
रोशनी के पर्व दीपावली पर खुशियों के साथ हादसों का खतरा भी बढ़ जाता है। पटाखे, दीये और मोमबत्ती की जरा-सी लापरवाही हाथ, चेहरे और आंखों को गंभीर नुकसान पहुंचा सकती है। इसी को देखते हुए डॉक्टरों ने जलने की स्थिति में तुरंत उठाए जाने वाले कदम और जरूरी सावधानियां साझा की हैं।
मेयो क्लिनिक की गाइडलाइन के मुताबिक, जलने के तुरंत बाद घाव पर कम से कम 15 से 20 मिनट तक नल का बहता सामान्य पानी डालना चाहिए। डॉक्टर्स का कहना है कि बहता पानी त्वचा में दबी गर्मी को बाहर निकालता है और घाव को गहरा होने से रोकता है।
सूजन आने से पहले अंगूठी, घड़ी, चूड़ी या कड़े जैसी चीजें सावधानी से उतार दें।
ठंडा करने के बाद घाव को साफ, सूखे सूती कपड़े या स्टेराइल ड्रेसिंग से ढीला ढक दें।
इसके बाद जल्द से जल्द डॉक्टर से संपर्क करें।
कपड़ों में आग लगने पर भागना नहीं चाहिए, क्योंकि इससे लपटें और भड़कती हैं। 'स्टॉप, ड्रॉप एंड रोल' अपनाएं, यानी रुकें, जमीन पर लेटें और लुढ़कें। मोटे कंबल या गलीचे से शरीर को ढककर भी आग बुझाई जा सकती है।
मेयो क्लिनिक के अनुसार हर जलन घर पर ठीक नहीं होती। कई बार स्थितियां गंभीर हो जाती हैं। अगर जलन का दायरा हथेली से बड़ा हो, चेहरा, हाथ-पैर, आंख या गुप्तांग जला हो तुरंत अस्पताल जाएं। त्वचा गहरी सफेद या काली दिखे या सुन्न पड़ जाए, पीड़ित बच्चा, बुजुर्ग या डायबिटीज जैसी बीमारी से जूझ रहा व्यक्ति हो ऐसी स्थिति में बिल्कुल देर न करें।
डॉक्टरों की सलाह है कि आंख को रगड़ें या दबाएं नहीं। साफ पानी से धोकर तुरंत नेत्र विशेषज्ञ को दिखाएं। अमेरिकन एकेडमी ऑफ ऑप्थैल्मोलॉजी भी आंख न मलने की सलाह देती है।
कपड़े: सिंथेटिक और ढीले कपड़ों के बजाय शरीर पर ठीक से फिट होने वाले सूती कपड़े पहनें।
जूते: पटाखे जलाते समय जूते जरूर पहनें और उचित दूरी बनाए रखें।
बच्चे: उन्हें अकेले पटाखे न जलाने दें। वयस्क की निगरानी जरूरी है।
बिना फूटे पटाखे: इन्हें दोबारा उठाने या जलाने की कोशिश न करें। इससे हाथ-उंगलियों में गंभीर चोट लग सकती है।
बाल्टी भर पानी या रेत: आसपास रखें और जले पटाखों के अवशेष उसी में डालें।
दीये और मोमबत्ती: डॉक्टर के अनुसार इनसे भी आग लगती है, इसलिए इन्हें पर्दों और सजावट से दूर रखें।
ग्रीन पटाखे: जहां संभव हो इन्हीं का इस्तेमाल करें और प्रशासन के तय समय का पालन करें।