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जिस दिन मां-पापा बूढ़े होंगे, तब याद आएगी राखी! जानिए भाई-बहन के रिश्ते और पेरेंटल केयर पर क्या कहती हैं वैज्ञानिक रिसर्च?

Raksha Bandhan 2026: बूढ़े होते माता-पिता की जिम्मेदारी और देखरेख के लिए भाई-बहन के रिश्तों को लेकर की गई हैं कईं रिसर्च, वैज्ञानिक शोध में सामने आया सच, जानिए रक्षा करने से इतर एक और नया और अहम वादा, जो आज जरूर कर लें
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Aug 28, 2026
Raksha Bandhan 2026 New story
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Raksha Bandhan 2026: राखी बांधते समय उसने हमेशा अपने भाई से एक ही बात सुनी थी, “टेंशन मत लेना, मैं हूं न।” बचपन में यह वाक्य कहना बहुत आसान था। स्कूल में किसी से लड़ाई हो जाए तो भाई साथ खड़ा था। रास्ते में डर लगे तो घर तक छोड़ने वाला कोई था। शादी के बाद भी जब मायके की याद आती, फोन के दूसरी तरफ एक परिचित आवाज होती। लेकिन एक दिन जिंदगी ने सवाल बदल दिया।

मां की तबीयत खराब रहने लगी। पिता की दवाइयां बढ़ गईं। अस्पताल के चक्कर शुरू हुए। और उसी दिन भाई-बहन के सामने एक ऐसा सवाल खड़ा हुआ, जो राखी के दिन कभी नहीं पूछा गया था, “अब मां-पापा के साथ कौन रहेगा?” एक दूसरे शहर में था। दूसरी की अपनी नौकरी और बच्चे थे।

एक पैसे भेज सकता था। दूसरी अस्पताल ले जा सकती थी। दोनों अपने-अपने तरीके से परेशान थे, लेकिन दोनों को लगने लगा कि शायद दूसरा उतना साथ नहीं दे रहा। यहीं से शुरू होती है भाई-बहन के रिश्ते की वह कहानी, जिसके बारे में रक्षाबंधन पर बहुत कम बात होती है।

राखी का एक अनकहा भविष्य

हम बचपन में भाई-बहन को एक-दूसरे की जिंदगी का हिस्सा मानते हैं। लेकिन adulthood में यही रिश्ता कई बदलावों से गुजरता है। शादी, नौकरी, अलग शहर, नए परिवार, फिर धीरे-धीरे फोन कम होते जाते हैं। लेकिन जिंदगी का एक दौर ऐसा आता है, जब भाई-बहन फिर एक ही जगह खड़े दिखाई देते हैं। अपने बूढ़े होते माता-पिता के सामने। तब सवाल सिर्फ प्यार का नहीं रहता, बल्कि जिम्मेदारी का होता है।

  • कौन डॉक्टर के पास जाएगा?
  • कौन अस्पताल में रात रुकेगा?
  • कौन दवाइयों का हिसाब रखेगा?
  • कौन आर्थिक मदद करेगा?
  • और सबसे कठिन सवाल, किसने कितना किया?

जानिए रिसर्च क्या कहती है?

Adult siblings और parental caregiving पर हुए शोध बताते हैं कि माता-पिता की देखभाल भाई-बहनों के रिश्ते को प्रभावित कर सकती है। Journal of Advanced Nursing में प्रकाशित एक mixed-method study में adult siblings के बीच parental caregiving शेयर करने के दौरान family stressors और sibling relationship के संबंध को देखा गया।

शोध में पाया गया कि परिवार के भीतर तनाव का बोझ sibling relationship पर नकारात्मक असर से जुड़ा था, हालांकि कई भाई-बहनों ने माता-पिता की देखभाल को उनके द्वारा किए गए पालन-पोषण का प्रत्युत्तर देने की इच्छा के रूप में भी देखा।

एक अन्य अध्ययन में 214 परिवारों के 450 adult children के data का विश्लेषण किया गया। निष्कर्षों में पाया गया कि जब मां को देखभाल की जरूरत पड़ी, तो caregiving की जिम्मेदारी और परिवार में पक्षपात की धारणा sibling tension से जुड़ी थी। यानी मां-पापा की बीमारी सिर्फ उनकी जिंदगी नहीं बदलती। कई बार वह भाई-बहन के पुराने रिश्ते की भी परीक्षा लेती है।

समस्या हमेशा पैसे की नहीं होती

कई परिवारों में एक भाई या बहन दूर रहता है और आर्थिक मदद करता है। दूसरा उसी शहर में रहता है और रोजमर्रा की जिम्मेदारी उठाता है। बाहर से दोनों अपना योगदान दे रहे होते हैं।

लेकिन भीतर एक शिकायत जन्म ले सकती है। जो अस्पताल जाता है, वह सोचता है, “सिर्फ पैसे भेजना आसान है।” जो दूर है, वह सोचता है,“मैं भी अपनी जिम्मेदारियों के बीच जितना कर सकता हूं, कर रहा हूं।” और कई बार इसी तुलना में बचपन का रिश्ता कमजोर होने लगता है।

शोध भी यह संकेत देता है कि caregiving के दौरान communication और collaboration रिश्ते को मजबूत कर सकते हैं, जबकि तनावपूर्ण संवाद और किसी एक व्यक्ति द्वारा खुद को छोड़ा हुआ महसूस करना रिश्ते को लंबे समय तक प्रभावित कर सकता है।

युवा adult caregivers पर parental cancer caregiving से जुड़ी एक qualitative study में भी sibling openness, caregiving involvement और communication को रिश्तों की दिशा तय करने वाले महत्वपूर्ण पहलुओं के रूप में सामने रखा गया।

शायद राखी पर एक नया वादा होना चाहिए

इस रक्षाबंधन, भाई बहन से सिर्फ यह न कहें, “मैं हमेशा तुम्हारी रक्षा करूंगा।” एक और सवाल पूछिए, “जब मां-पापा को हमारी जरूरत होगी, हम दोनों मिलकर क्या करेंगे?” यह सवाल सुनने में अजीब लग सकता है। शायद भावुक भी कर दे। लेकिन कई परिवारों में सबसे बड़ी लड़ाई तब शुरू होती है, जब जिम्मेदारियां अचानक सामने आ जाती हैं और उनके बारे में पहले कभी बात ही नहीं हुई होती।

आज कोई फैसला लिखित रूप में करने की जरूरत नहीं। बस एक बातचीत। अगर एक भाई दूर है तो वह क्या संभाल सकता है? अगर बहन पास है तो क्या हर जिम्मेदारी उसी की होगी? पैसे, समय और physical care का संतुलन कैसे बनेगा? जरूरत पड़ने पर कौन किससे मदद मांगेगा? क्योंकि भाई-बहन जिंदगी के सबसे लंबे रिश्तों में से एक हो सकते हैं, बचपन के दोस्त बदल जाते हैं। स्कूल छूट जाता है। नौकरियां बदलती हैं। शहर बदल जाते हैं।

उम्र और जिम्मेदारियों के साथ कैसे बदलता है भाई-बहिन का रिश्ता?

लेकिन भाई या बहन वह व्यक्ति हो सकता है, जिसने आपको जीवन के अलग-अलग रूपों में देखा हो, बचपन में, किशोरावस्था में, शादी के बाद और फिर माता-पिता के बूढ़े होने के समय।

Older adulthood में sibling relationships पर हुए एक अध्ययन में relationship warmth का संबंध बेहतर well-being से देखा गया, जबकि sibling conflict और parental favoritism की धारणा loneliness, anxiety और depression के अधिक symptoms से जुड़ी थी।

इसलिए रक्षाबंधन सिर्फ एक दिन का त्योहार नहीं है। यह शायद उस रिश्ते की सालाना याद दिलाता है, जिसकी असली जरूरत कई बार जीवन के सबसे कठिन दिनों में पड़ती है।

तो आज कीजिए एक और नया वादा

राखी का धागा बांधते हुए इस बार एक नया वादा किया जा सकता है, “आज मैं तुम्हारे लिए हूं। कल जब जिंदगी मुश्किल होगी, तब भी हम एक-दूसरे से हिसाब नहीं, साथ मांगेंगे।” क्योंकि एक दिन मां की दवाइयों का समय तय करना होगा। पिता के डॉक्टर से बात करनी होगी। अस्पताल की कुर्सी पर रात काटनी होगी। और उस समय शायद सबसे बड़ी जरूरत यह नहीं होगी कि कौन कितना कर रहा है।

और सबसे बड़ी जरूरत होगी, दोनों भाई-बहन एक ही तरफ खड़े हों। शायद रक्षाबंधन का सबसे गहरा अर्थ यही है। एक-दूसरे को दुनिया से बचाने का वादा नहीं। बल्कि जब दुनिया मुश्किल हो जाए, तब एक-दूसरे का साथ न छोड़ने का वादा।

Updated on:
28 Aug 2026 10:37 am
Published on:
28 Aug 2026 10:37 am