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नॉर्थ सेंटिनल से बैरन आइलैंड तक: भारत के 7 ‘No Entry’ ज़ोन, जहां परिंदा भी पर नहीं मार सकता

Forbidden Places in India: भारत की 7 सबसे खतरनाक और प्रतिबंधित जगहें, जहाँ सुरक्षा और नियमों के कारण आम टूरिस्ट्स की एंट्री पर सख्त पाबंदी है।
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भारत

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Chitra Badoliya

Aug 23, 2026

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भारत के 7 'नो-एंट्री' ज़ोन (AI)

भारत विविधता, प्राचीन संस्कृति और प्राकृतिक सुंदरता से समृद्ध देश है। कश्मीर की वादियों से लेकर कन्याकुमारी के समुद्र तटों तक, देश के अधिकांश हिस्से पर्यटकों का खुले दिल से स्वागत करते हैं। लेकिन भारत के नक्शे पर कुछ ऐसी रहस्यमयी, दुर्गम और संवेदनशील जगहें भी हैं जहां एक आम पर्यटक के रूप में जाना लगभग नामुमकिन है। राष्ट्रीय सुरक्षा, जनजातीय संरक्षण, सक्रिय ज्वालामुखी या पारिस्थितिक संतुलन (Ecology) के कारण सरकार ने इन स्थानों पर सख्त पाबंदियां लगाई हैं।

  1. नॉर्थ सेंटिनल द्वीप (North Sentinel Island, अंडमान) : अंडमान और निकोबार द्वीप समूह में स्थित नॉर्थ सेंटिनल द्वीप दुनिया के सबसे अलग-थलग और खतरनाक स्थानों में गिना जाता है। यहां 'सेंटिनली' जनजाति के लोग रहते हैं, जिनका आधुनिक सभ्यता से कोई संपर्क नहीं है।

प्रतिबंध का कारण: बाहरी दुनिया के वायरस और बैक्टीरिया के प्रति सेंटिनली लोगों में रोग प्रतिरोधक क्षमता (Immunity) नहीं है, जिससे एक साधारण फ्लू भी उनकी पूरी आबादी मिटा सकता है। इसके अलावा, वे बाहरी लोगों के प्रति बेहद आक्रामक रुख अपनाते हैं।

नियम: भारतीय कानून के तहत इस द्वीप के 5 समुद्री मील (लगभग 9.2 किमी) के दायरे में जाना पूर्णतः गैरकानूनी है। तटरक्षक बल (Coast Guard) यहाँ 24 घंटे गश्त करता है।

  1. बैरन द्वीप (Barren Island, अंडमान सागर)पोर्ट : ब्लेयर से लगभग 138 किमी उत्तर-पूर्व में स्थित बैरन द्वीप दक्षिण एशिया का एकमात्र सक्रिय ज्वालामुखी (Active Volcano) है। लगभग 3 किमी में फैला यह द्वीप चारों तरफ से गहरे नीले समुद्र से घिरा है।

प्रतिबंध का कारण: ज्वालामुखी से लगातार निकलने वाली जहरीली गैसें, धुआं और अचानक होने वाले लावा विस्फोट।

घूमने का नियम: पर्यटकों को इस द्वीप पर पैर रखने (Landing) की बिल्कुल अनुमति नहीं है। वन विभाग और कोस्ट गार्ड की अनुमति से केवल नाव या क्रूज के जरिए दूर समुद्र से ही इसे देखा जा सकता है।

  1. सियाचिन ग्लेशियर (Siachen Glacier, लद्दाख) : काराकोरम पर्वतमाला में 18,000 फीट से अधिक की ऊंचाई पर स्थित सियाचिन ग्लेशियर दुनिया का सबसे ऊंचा युद्धक्षेत्र (Highest Battlefield) है। यहां का तापमान अक्सर -50°C तक गिर जाता है।

प्रतिबंध का कारण: अत्यधिक बर्फीला और दुर्गम मौसम, लगातार हिमस्खलन (Avalanches) का खतरा और भारत-पाकिस्तान सीमा के पास अत्यधिक संवेदनशील रणनीतिक स्थिति।

पर्यटन स्थिति: आम नागरिक बिना विशेष सैन्य अनुमति के बेस कैंप से आगे नहीं जा सकते। कुछ समय पूर्व बेस कैंप तक सीमित ट्रेकिंग की अनुमति दी गई है, लेकिन वास्तविक ग्लेशियर और फॉरवर्ड पोस्ट पर आम पर्यटन पूरी तरह प्रतिबंधित है।

  1. ग्रेट निकोबार बायोस्फीयर और शोम्पेन रिजर्व (Nicobar Islands) : अंडमान द्वीप समूह के कुछ हिस्से पर्यटन के लिए खुले हैं, लेकिन निकोबार द्वीप समूह का अधिकांश हिस्सा आम नागरिकों और विदेशी पर्यटकों के लिए पूरी तरह बंद है।

प्रतिबंध का कारण: यह क्षेत्र 'शोम्पेन' और 'निकोबारी' जैसी विशेष रूप से कमजोर जनजातियों (PVTGs) का घर है। साथ ही, यह इलाका यूनेस्को का संरक्षित बायोस्फीयर रिजर्व और अत्यधिक संवेदनशील सैन्य नौसैनिक क्षेत्र (Naval Base) है।

अनुमति: यहां जाने के लिए भारत सरकार के जनजातीय कल्याण मंत्रालय और रक्षा मंत्रालय से विशेष परमिट की आवश्यकता होती है, जो केवल शोधकर्ताओं और सरकारी अधिकारियों को दुर्लभ मामलों में ही मिलता है।

  1. चोलमू / त्सो ल्हामो झील (Tso Lhamo Lake, उत्तरी सिक्किम) : लगभग 5,330 मीटर (17,490 फीट) की ऊंचाई पर स्थित चोलमू झील भारत की सबसे ऊंची मीठे पानी की झीलों में से एक है और तीस्ता नदी का मुख्य स्रोत है। यह झील तिब्बत (चीन) सीमा से मात्र कुछ ही किलोमीटर दूर है।

प्रतिबंध का कारण: अंतर्राष्ट्रीय सीमा की निकटता, अत्यधिक कम ऑक्सीजन का स्तर और भारतीय सेना का रणनीतिक सुरक्षा क्षेत्र।

पर्यटन सीमा: सामान्य पर्यटक केवल गुरुडोंगमार झील (Gurudongmar Lake) तक ही जा पाते हैं। चोलमू झील जाने के लिए सामान्य टूरिस्ट परमिट मान्य नहीं होता; इसके लिए भारतीय सेना और सिक्किम पुलिस प्रशासन से विशेष 'इनर लाइन परमिट' (ILP) जरूरी है।

  1. नेलांग घाटी और जाधुंग सीमा क्षेत्र (Nelang Valley, उत्तराखंड) : उत्तरकाशी जिले में गंगोत्री राष्ट्रीय उद्यान के पास स्थित नेलांग घाटी को 'उत्तराखंड का लद्दाख' कहा जाता है। यह क्षेत्र 1962 के भारत-चीन युद्ध के बाद से दशकों तक पूरी तरह बंद था।

प्रतिबंध का कारण: तिब्बत सीमा से सटा अत्यधिक संवेदनशील डिफेंस कॉरिडोर।

पर्यटन स्थिति: यद्यपि दिन के समय सीमित संख्या में भारतीय पर्यटकों को एक निर्धारित बिंदु तक जाने की अनुमति मिलती है, लेकिन यहाँ रात में रुकना, कैमरे से संवेदनशील ढांचों की तस्वीरें लेना और विदेशी नागरिकों का प्रवेश पूरी तरह प्रतिबंधित है।

  1. लक्षद्वीप के निर्जन प्रवाल द्वीप (Uninhabited Coral Atolls, Lakshadweep) : लक्षद्वीप समूह के 36 द्वीपों में से केवल 10 द्वीपों पर मानव आबादी है। सुहेली पार, चेरियाम और कई अन्य छोटे मूंगा द्वीप (Coral Atolls) पूरी तरह वीरान हैं।

प्रतिबंध का कारण: नाजुक समुद्री पारिस्थितिकी (Marine Ecosystem), लुप्तप्राय प्रवाल भित्तियों (Coral Reefs) का संरक्षण और तटीय सुरक्षा नियम।

घूमने का नियम: लक्षद्वीप में प्रवेश के लिए हर किसी को पुलिस वेरिफिकेशन और प्रशासन से परमिट लेना पड़ता है। लेकिन इन निर्जन द्वीपों पर उतरना पूरी तरह गैरकानूनी है, ताकि यहां के समुद्री जीवन और कछुओं के प्रजनन स्थलों को नुकसान न पहुंचे।

स्थानराज्य / केंद्र शासित प्रदेशप्रतिबंध का मुख्य कारण
नॉर्थ सेंटिनल द्वीपअंडमान और निकोबारजनजातीय संरक्षण और सुरक्षा
बैरन द्वीपअंडमान सागरसक्रिय ज्वालामुखी विस्फोट और जहरीली गैसें
सियाचिन ग्लेशियरलद्दाखअत्यधिक ऊंचाई, हिमस्खलन और सैन्य संवेदनशीलता
ग्रेट निकोबारअंडमान और निकोबारबायोस्फीयर रिजर्व व संरक्षित जनजातियां
चोलमू झीलसिक्किमभारत-चीन सीमा और अत्यधिक ऊंचाई
नेलांग घाटीउत्तराखंडअंतरराष्ट्रीय सीमा सुरक्षा
लक्षद्वीप के निर्जन द्वीपलक्षद्वीपप्रवाल भित्ति संरक्षण व तटीय नियम