
कच्चे तेल की तेजी, महंगाई के दबाव और वैश्विक बॉन्ड यील्ड में उछाल के बीच भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के लिए ब्याज दरों को मौजूदा स्तर पर टिकाए रखना पहले से कठिन हो गया है। मंगलवार को जारी BNP परिबास इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार, हाल के हफ्तों में भारत का व्यापक आर्थिक परिदृश्य कमजोर हुआ है।
रिपोर्ट के मुताबिक, पश्चिम एशिया में ताजा तनाव से ब्रेंट क्रूड 100 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर पहुंच गया है। अमेरिकी 10-वर्षीय ट्रेजरी यील्ड 5 प्रतिशत के आसपास है और यूरोपियन सेंट्रल बैंक (ECB) तथा बैंक ऑफ जापान (BoJ) ने ब्याज दरें 25 आधार अंक बढ़ाई हैं, जिससे वैश्विक वित्तीय स्थितियां सख्त हुई हैं। पिछले दो सप्ताह में रुपया करीब 1 प्रतिशत कमजोर हुआ है, भारत की 10-वर्षीय बॉन्ड यील्ड 7 प्रतिशत के ऊपर है और विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) की बिकवाली फिर शुरू हो गई है।
BNP परिबास इंडिया के इक्विटी रिसर्च प्रमुख कुणाल वोरा ने कहा कि भारत का आर्थिक दृष्टिकोण तेल कीमतों के प्रति बेहद संवेदनशील है। रिपोर्ट ने माना कि विदेशी मुद्रा गैर-निवासी (FCNR) जमा से विदेशी मुद्रा भंडार को सहारा मिला है।
लगभग 127 अरब डॉलर के प्रवाह की मदद से यह करीब 800 अरब डॉलर तक पहुंच गया है। हालांकि, यह राहत अस्थायी है, क्योंकि ये प्रवाह तीन से पांच साल में लौट सकते हैं। रिपोर्ट के सकारात्मक पहलुओं में मजबूत ऋण वृद्धि, ऑटो बिक्री, रोजगार आंकड़ों में सुधार और खाद्यान्न का बड़ा भंडार शामिल हैं। ग्रामीण मांग पर मानसून की कमी और खाद्य महंगाई का जोखिम बताया गया है।
RBI की मौद्रिक नीति समिति (MPC) ने 3 से 5 अगस्त 2026 की बैठक में रेपो रेट 5.25 प्रतिशत पर स्थिर रखा और रुख "न्यूट्रल" बनाए रखा। यह लगातार चौथी समीक्षा थी, जिसमें दरें नहीं बदली गईं। तब समिति ने जून में खुदरा महंगाई 4.4 प्रतिशत बताई थी, जो 16 महीने बाद 4 प्रतिशत के लक्ष्य से ऊपर गई। FY27 के लिए महंगाई का अनुमान 5.0 प्रतिशत और तीसरी तिमाही में 5.9 प्रतिशत के शिखर का था। अगली MPC बैठक 5 से 7 अक्टूबर को होनी है।
बाजार में दबाव साफ दिख रहा है। मंगलवार को लगातार दूसरे दिन गिरकर सेंसेक्स 242.65 अंक टूटकर 72,529.07 और निफ्टी 64.05 अंक गिरकर 22,716.20 पर बंद हुआ। कारोबार में ब्रेंट 107 डॉलर के आसपास और रुपया 96 प्रति डॉलर के नीचे बताया गया।
RBI के साप्ताहिक आंकड़ों के अनुसार, 18 सितंबर को खत्म सप्ताह में भंडार 14.88 अरब डॉलर गिरकर 765.9 अरब डॉलर रह गया। एक रिपोर्ट के मुताबिक यह नवंबर 2024 के बाद की सबसे बड़ी साप्ताहिक गिरावट है, क्योंकि RBI ने रुपये को संभालने के लिए डॉलर बेचे। अब सबकी नजर 5-7 अक्टूबर की MPC बैठक पर है, जहां RBI को महंगाई, रुपये और पूंजी प्रवाह के बीच संतुलन साधना होगा।