
Protein snacks after 40: 40 की उम्र पार करते ही अगर सीढ़ियां चढ़ने में पहले से ज्यादा हांफने लगे हैं, हाथ में पहले जैसी पकड़ महसूस नहीं होती, या दोपहर होते-होते थकान हावी होने लगती है, तो इसकी वजह सिर्फ उम्र नहीं, बल्कि आपकी थाली का बदलता हिसाब भी हो सकती है। मध्यम आयु (लगभग 40-60 वर्ष) में शरीर को प्रोटीन की आवश्यकता बढ़ जाती है, मांसपेशियों को बनाए रखने, ऊर्जा बनाए रखने और जीवनशैली से जुड़ी बीमारियों से बचाव में प्रोटीन अहम भूमिका निभाता है।
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार, वयस्कों को अपनी कुल ऊर्जा का 10-15% प्रोटीन से प्राप्त करना चाहिए, जो लगभग 50–75 ग्राम प्रोटीन प्रतिदिन होता है (2000 कैलोरी आहार पर)। वहीं, भारतीय संदर्भ में ICMR–NIN (2020) ने स्वस्थ वयस्कों के लिए औसत आवश्यकता (EAR) 0.66 ग्राम/किग्रा/दिन और सुरक्षित मात्रा (RDA) 0.83 ग्राम/किग्रा/दिन निर्धारित की है, यदि आहार मुख्य रूप से अनाज आधारित हो, तो यह आवश्यकता 1 ग्राम/किग्रा/दिन तक बढ़ सकती है।
मध्यम आयु में मांसपेशियों का क्षय (सार्कोपेनिया) एक सामान्य समस्या है। विशेषज्ञों का सुझाव है कि इस उम्र में प्रोटीन की मात्रा 1.0-1.2 ग्राम/किग्रा/दिन तक बढ़ा देनी चाहिए, ताकि मांसपेशियों की रक्षा की जा सके। साथ ही, दिनभर में प्रोटीन को समान मात्रा में विभाजित करना (जैसे नाश्ते और स्नैक्स में) बेहतर कार्डियोमेटाबोलिक स्वास्थ्य से जुड़ा है, जैसे नाश्ते में प्रोटीन लेने से बीपी कम होता है और HDL (अच्छा कोलेस्ट्रॉल) बढ़ता है, जबकि रात में अधिक प्रोटीन लेने से इंसुलिन प्रतिरोध बढ़ सकता है।
मध्यम आयु के लिए ऐसे स्नैक्स चुनें जो स्वादिष्ट, आसानी से तैयार होने वाले और पोषक तत्वों से भरपूर हों जैसे-
दही या पनीर आधारित स्नैक्स - जैसे मसालेदार पनीर टिक्की या दही में फलों के साथ
मूंगफली या बादाम जैसे मेवे- प्राकृतिक रूप से प्रोटीन और स्वस्थ वसा से भरपूर
अंकुरित मूंग या चना - हल्का उबालकर, नमक और मसाले डालकर
छोले या राजमा सलाद - हरी सब्जियों के साथ मिलाकर
सोया चंक्स या टोफू - हल्का तला या ग्रिल किया हुआ
उबला अंडा - यदि आप नॉन-वेज खाते हैं, तो यह एक आसान और सस्ता विकल्प है
इनमें से कई स्नैक्स में लगभग 10-15 ग्राम प्रोटीन हो सकता है, जो मध्यम आयु के लिए उपयुक्त है।
पोषण और कार्यक्षमता में सुधार- एक अध्ययन में 300 किलो कैलोरी और 14 ग्राम प्रोटीन वाले डेयरी व बेरी-आधारित स्नैक्स से वृद्ध लोगों में पोषण स्थिति (MNA स्कोर), एल्ब्यूमिन स्तर और हाथ की पकड़ (हैंडग्रिप स्ट्रेंथ) में सुधार देखा गया
भूख नियंत्रण: एक अध्ययन में हाई-प्रोटीन योगर्ट स्नैक (14 ग्राम प्रोटीन) ने हाई-फैट स्नैक्स की तुलना में दोपहर की भूख को बेहतर नियंत्रित किया और भोजन की शुरुआत में 20-30 मिनट की देरी की
लागत प्रभावी तरीका: एक फिनलैंड के अध्ययन में घर पर प्रोटीन-युक्त स्नैक्स और ब्रेड शामिल करने से वृद्ध वयस्कों में प्रोटीन की मात्रा बढ़ी और यह तरीका किफायती भी साबित हुआ
संतुलन बनाए रखें- स्नैक्स में प्रोटीन के साथ फाइबर (जैसे अंकुरित दाल, सब्जियां) और स्वस्थ वसा (जैसे मेवे, बीज) शामिल करें
अत्यधिक प्रोटीन से बचें- WHO के अनुसार, वयस्कों में प्रोटीन ऊर्जा का 15% से अधिक नहीं होना चाहिए—अत्यधिक प्रोटीन से गुर्दों पर दबाव पड़ सकता है
सप्लीमेंट्स की जगह संपूर्ण आहार को प्राथमिकता दें- विशेषज्ञों का कहना है कि यदि सामान्य आहार पर्याप्त है, तो अतिरिक्त प्रोटीन उत्पादों की आवश्यकता नहीं होती। वहीं यदि गुर्दे की बीमारी या अन्य स्वास्थ्य समस्या हो, तो डॉक्टर से सलाह अवश्य लें।
समय - स्नैक/भोजन - प्रोटीन मात्रा
नाश्ता - दही में फल और थोड़े मेवे - 10-12 ग्राम
मध्य सुबह - अंकुरित मूंग सलाद - 8-10 ग्राम
दोपहर बाद - पनीर टिक्की या टोफू - 10-15 ग्राम
शाम - मूंगफली या बादाम - 6-8 ग्राम
रात का खाना - संतुलित भोजन (प्रोटीन स्नैक्स से पहले अधिक न लें)
बता दें कि यह पैटर्न दिनभर प्रोटीन की मात्रा को समान रूप से बांटता है, भूख को नियंत्रित करता है और मांसपेशियों को मजबूत बनाए रखने में मदद करता है।
कहना होगा कि मध्यम आयु में स्वादिष्ट और स्वास्थ्यवर्धक प्रोटीन-युक्त स्नैक्स न केवल भूख को संतुलित रखते हैं, बल्कि मांसपेशियों की रक्षा, ऊर्जा बनाए रखने और जीवनशैली से जुड़ी बीमारियों से बचाव में भी सहायक होते हैं। अगली बार जब दोपहर में थकान हावी होने लगे, तो चिप्स या बिस्किट की जगह इनमें से कोई एक स्नैक आजमाएं, फर्क आपको खुद महसूस होगा। हां लेकिन एक बात जरूर ध्यान रखें कि संपूर्ण आहार को प्राथमिकता दें, मात्रा संतुलित रखें और यदि कोई स्वास्थ्य समस्या हो तो डॉक्टर से सलाह लें।