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खेती में बेटियों की बढ़ती भूमिका: महिला किसान योजनाओं से परिवार की आय और फैसलों तक कितना बदला गांव?

Women Farmers Empowerment Schemes : खेती में महिलाओं की बढ़ती भूमिका, MKSP योजना, लखपति दीदी और नमो ड्रोन दीदी के बीच अंतर। जानिए महिला किसानों और ग्रामीण बेटियों के सशक्तिकरण की पूरी रिपोर्ट।
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Women Farmers Empowerment Schemes

Women Farmers Empowerment Schemes : कैसे महिलाओं को सशक्त बना रही सरकार, PC- Gemini

खेती-किसानी में महिलाओं की भूमिका लंबे समय से महत्वपूर्ण रही है, लेकिन अब उन्हें सिर्फ खेत में काम करने वाली सदस्य के बजाय किसान, उद्यमी और निर्णय लेने वाली भागीदार बनाने पर जोर बढ़ा है। सरकारी योजनाओं, स्वयं सहायता समूहों, तकनीकी प्रशिक्षण और बाजार से जुड़ाव ने ग्रामीण महिलाओं के लिए नए अवसर खोले हैं।

इस बदलाव का असर किसान परिवारों में भी दिखाई दे रहा है। हालांकि, इसे केवल ‘बेटियों’ के बदलाव के रूप में देखना सही नहीं होगा। असल बदलाव महिलाओं और ग्रामीण बेटियों की आर्थिक भागीदारी, कौशल और निर्णय क्षमता बढ़ने के रूप में सामने आ रहा है।

खेती में भागीदारी बढ़ाने पर जोर

महिला किसान सशक्तिकरण परियोजना (MKSP) को ग्रामीण विकास मंत्रालय ने DAY-NRLM के तहत 2011 में शुरू किया था। इसका उद्देश्य महिलाओं की कृषि में भागीदारी और उत्पादकता बढ़ाना तथा टिकाऊ आजीविका के अवसर तैयार करना है। इसके तहत महिलाओं को कृषि और उससे जुड़ी गतिविधियों की बेहतर तकनीक और टिकाऊ कृषि पद्धतियों से परिचित कराने पर जोर दिया जाता है।

MKSP के तहत अब तक बड़ी संख्या में महिला किसानों को प्रशिक्षण दिया गया है और इसके अनुभवों को राज्यों के ग्रामीण आजीविका मिशनों के माध्यम से आगे बढ़ाया गया है।

लखपति दीदी और नमो ड्रोन दीदी में अंतर समझना जरूरी

महिला किसानों से जुड़ी पहलों में लखपति दीदी और नमो ड्रोन दीदी को एक ही समझना सही नहीं है। लखपति दीदी पहल का लक्ष्य स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाओं को टिकाऊ आजीविका के जरिए सालाना कम से कम 1 लाख रुपये की आय हासिल करने में सक्षम बनाना है। इसमें कृषि के साथ अन्य आजीविका और उद्यम गतिविधियां भी शामिल हो सकती हैं। जुलाई 2026 तक 3.46 करोड़ से अधिक स्वयं सहायता समूह सदस्यों को लखपति दीदी के रूप में सक्षम किए जाने की जानकारी सरकार ने दी है।

वहीं नमो ड्रोन दीदी कृषि क्षेत्र में महिला स्वयं सहायता समूहों को ड्रोन उपलब्ध कराने और उन्हें ड्रोन आधारित कृषि सेवाओं से जोड़ने की पहल है। इसके तहत खाद और कीटनाशकों के छिड़काव जैसी कृषि सेवाएं किसानों को उपलब्ध कराने का प्रावधान है।

बीमा और वित्तीय सुरक्षा से घट सकता है खेती का जोखिम

किसान परिवारों में महिलाओं की आर्थिक भूमिका तभी मजबूत होगी, जब उन्हें खेती के जोखिमों से सुरक्षा और वित्तीय सेवाओं तक पहुंच भी मिले। फसल बीमा, स्वयं सहायता समूहों के जरिए बैंकिंग और ऋण सुविधा तथा सरकारी कृषि योजनाओं की जानकारी इस दिशा में महत्वपूर्ण हैं।

हालांकि, किसी एक महिला किसान की कहानी को पूरे देश में योजनाओं के प्रभाव का प्रमाण मानना उचित नहीं होगा। इसलिए स्थानीय उदाहरणों को प्रेरणा के रूप में देखना चाहिए, न कि पूरे देश के परिणाम के रूप में।

FPO और बाजार से जुड़ाव ने बढ़ाए नए अवसर

महिला किसानों को स्वयं सहायता समूहों और किसान उत्पादक संगठनों (FPO) से जोड़ने का महत्व भी बढ़ा है। FPO के जरिए किसान सामूहिक रूप से उत्पादन, प्रसंस्करण, भंडारण और बाजार तक पहुंच बनाने की कोशिश कर सकते हैं।

सरकार की 10,000 FPO वाली पहल में महिलाओं और महिला स्वयं सहायता समूहों को शामिल करने पर विशेष जोर देने का प्रावधान भी किया गया है। इससे महिलाओं के लिए केवल खेत में काम करने के बजाय उत्पादन से लेकर बाजार तक की पूरी प्रक्रिया में भूमिका बढ़ाने का रास्ता खुलता है।

जैविक और जलवायु-अनुकूल खेती में महिला नेतृत्व

महिलाओं की भागीदारी टिकाऊ और जलवायु-अनुकूल खेती में भी बढ़ाई जा रही है। MKSP के तहत टिकाऊ कृषि, गैर-काष्ठ वन उत्पाद और पशुपालन जैसी गतिविधियों से जुड़े प्रशिक्षण और अनुभवों को राज्यों के ग्रामीण आजीविका मिशनों तक पहुंचाया गया है।

इसका महत्व इसलिए भी है क्योंकि मौसम में बदलाव, पानी की कमी और बढ़ती कृषि लागत का सीधा असर छोटे किसान परिवारों पर पड़ता है। कम लागत वाली और संसाधन-संरक्षण वाली तकनीकें परिवार की आर्थिक सुरक्षा में मदद कर सकती हैं।

किसान परिवारों में बेटियों के लिए क्या बदल रहा है?

इन पहलों का सबसे महत्वपूर्ण असर यह है कि ग्रामीण महिलाओं और बेटियों के लिए खेती को केवल पारिवारिक जिम्मेदारी के बजाय आय और कौशल का अवसर मानने की संभावना बढ़ रही है।

  • कृषि प्रशिक्षण से नई तकनीक सीखने का अवसर मिल रहा है।
  • स्वयं सहायता समूह आर्थिक गतिविधियों और वित्तीय सेवाओं से जुड़ने का माध्यम बन रहे हैं।
  • ड्रोन जैसी तकनीक ग्रामीण महिलाओं के लिए खेती में नए रोजगार और उद्यम के अवसर खोल रही है।
  • FPO और बाजार से जुड़ाव महिलाओं की आर्थिक भूमिका को खेत से आगे ले जा सकता है।
  • आय में योगदान बढ़ने से परिवार के आर्थिक फैसलों में महिलाओं की भूमिका मजबूत होने की संभावना बढ़ती है।

अब अगली चुनौती क्या है?

सिर्फ योजना शुरू करना पर्याप्त नहीं है। असली बदलाव तब होगा जब ग्रामीण महिलाओं और बेटियों को जमीन, ऋण, बाजार, तकनीक, प्रशिक्षण और डिजिटल सेवाओं तक बराबर पहुंच मिले।

स्कूल और कॉलेज स्तर पर कृषि शिक्षा, गांवों में व्यावहारिक प्रशिक्षण, महिला समूहों को बाजार से जोड़ना और फसल बीमा व वित्तीय साक्षरता को मजबूत करना इस बदलाव को आगे बढ़ा सकता है।

खेत से फैसले तक बढ़ती भागीदारी

किसान परिवारों में महिलाओं और बेटियों की भूमिका धीरे-धीरे बदल रही है। अब वे केवल खेती में श्रम देने वाली सदस्य नहीं, बल्कि कौशल हासिल करने वाली किसान, स्वयं सहायता समूह की सदस्य, उद्यमी और तकनीक अपनाने वाली ग्रामीण महिला के रूप में भी सामने आ रही हैं।

हालांकि, बदलाव अभी पूरा नहीं हुआ है। योजनाओं का वास्तविक असर इस बात पर निर्भर करेगा कि महिलाओं को प्रशिक्षण के साथ संसाधन, बाजार, वित्त और निर्णय लेने का अधिकार कितना मिलता है। यही वह बदलाव है जो आने वाले वर्षों में किसान परिवारों की आर्थिक तस्वीर को और मजबूत कर सकता है।