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माइक्रो स्प्रिंकलर से सिंचाई होगी सस्ती: राजस्थान के किसानों को 75% तक सब्सिडी, जानें आवेदन से लेकर फायदे तक पूरी जानकारी

Micro Sprinkler Subsidy Rajasthan : राजस्थान में माइक्रो स्प्रिंकलर सिस्टम पर 75% तक सब्सिडी और 70% पानी की बचत। जानिए 'राज किसान साथी' पोर्टल पर आवेदन करने की पूरी प्रक्रिया और दस्तावेज।
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Micro Sprinkler Subsidy Rajasthan

Micro Sprinkler Subsidy Rajasthan : सूक्ष्म सिंचाई योजना पर कितनी मिलती है सब्सिडी, PC- Chatgpt

राजस्थान जैसे कम बारिश और पानी की कमी वाले राज्य में खेती के लिए सिंचाई सबसे बड़ी चुनौती है। ऐसे में सूक्ष्म सिंचाई तकनीक किसानों के लिए महत्वपूर्ण विकल्प बन रही है। माइक्रो स्प्रिंकलर इसी तकनीक का हिस्सा है, जिसमें पानी को नियंत्रित मात्रा में बूंदों के रूप में फसल तक पहुंचाया जाता है।

राजस्थान सरकार भी ड्रिप और स्प्रिंकलर जैसी सूक्ष्म सिंचाई प्रणालियों को बढ़ावा दे रही है। राज्य के आर्थिक समीक्षा दस्तावेज के अनुसार, सामान्य किसानों को 70% और अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, महिला तथा लघु एवं सीमांत किसानों को 75% तक सब्सिडी का प्रावधान है।

माइक्रो स्प्रिंकलर क्या है और कैसे काम करता है?

माइक्रो स्प्रिंकलर छोटा सिंचाई उपकरण है, जो पानी को बारीक बूंदों के रूप में फसल के आसपास वितरित करता है। यह पारंपरिक तरीके से पूरे खेत में पानी भरने के बजाय पानी को अपेक्षाकृत नियंत्रित तरीके से पहुंचाता है।

इससे खेत में पानी के बेहतर वितरण और जल उपयोग दक्षता में मदद मिल सकती है। खासकर ऐसी जगहों पर, जहां पानी सीमित है या जमीन की सतह असमान है, सूक्ष्म सिंचाई उपयोगी हो सकती है।

राजस्थान में किसानों को कितनी सब्सिडी?

राजस्थान सरकार के 2026-27 के आर्थिक समीक्षा दस्तावेज के मुताबिक, सूक्ष्म सिंचाई के तहत सामान्य किसानों के लिए 70% और अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, महिला तथा लघु एवं सीमांत किसानों के लिए 75% तक सब्सिडी उपलब्ध है। यह सहायता केंद्र और राज्य के हिस्से तथा राज्य की अतिरिक्त सहायता को मिलाकर दी जाती है।

हालांकि, वास्तविक अनुदान स्वीकृत इकाई लागत, किसान की श्रेणी और लागू नियमों के अनुसार तय होगा। इसलिए आवेदन से पहले पोर्टल पर मौजूदा पात्रता और स्वीकृत लागत जरूर जांचनी चाहिए।

पानी बचाने के साथ खेती में क्या फायदा?

सूक्ष्म सिंचाई का सबसे बड़ा उद्देश्य खेत में पानी के उपयोग को अधिक प्रभावी बनाना है। पानी का वितरण नियंत्रित होने से अनावश्यक बहाव और पानी की बर्बादी कम करने में मदद मिल सकती है।

माइक्रो स्प्रिंकलर का इस्तेमाल फसल और खेत की परिस्थितियों के अनुसार अलग-अलग किया जा सकता है। सब्जियों, कुछ खेत फसलों और बागवानी में इसका उपयोग किया जाता है। इससे पानी के साथ घुलनशील उर्वरकों के इस्तेमाल को भी अधिक नियंत्रित तरीके से किया जा सकता है।

हालांकि, 60-70% पानी बचत या 30% उत्पादन वृद्धि को हर फसल और हर खेत के लिए निश्चित परिणाम मानना सही नहीं है। वास्तविक लाभ मिट्टी, फसल, मौसम, सिंचाई प्रबंधन और प्रणाली की गुणवत्ता पर निर्भर करता है।

देशभर में बढ़ रहा है सूक्ष्म सिंचाई का इस्तेमाल

केंद्र की ‘प्रति बूंद अधिक फसल’ (PDMC) योजना सूक्ष्म सिंचाई को बढ़ावा देने की प्रमुख पहल है। यह योजना 2015-16 में शुरू हुई थी। 2022-23 से इसे प्रधानमंत्री राष्ट्रीय कृषि विकास योजना (PMRKVY) के तहत लागू किया जा रहा है।

कृषि मंत्रालय के अनुसार, 2015-16 से अब तक PDMC के तहत 96.97 लाख हेक्टेयर क्षेत्र को सूक्ष्म सिंचाई के दायरे में लाया गया है। इसमें 46.37 लाख हेक्टेयर ड्रिप और 50.60 लाख हेक्टेयर स्प्रिंकलर सिंचाई के तहत है। योजना में लघु एवं सीमांत किसानों के लिए इकाई लागत का 55% और अन्य किसानों के लिए 45% तक वित्तीय सहायता का प्रावधान है।

राजस्थान में आवेदन कैसे करें?

राजस्थान कृषि विभाग के राज किसान साथी पोर्टल पर ड्रिप, मिनी स्प्रिंकलर और माइक्रो स्प्रिंकलर जैसी सुविधाओं के लिए ऑनलाइन आवेदन का विकल्प उपलब्ध है। पोर्टल पर सूक्ष्म सिंचाई से जुड़ी सेवाएं अलग-अलग दिखाई गई हैं।

किसान ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। राजस्थान कृषि विभाग ने यह भी स्पष्ट किया है कि अनुदान योजनाओं के लिए आवेदन ऑनलाइन किया जाता है और कृषि कार्यालय में अलग से दस्तावेज या फाइल जमा करने की जरूरत नहीं है।

आवेदन से पहले किसान को अपनी भूमि, फसल और सिंचाई की जरूरत के अनुसार उपयुक्त प्रणाली चुननी चाहिए। जरूरी दस्तावेज और अन्य शर्तें आवेदन के समय पोर्टल पर उपलब्ध नियमों के अनुसार पूरी करनी होंगी।

किसानों को किन बातों का ध्यान रखना चाहिए?

माइक्रो स्प्रिंकलर लगवाने से पहले सिर्फ सब्सिडी को देखकर फैसला नहीं करना चाहिए। किसान को यह देखना चाहिए कि उसके खेत और फसल के लिए कौन-सी प्रणाली बेहतर है।

साथ ही अधिकृत निर्माता या आपूर्तिकर्ता से ही प्रणाली लगवाना, स्वीकृत लागत और तकनीकी मानकों की जानकारी लेना तथा आवेदन स्वीकृत होने से पहले खरीदारी के नियमों को समझना जरूरी है।

जल संकट वाले राजस्थान में क्यों अहम है यह तकनीक?

राजस्थान में पानी की उपलब्धता खेती की लागत और उत्पादन दोनों को प्रभावित करती है। ऐसे में सिंचाई में पानी की दक्षता बढ़ाना केवल किसान की लागत कम करने का मामला नहीं, बल्कि भूजल और जल संसाधनों पर दबाव कम करने से भी जुड़ा है।

यदि किसान फसल और खेत की जरूरत के अनुसार सूक्ष्म सिंचाई अपनाते हैं, तो कम पानी में बेहतर सिंचाई प्रबंधन संभव हो सकता है। सरकार की सब्सिडी से शुरुआती निवेश का बोझ भी कम किया जा सकता है।

पानी बचाएं, लागत घटाएं और खेती को टिकाऊ बनाएं

माइक्रो स्प्रिंकलर राजस्थान के किसानों के लिए पानी की कमी से निपटने वाली उपयोगी तकनीक हो सकती है। 70% से 75% तक की राज्य सहायता इसे किसानों के लिए अधिक सुलभ बनाती है।

लेकिन इसका लाभ तभी मिलेगा, जब किसान अपने खेत, फसल और पानी की उपलब्धता के हिसाब से सही प्रणाली चुनें और सरकारी नियमों के अनुसार आवेदन करें। राजस्थान में सूक्ष्म सिंचाई का बढ़ता इस्तेमाल खेती को अधिक जल-कुशल, कम लागत वाली और टिकाऊ बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।