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खेतों में खड़ी फसल बर्बाद कर जाते हैं पशु, नुकसान से कैसे बचें, जानिए

यदि आप भी जानवरों द्वारा फसलों के बर्बाद होने से परेशान हैं, तो यह लेख आपके लिए है। जानिए कैसे कुछ उपायों पर चलकर आप अपने खेतों की रक्षा कर सकते हैं और अपनी आय भी बढ़ा सकते हैं।
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भारत

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Adarsh Thakur

Aug 25, 2026

Crop Protection

आवारा जानवरों से फसल कैसे बचाएं? (फोटोः एआई)

हर किसान के लिए फसलों को आवारा और जंगली पशुओं से बचाना एक बड़ी चुनौती बन चुका है। खेत में अचानक घुस आने वाले जानवर फसल को नुकसान पहुंचाते हैं और किसान की मेहनत और आय को भी प्रभावित करते हैं। आइए जानते हैं कुछ उपाय, जिन्हें अपनाकर आप इस समस्या से छुटकारा पा सकते हैं।

कास्टर और छाछ से प्राकृतिक बायो-रिपेलेंट

कुछ किसान अपनी फसलों के चारों ओर कास्टर (अरंडी) की दो पंक्तियां लगाते हैं, जिनके बीज तीन दिन पुरानी खट्टी छाछ से लेपित होते हैं। इस गंध से जानवर खेत से दूर रहते हैं। यह तरीका गुजरात के किसानों द्वारा अपनाया गया है।

जैव-बाड़: बांस की बायो-फेंस

बुंदेलखंड क्षेत्र में एक अध्ययन में पाया गया कि लगभग 80 सेंटीमीटर की दूरी पर लगातार बांस (Bambusa bambos) की बायो-फेंस लगाने से 1–2 वर्षों में फसल में जानवरों के घुसने की घटनाएं काफी कम हो जाती हैं। यह दीवार फसल की रक्षा करती है और मिट्टी कटाव रोकने, हवा रोकने, कार्बन सिंक और जैव विविधता बढ़ाने जैसे कई पर्यावरणीय लाभ भी देती है।

पावर फेंस (विद्युत् बाड़)

रणथंभौर के पास जैतपुर गांव में जंगली सूअरों से फसलों की रक्षा के लिए पावर फेंस का प्रयोग किया गया। यह जानवरों को मारता नहीं, सिर्फ हल्का झटका देकर उन्हें रोकता है। यदि सही तरीके से बनाया और रखरखाव किया जाए, तो यह प्रभावी और सुरक्षित विकल्प है।

गैर-घातक डिटेरेंट सिस्टम: वज्र

महाराष्ट्र में डी.वाई. पाटिल एजुकेशन सोसाइटी, कोल्हापुर की टीम ने VAJRA (वज्र) नामक एक सिस्टम विकसित किया है। यह रिमोट सेंसिंग और यादृच्छिक (Random) तरीके से डिटेरेंट (डर) तैनात करके फसलों को बचाता है। इससे फसल नुकसान में 30–50% तक की कमी और किसानों की आय में 20–35% तक की बढ़ोतरी देखी गई है। यह तरीका किसानों को रात में खेत के पहरे देने से बचाता है और जानवरों को मारने की प्रवृत्ति को भी कम करता है।

दृश्य, ध्वनि और गंध आधारित उपाय

वन्यजीव संघर्ष प्रबंधन रिपोर्टों में बताया गया है कि किसान पारंपरिक रूप से ध्वनि (ड्रम, पटाखे, चिल्लाना), दृश्य (पुतले, रंगीन कपड़े, आग), और गंध (मिर्च तेल, तम्बाकू, कचरा तेल) आधारित उपाय अपनाते रहे हैं। उदाहरण के लिए, मिर्च को इंजन तेल या ग्रीस में मिलाकर खेत की सीमा पर लगाया जाता है, जिससे जानवर दूर रहते हैं। ये तरीके विशेषकर कम बारिश वाले इलाकों में प्रभावी माने गए हैं।

उपायः

उपायविवरणलाभ
कास्टर + छाछअरंडी की पंक्तियां + खट्टी छाछप्राकृतिक, सस्ता, पारंपरिक
बांस की बायो-फेंस80 सेमी दूरी पर बांस की बाड़दीर्घकालिक, पर्यावरणीय लाभ
पावर फेंसविद्युत् झटका देने वाला बाड़प्रभावी, जानवरों को नुकसान नहीं
VAJRA सिस्टमरिमोट सेंसिंग + यादृच्छिक डिटेरेंटफसल नुकसान में भारी कमी, आय में वृद्धि
पारंपरिक डिटेरेंटध्वनि, दृश्य, गंध आधारित उपायसुलभ, स्थानीय रूप से अपनाने योग्य

ध्यान देने योग्य बातें

– बांस की बायो-फेंस को पूरी तरह प्रभावी होने में 1–2 साल लग सकते हैं, इसलिए धैर्य जरूरी है।
– पावर फेंस और VAJRA जैसे तकनीकी उपायों में शुरुआती लागत और रखरखाव की जरूरत होती है; बड़े निवेश से पहले स्थानीय कृषि विभाग या विशेषज्ञ से सलाह लें।
– पारंपरिक उपाय जैसे मिर्च तेल या पुतले आसान और सस्ते हैं, लेकिन जानवर जल्दी इन्हें पहचानकर अनदेखा कर सकते हैं; इसलिए समय-समय पर इन्हें बदलते रहना चाहिए।

इन उपायों का असर

किसान को फसल की रक्षा के लिए रात-दिन खेत में पहरा देने की जरूरत कम होती है, जिससे श्रम और समय की बचत होती है। फसल का नुकसान कम होने से आय में सुधार होता है। साथ ही, पर्यावरण के अनुकूल उपाय जैसे बांस की बायो-फेंस मिट्टी और जैव विविधता को भी लाभ पहुंचाती है।

किसानों के लिए सुझाव

अपने क्षेत्र में कौन सा जानवर सबसे अधिक समस्या पैदा कर रहा है, जैसे सूअर, नीलगाय इसकी पहचान करें। फिर ऊपर दिए गए उपायों में से एक या दो को चुनकर छोटे पैमाने पर आजमाएं। सफल होने पर उसे बढ़ाएं। साथ ही, स्थानीय कृषि विभाग या किसान समूहों से जानकारी और तकनीकी सहायता लें।

इन प्रभावशाली उपायों से किसान अपनी फसल को सुरक्षित रख सकते हैं, लागत में कटौती कर सकते हैं और आय बढ़ा सकते हैं।