
भारत के 7 'नो-एंट्री' ज़ोन (AI)
भारत विविधता, प्राचीन संस्कृति और प्राकृतिक सुंदरता से समृद्ध देश है। कश्मीर की वादियों से लेकर कन्याकुमारी के समुद्र तटों तक, देश के अधिकांश हिस्से पर्यटकों का खुले दिल से स्वागत करते हैं। लेकिन भारत के नक्शे पर कुछ ऐसी रहस्यमयी, दुर्गम और संवेदनशील जगहें भी हैं जहां एक आम पर्यटक के रूप में जाना लगभग नामुमकिन है। राष्ट्रीय सुरक्षा, जनजातीय संरक्षण, सक्रिय ज्वालामुखी या पारिस्थितिक संतुलन (Ecology) के कारण सरकार ने इन स्थानों पर सख्त पाबंदियां लगाई हैं।
प्रतिबंध का कारण: बाहरी दुनिया के वायरस और बैक्टीरिया के प्रति सेंटिनली लोगों में रोग प्रतिरोधक क्षमता (Immunity) नहीं है, जिससे एक साधारण फ्लू भी उनकी पूरी आबादी मिटा सकता है। इसके अलावा, वे बाहरी लोगों के प्रति बेहद आक्रामक रुख अपनाते हैं।
नियम: भारतीय कानून के तहत इस द्वीप के 5 समुद्री मील (लगभग 9.2 किमी) के दायरे में जाना पूर्णतः गैरकानूनी है। तटरक्षक बल (Coast Guard) यहाँ 24 घंटे गश्त करता है।
प्रतिबंध का कारण: ज्वालामुखी से लगातार निकलने वाली जहरीली गैसें, धुआं और अचानक होने वाले लावा विस्फोट।
घूमने का नियम: पर्यटकों को इस द्वीप पर पैर रखने (Landing) की बिल्कुल अनुमति नहीं है। वन विभाग और कोस्ट गार्ड की अनुमति से केवल नाव या क्रूज के जरिए दूर समुद्र से ही इसे देखा जा सकता है।
प्रतिबंध का कारण: अत्यधिक बर्फीला और दुर्गम मौसम, लगातार हिमस्खलन (Avalanches) का खतरा और भारत-पाकिस्तान सीमा के पास अत्यधिक संवेदनशील रणनीतिक स्थिति।
पर्यटन स्थिति: आम नागरिक बिना विशेष सैन्य अनुमति के बेस कैंप से आगे नहीं जा सकते। कुछ समय पूर्व बेस कैंप तक सीमित ट्रेकिंग की अनुमति दी गई है, लेकिन वास्तविक ग्लेशियर और फॉरवर्ड पोस्ट पर आम पर्यटन पूरी तरह प्रतिबंधित है।
प्रतिबंध का कारण: यह क्षेत्र 'शोम्पेन' और 'निकोबारी' जैसी विशेष रूप से कमजोर जनजातियों (PVTGs) का घर है। साथ ही, यह इलाका यूनेस्को का संरक्षित बायोस्फीयर रिजर्व और अत्यधिक संवेदनशील सैन्य नौसैनिक क्षेत्र (Naval Base) है।
अनुमति: यहां जाने के लिए भारत सरकार के जनजातीय कल्याण मंत्रालय और रक्षा मंत्रालय से विशेष परमिट की आवश्यकता होती है, जो केवल शोधकर्ताओं और सरकारी अधिकारियों को दुर्लभ मामलों में ही मिलता है।
प्रतिबंध का कारण: अंतर्राष्ट्रीय सीमा की निकटता, अत्यधिक कम ऑक्सीजन का स्तर और भारतीय सेना का रणनीतिक सुरक्षा क्षेत्र।
पर्यटन सीमा: सामान्य पर्यटक केवल गुरुडोंगमार झील (Gurudongmar Lake) तक ही जा पाते हैं। चोलमू झील जाने के लिए सामान्य टूरिस्ट परमिट मान्य नहीं होता; इसके लिए भारतीय सेना और सिक्किम पुलिस प्रशासन से विशेष 'इनर लाइन परमिट' (ILP) जरूरी है।
प्रतिबंध का कारण: तिब्बत सीमा से सटा अत्यधिक संवेदनशील डिफेंस कॉरिडोर।
पर्यटन स्थिति: यद्यपि दिन के समय सीमित संख्या में भारतीय पर्यटकों को एक निर्धारित बिंदु तक जाने की अनुमति मिलती है, लेकिन यहाँ रात में रुकना, कैमरे से संवेदनशील ढांचों की तस्वीरें लेना और विदेशी नागरिकों का प्रवेश पूरी तरह प्रतिबंधित है।
प्रतिबंध का कारण: नाजुक समुद्री पारिस्थितिकी (Marine Ecosystem), लुप्तप्राय प्रवाल भित्तियों (Coral Reefs) का संरक्षण और तटीय सुरक्षा नियम।
घूमने का नियम: लक्षद्वीप में प्रवेश के लिए हर किसी को पुलिस वेरिफिकेशन और प्रशासन से परमिट लेना पड़ता है। लेकिन इन निर्जन द्वीपों पर उतरना पूरी तरह गैरकानूनी है, ताकि यहां के समुद्री जीवन और कछुओं के प्रजनन स्थलों को नुकसान न पहुंचे।
| स्थान | राज्य / केंद्र शासित प्रदेश | प्रतिबंध का मुख्य कारण |
| नॉर्थ सेंटिनल द्वीप | अंडमान और निकोबार | जनजातीय संरक्षण और सुरक्षा |
| बैरन द्वीप | अंडमान सागर | सक्रिय ज्वालामुखी विस्फोट और जहरीली गैसें |
| सियाचिन ग्लेशियर | लद्दाख | अत्यधिक ऊंचाई, हिमस्खलन और सैन्य संवेदनशीलता |
| ग्रेट निकोबार | अंडमान और निकोबार | बायोस्फीयर रिजर्व व संरक्षित जनजातियां |
| चोलमू झील | सिक्किम | भारत-चीन सीमा और अत्यधिक ऊंचाई |
| नेलांग घाटी | उत्तराखंड | अंतरराष्ट्रीय सीमा सुरक्षा |
| लक्षद्वीप के निर्जन द्वीप | लक्षद्वीप | प्रवाल भित्ति संरक्षण व तटीय नियम |
Updated on:
23 Aug 2026 10:23 pm
Published on:
23 Aug 2026 10:23 pm
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