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नया SIM लेना हो या पुराना बदलना, अब बायोमेट्रिक जरूरी: अंगूठे या चेहरे की जांच के बिना नहीं होगा काम

मोबाइल SIM से जुड़े कई जरूरी कामों के नियम अब सख्त हो गए हैं। नए SIM कनेक्शन, SIM बदलने, कुछ ग्राहक विवरण अपडेट करने और कुछ मामलों में कनेक्शन बंद करने जैसी प्रक्रियाओं में बायोमेट्रिक पहचान जरूरी होगी। आधार वाले ग्राहकों के लिए e-KYC और अन्य ग्राहकों के लिए D-KYC की व्यवस्था रहेगी।
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भारत

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Adarsh Thakur

Aug 23, 2026

SIM KYC Rules

सिम से जुड़े नए नियम। (फोटोः एआई)

मोबाइल SIM अब सिर्फ एक कार्ड नहीं है। यही नंबर बैंक खाते, UPI, WhatsApp, सोशल मीडिया और कई जरूरी सेवाओं से जुड़ा होता है। ऐसे में अगर किसी व्यक्ति की पहचान का गलत इस्तेमाल करके उसके नाम पर SIM जारी हो जाए, तो उसका नुकसान बड़ा हो सकता है। इसी वजह से सरकार ने SIM से जुड़ी पहचान प्रक्रिया को और सख्त किया है। Telecommunications (User Identification) Rules, 2026 के तहत अब कई जरूरी SIM सेवाओं में बायोमेट्रिक पहचान की भूमिका बढ़ गई है।

नया SIM लेने के लिए क्या बदलेगा?

अगर आपके पास आधार है तो पहचान की प्रक्रिया e-KYC के जरिए हो सकती है। इसमें ग्राहक की पहचान को डिजिटल तरीके से सत्यापित किया जाएगा। वहीं जिन ग्राहकों के पास आधार नहीं है, उनके लिए D-KYC का विकल्प उपलब्ध रहेगा। कुछ ऐसी स्थितियों में भी D-KYC का इस्तेमाल किया जा सकता है, जब कोई ग्राहक शारीरिक कारणों से लाइव बायोमेट्रिक सत्यापन नहीं करा सकता।

इसका सीधा असर SIM लेने की दुकान पर दिख सकता है। ग्राहक को केवल पहचान पत्र दिखाकर प्रक्रिया पूरी होने की उम्मीद नहीं करनी चाहिए। अधिकृत प्रक्रिया के तहत उसकी पहचान का सत्यापन किया जाएगा और जरूरी जानकारी रिकॉर्ड में दर्ज होगी।

SIM खराब या खो जाए तो भी KYC जरूरी

नियमों का असर पुराने ग्राहकों पर भी है। अगर आपका SIM खो गया, खराब हो गया या आपको उसी नंबर का नया SIM लेना है, तो SIM replacement के दौरान पहचान सत्यापन जरूरी होगा। यानी कोई दूसरा व्यक्ति सिर्फ पुराने नंबर या दस्तावेज के आधार पर आपका SIM हासिल न कर सके, इसके लिए प्रक्रिया को मजबूत किया गया है।

पहले से भी SIM replacement के लिए पूरा KYC जरूरी था और 24 घंटे तक आने-जाने वाले SMS पर रोक का प्रावधान किया गया था। सरकार ने इसे SIM swap और उससे जुड़े दुरुपयोग को रोकने के लिए लागू किया था।

नाम, जन्मतिथि जैसी जानकारी बदलने पर भी सावधानी

नए नियम केवल SIM खरीदने तक सीमित नहीं हैं। मौजूदा ग्राहक अगर रिकॉर्ड में नाम, लिंग या जन्मतिथि जैसी जानकारी बदलना चाहता है, तो भी पहचान सत्यापन की जरूरत पड़ सकती है। टेलीकॉम कंपनी उपलब्ध रिकॉर्ड से नई जानकारी का मिलान करेगी।

कामपहचान सत्यापन
नया SIMबायोमेट्रिक KYC
SIM ReplacementKYC जरूरी
ग्राहक विवरण में बदलावबायोमेट्रिक पहचान
आधार वाले ग्राहकe-KYC
आधार नहीं होने परD-KYC

SIM किसी और को देना अब जोखिम भरा

नियमों में SIM या टेलीकॉम कनेक्शन को किसी दूसरे व्यक्ति को बेचने, किराए पर देने या अनधिकृत तरीके से ट्रांसफर करने पर भी रोक लगाई गई है। निर्धारित परिस्थितियों में ही कनेक्शन ट्रांसफर किया जा सकेगा। इसमें रिश्तेदार या कानूनी उत्तराधिकारी जैसे मामलों के लिए व्यवस्था दी गई है।

इसका मकसद नंबर के पीछे मौजूद वास्तविक व्यक्ति की पहचान सुनिश्चित करना है, क्योंकि साइबर अपराध में इस्तेमाल होने वाला SIM अगर किसी निर्दोष व्यक्ति के नाम पर दर्ज है, तो जांच में असली उपयोगकर्ता तक पहुंचना मुश्किल हो सकता है।

नियम सख्त करने की जरूरत क्यों पड़ी?

SIM से जुड़ी पहचान के दुरुपयोग के मामले सामने आते रहे हैं। हाल ही छत्तीसगढ़ में पुलिस जांच के दौरान ऐसे मामले का खुलासा हुआ, जिसमें दुकानदारों पर ग्राहकों की आधार और बायोमेट्रिक प्रक्रिया का गलत इस्तेमाल करके अतिरिक्त SIM सक्रिय करने का आरोप लगा। इन नंबरों का इस्तेमाल साइबर अपराध में किए जाने की बात सामने आई।

इसी तरह SIM swap धोखाधड़ी में भी किसी व्यक्ति का मोबाइल नंबर दूसरे SIM पर सक्रिय कराकर OTP और दूसरी संवेदनशील सेवाओं तक पहुंच बनाने की कोशिश की जाती है। ऐसे मामलों को देखते हुए पहचान प्रक्रिया मजबूत करना महत्वपूर्ण है।

ग्राहकों को क्या ध्यान रखना चाहिए?

SIM लेने या बदलने के लिए हमेशा अधिकृत टेलीकॉम केंद्र या अधिकृत विक्रेता का इस्तेमाल करें। अपना फिंगरप्रिंट या चेहरे की जांच किसी अनजान व्यक्ति के कहने पर बार-बार न कराएं। अगर प्रक्रिया के दौरान कोई अतिरिक्त SIM, दस्तावेज या ऐसी सेवा के लिए सहमति मांगी जा रही है जिसकी आपने मांग नहीं की, तो सावधान रहें।