बड़ा कदम परमाणु ऊर्जा क्षेत्र में उठाया गया है। दिसंबर 2025 में संसद ने शांति (सस्टेनेबल हार्नेसिंग एंड एडवांसमेंट ऑफ न्यूक्लियर एनर्जी फॉर ट्रांसफॉर्मिंग इंडिया) एक्ट पारित किया, जो आजादी के बाद पहली बार निजी और विदेशी कंपनियों को परमाणु ऊर्जा संयंत्रों के निर्माण, स्वामित्व और संचालन की इजाजत देता है।

इसका लक्ष्य मौजूदा करीब 8 गीगावाट परमाणु क्षमता को 2047 तक बढ़ाकर 100 गीगावाट तक पहुंचाना है। शांति नियमों के मसौदे में साफ तौर पर डेटा सेंटर, सेमीकंडक्टर विनिर्माण और AI जैसे क्षेत्रों को कैप्टिव परमाणु ऊर्जा उत्पादन से जोड़ा गया है, ताकि ऊर्जा-गहन उद्योगों को भरोसेमंद और कम-कार्बन बिजली मिल सके। इसी दिशा में 2033 तक देश में कम से कम पांच स्वदेशी स्मॉल मॉड्यूलर रिएक्टर (SMR) चालू करने की योजना है।

परमाणु और नवीकरणीय ऊर्जा पर जोर

परमाणु ऊर्जा के साथ-साथ नवीकरणीय ऊर्जा पर भी जोर बढ़ा है। भारत ने 2025 में रिकॉर्ड 44.5 गीगावॉट नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता जोड़ी। डेटा सेंटर और AI के बढ़ते बूम की वजह से भारत में सोलर पावर की मांग वित्त वर्ष 2035 तक सालाना 22 प्रतिशत की दर से बढ़ सकती है। साथ ही सरकार ग्रिड एकीकरण और ऊर्जा भंडारण (एनर्जी स्टोरेज) समाधानों में भी तेजी से निवेश बढ़ा रही है, ताकि सौर-पवन जैसी अनियमित ऊर्जा को स्थिर बेसलोड बिजली में बदला जा सके।

विशेषज्ञों के सुझाव भी नीति निर्माताओं तक पहुंच रहे हैं। विशेषज्ञों का सुझाव है कि डेटा सेंटरों को सब्सिडी युक्त बिजली दरें दी जाएं, उन्हें डिस्कॉम के बजाय सीधे सौर व पवन स्रोतों से बिजली खरीदने की अनुमति मिले, भूमि अधिग्रहण व मंजूरी प्रक्रियाओं को सरल बनाया जाए, टैक्स छूट दी जाए और तरल शीतन (लिक्विड कूलिंग) जैसी ऊर्जा-कुशल तकनीकों के जरिए 'ग्रीन डेटा सेंटर' बनाने को बढ़ावा दिया जाए।

Updated on:
23 Aug 2026 09:42 pm
Published on:
23 Aug 2026 09:42 pm