
राजस्थान की मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह एवं अनुदान योजना 2021 का उद्देश्य आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों पर विवाह का खर्च कम करना और सामूहिक विवाह को बढ़ावा देना है। योजना के तहत सरकार द्वारा स्वीकृत सामूहिक विवाह समारोह में शामिल पात्र जोड़ों को कुल ₹25,000 की सहायता का प्रावधान है। इसमें ₹21,000 वधू को और ₹4,000 आयोजन करने वाली संस्था को दिए जाते हैं। राजस्थान सरकार के आधिकारिक दस्तावेजों में इस योजना को महिला अधिकारिता निदेशालय से संबद्ध बताया गया है।
सामूहिक विवाह का विचार केवल गरीब परिवारों को आर्थिक राहत देने तक सीमित नहीं है। सरकार का उद्देश्य विवाह में होने वाले अनावश्यक खर्च को कम करना और सादगीपूर्ण विवाह को प्रोत्साहित करना भी है। योजना के माध्यम से दहेज प्रथा और बाल विवाह जैसी सामाजिक कुरीतियों को हतोत्साहित करने तथा विवाह के पंजीकरण को बढ़ावा देने पर भी जोर दिया जाता है।
राजस्थान सरकार के आर्थिक सर्वेक्षण के अनुसार, सामूहिक विवाह योजना का उद्देश्य बाल विवाह, दहेज प्रथा और व्यक्तिगत विवाहों में होने वाले खर्च को कम करना है।
योजना में प्रत्येक पात्र जोड़े के लिए ₹25,000 का प्रावधान है। इसकी संरचना इस तरह है-
इस तरह सरकारी सहायता का एक हिस्सा सीधे लाभार्थी तक पहुंचता है, जबकि दूसरा हिस्सा सामूहिक विवाह आयोजित करने वाली संस्था के खर्च के लिए होता है।
हाल में उत्तर प्रदेश के उन्नाव में मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह कार्यक्रम के दौरान नवविवाहित जोड़ों को दिए गए गद्दों के कवर पर राजनीतिक दल तृणमूल कांग्रेस (TMC) के झंडे या प्रतीक से मिलती-जुलती डिजाइन मिलने के बाद विवाद हुआ।
24 जुलाई 2026 को आयोजित कार्यक्रम में 459 जोड़ों का विवाह हुआ था। जांच में सामने आया कि कुल 918 गद्दों में से एक-दो गद्दों के कवर पर ऐसी डिजाइन पाई गई, जो एक राजनीतिक दल के प्रतीक या झंडे से मिलती-जुलती प्रतीत होती थी। इसलिए यह कहना सही नहीं होगा कि सभी 459 जोड़ों को TMC छपे गद्दे दिए गए थे।
मामले में प्रशासन ने जांच कराई। आपूर्तिकर्ता फर्म के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई और उसे ब्लैकलिस्ट करने की कार्रवाई की गई। संबंधित कर्मचारियों और अधिकारियों पर भी विभागीय कार्रवाई हुई।
यहां सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि उन्नाव का विवाद उत्तर प्रदेश की मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना से जुड़ा है, राजस्थान की योजना से नहीं।
दोनों राज्यों में योजना के नाम में समानता होने के कारण भ्रम पैदा हो सकता है, लेकिन दोनों अलग-अलग राज्य सरकारों की योजनाएं हैं। राजस्थान की मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह एवं अनुदान योजना के संबंध में ऐसे किसी राजनीतिक प्रतीक वाले गद्दे या सामग्री का मामला सामने आने की पुष्टि नहीं हुई है। इसलिए उन्नाव की घटना को राजस्थान की योजना की खामी के रूप में प्रस्तुत करना तथ्यात्मक रूप से सही नहीं होगा।
उन्नाव की घटना भले ही राजस्थान से संबंधित न हो, लेकिन यह सरकारी योजनाओं में खरीद और आपूर्ति व्यवस्था की निगरानी का सवाल जरूर उठाती है। सामूहिक विवाह जैसे सरकारी कार्यक्रम में दी जाने वाली सामग्री पर किसी राजनीतिक दल का प्रतीक, नाम या प्रचारात्मक डिजाइन नहीं होना चाहिए।
राजस्थान में भी आयोजक संस्थाओं और संबंधित विभागों को सामग्री की गुणवत्ता के साथ-साथ उसकी डिजाइन और पैकेजिंग की जांच पर ध्यान देना चाहिए। सप्लायर का चयन, नमूने की पूर्व जांच और वितरण से पहले सामग्री का निरीक्षण ऐसी घटनाओं को रोकने में मदद कर सकता है।
योजना की वास्तविक सफलता सिर्फ ₹25,000 की सहायता से नहीं मापी जा सकती। यह भी देखना जरूरी है कि कितने पात्र जोड़ों को इसका लाभ मिला, कितनी राशि वितरित हुई और लाभार्थियों तक भुगतान कितनी तेजी से पहुंचा।
राजस्थान सरकार के आर्थिक सर्वेक्षण में योजना के तहत लाभान्वित जोड़ों और खर्च का आंकड़ा भी दिया गया है। उदाहरण के लिए 2023-24 में 3,624 जोड़ों को लाभ मिला और ₹969.40 लाख खर्च हुए।
योजना का लाभ लेने की इच्छा रखने वाले परिवारों को अपने जिले में होने वाले सामूहिक विवाह कार्यक्रम की सरकारी स्वीकृति और आयोजनकर्ता संस्था की स्थिति की जानकारी पहले लेनी चाहिए। पात्रता, जरूरी दस्तावेज और आवेदन की मौजूदा प्रक्रिया की पुष्टि संबंधित जिला कार्यालय या राजस्थान सरकार के आधिकारिक पोर्टल से करना बेहतर है।
राजस्थान की मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह एवं अनुदान योजना आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को विवाह के खर्च में राहत देने के साथ सामाजिक सुधार को बढ़ावा देने की कोशिश है। वहीं उन्नाव में TMC जैसी डिजाइन वाले गद्दों का विवाद उत्तर प्रदेश की अलग योजना से जुड़ा मामला है। दोनों को एक ही घटना समझना गलत होगा।
हालांकि उन्नाव की घटना यह जरूर बताती है कि सरकारी योजनाओं में लाभार्थियों को दी जाने वाली सामग्री की खरीद और जांच प्रक्रिया कितनी महत्वपूर्ण है। पारदर्शी व्यवस्था, जिम्मेदारी तय करने और वितरण से पहले सामग्री की जांच से ऐसी विवादित स्थितियों को रोका जा सकता है।