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शुगर के मरीजों के लिए खास हो सकती है घर की बनी चाय! डायबिटीज कंट्रोल के लिए कैसे करें तैयार?

Fibre Tea Diabetes Control: आपके घर में तैयार चाय ही आपके शुगर लेवल को कंट्रोल कर सकती है, क्या आप जानते हैं चाय का यह राज, जानिए रोज की इस चाय को एक हेल्दी सुपर ड्रिंक में कैसे बदलें?
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भारत

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Sanjana Kumar

Aug 25, 2026

Tea Diabetes control

Tea Diabetes control: ये है फाइबर वाली चाय, जो रखेगी शुगर कंट्रोल, जानिए कैसे बनाएं? (AI Creative)

Fibre Tea Diabetes Control: यह चाय जिसमें घुलनशील रेशे (फाइबर) शामिल होते हैं—मधुमेह (विशेषकर टाइप 2) के प्रबंधन में किस तरह असरदार हो सकती है, इस पर वैज्ञानिक शोधों की समीक्षा से एक स्पष्ट तस्वीर उभरती है। नीचे आसान भाषा में समझाया गया है कि रेशों वाली चाय का असर क्या हो सकता है, इसे कैसे इस्तेमाल करें, और किन बातों का ध्यान रखें।

रेशे (फाइबर) का मधुमेह पर असर

जर्नल ऑफ न्यूट्रिशन में प्रकाशित एक शोध के मुताबिक घुलनशील फाइबर पानी में घुलकर जेल जैसा बन जाता है। इससे भोजन की पाचन गति धीमी होती है और ग्लूकोज का खून में अवशोषण धीरे-धीरे होता है। इससे ब्लड शुगर का अचानक बढ़ना कम होता है।

एक व्यवस्थित समीक्षा में पाया गया कि रोजाना लगभग 13 ग्राम घुलनशील फाइबर लेने से HbA1c (लंबे समय का औसत शुगर), फास्टिंग ब्लड ग्लूकोज और इंसुलिन प्रतिरोध में महत्वपूर्ण कमी आई।

चाय में फाइबर मिलाने के प्रभाव

हाल के शोधों में देखा गया है कि ब्लैक टी में इनुलिन और रेसिस्टेंट डेक्स्ट्रिन जैसे घुलनशील फाइबर मिलाने से टाइप 2 डायबिटीज के मरीजों में भोजन के बाद शुगर में उतार-चढ़ाव काफी कम हुआ। इस अध्ययन में फाइबर युक्त ब्लैक टी ने शुगर और इंसुलिन दोनों के स्तर को नियंत्रित किया और बड़े उतार-चढ़ाव का जोखिम 65% तक घटा दिया।

मुलबेरी (शहतूत) चाय का असर

एक अध्ययन में टाइप 2 डायबिटीज के मरीजों को मुलबेरी चाय दी गई। इसके बाद 90 मिनट में भोजन के बाद शुगर में नियंत्रण समूह की तुलना में काफी कमी देखी गई। 210 mg/dL बनाम 287 mg/dL, जो बहुत महत्वपूर्ण था।

मुलबेरी पत्ती और फाइबर का मिश्रण

क्लिनिकल न्यूट्रिशन के एक और अध्ययन में मुलबेरी पत्ती का अर्क फाइबर, विटामिन D3 और क्रोमियम के साथ मिलाकर 2 ग्राम का मिश्रण नाश्ते के साथ लिया गया। इससे 1-3 घंटे के दौरान ग्लूकोज iAUC में 15-20% तक कमी आई और शुरुआती इंसुलिन प्रतिक्रिया भी कम हुई।

मौजूदा शोधों का सार

  • घुलनशील फाइबर मधुमेह नियंत्रण में मददगार है, HbA1c और फास्टिंग ग्लूकोज में सुधार होता है।
  • ब्लैक टी में फाइबर मिलाने से भोजन के बाद शुगर में उतार-चढ़ाव कम होता है।
  • मुलबेरी चाय खाने के बाद शुगर स्पाइक को दबा सकती है।
  • मुलबेरी पत्ती, फाइबर, विटामिन D, क्रोमियम का मिश्रण भोजन के बाद शुगर और इंसुलिन दोनों को नियंत्रित करता है।

कैसे इस्तेमाल करें, व्यावहारिक सुझाव

  1. रोजाना 1-2 कप ब्लैक टी में इनुलिन या रेसिस्टेंट डेक्स्ट्रिन मिलाकर पीने से भोजन के बाद शुगर नियंत्रण में मदद मिल सकती है।
  2. मुलबेरी चाय (बिना अधिक चीनी के) भोजन के बाद लेने से शुगर स्पाइक कम हो सकता है।
  3. अगर उपलब्ध हो, तो मुलबेरी पत्ती अर्क वाला मिश्रण नाश्ते के साथ लेने से बेहतर ग्लूकोज नियंत्रण हो सकता है।
  4. कुल फाइबर की मात्रा पर ध्यान दें—दिन में 13 ग्राम घुलनशील फाइबर तक का सेवन लाभकारी पाया गया है।

ध्यान रखने योग्य बातें

  • यह चाय या मिश्रण इलाज का विकल्प नहीं है, यह दवाओं और डॉक्टर की सलाह के साथ एक सहायक उपाय हो सकता है।
  • फाइबर की मात्रा धीरे-धीरे बढ़ाएं, अचानक अधिक फाइबर लेने से पेट में गैस या कब्ज हो सकता है।
  • यदि आप किसी दवा पर हैं, खासकर इंसुलिन या अन्य शुगर-नियंत्रक दवाओं पर, तो पहले डॉक्टर से सलाह जरूर लें।
  • यह उपाय सभी के लिए उपयुक्त नहीं हो सकता, गर्भवती, किडनी या लीवर की समस्या वाले लोग विशेष सावधानी रखें।

अगर आप डायबिटीज से जूझ रहे हैं और चाय में फाइबर जोड़ने पर विचार कर रहे हैं, तो पहले अपने डॉक्टर या डायबिटीज विशेषज्ञ से बात करें। वे आपकी दवाओं, ब्लड शुगर ट्रेंड और स्वास्थ्य स्थिति के आधार पर सही सलाह देंगे। साथ ही, धीरे-धीरे फाइबर बढ़ाएं और अपनी प्रतिक्रिया पर नजर रखें।

कहना होगा कि रेशे वाली चाय, चाहे वह ब्लैक टी में फाइबर हो, मुलबेरी चाय हो या मुलबेरी पत्ती का मिश्रण, शोध से पता चलता है कि यह भोजन के बाद शुगर नियंत्रण में मददगार हो सकता है। यह एक सरल, घरेलू उपाय है, जिसे आप डॉक्टर की सलाह से अपनी दिनचर्या में शामिल कर सकते हैं।