
बदलते समय के साथ जब ब्याज दरों में उतार-चढ़ाव आम हो गया है, तो आपके लिए सबसे अहम सवाल यह है कि आपके लोन की EMI (मासिक किस्त) पर इसका क्या असर होगा। हाल ही में भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने EMI से जुड़े नियमों में महत्वपूर्ण बदलाव किए हैं, जो सीधे तौर पर आम लोन लेने वालों- जैसे नौकरीपेशा, छोटे व्यापारी, निवेशक और रिटायरमेंट प्लानर पर प्रभाव डालते हैं। आइए समझते हैं कि ये बदलाव क्या हैं और आपके लिए कैसे फायदेमंद हो सकते हैं।
RBI ने अगस्त 2023 में एक सर्कुलर जारी किया था, जिसमें EMI आधारित फ्लोटिंग रेट पर्सनल लोन के लिए ‘रिसेट’ यानी ब्याज दर बदलने पर मिलने वाले विकल्पों की रूपरेखा दी गई थी। इसमें कहा गया था कि लोन लेते समय आपको यह स्पष्ट रूप से बताया जाए कि यदि बेंचमार्क रेट बढ़ता है तो EMI या लोन की अवधि (टेन्योर) में बदलाव हो सकता है। साथ ही, ब्याज दर बदलने पर आपको फ्लोटिंग से फिक्स्ड रेट पर स्विच करने का विकल्प भी मिलना चाहिए, और यह विकल्प कितनी बार इस्तेमाल किया जा सकता है, यह बैंक की बोर्ड-स्वीकृत नीति में निर्धारित होगा।
इसके अलावा, EMI या टेन्योर बढ़ने पर ‘नेगेटिव अमॉर्टाइजेशन’ (जिसमें EMI इतनी कम हो कि ब्याज ही पूरा न हो) नहीं होना चाहिए। हर तिमाही आपको एक स्टेटमेंट मिलना चाहिए, जिसमें अब तक चुकाए गए ब्याज और मूलधन, बची EMI की संख्या और वार्षिक ब्याज दर (APR) जैसी जानकारी होनी चाहिए।
1 मार्च 2026 से लागू हुई डिजिटल लेंडिंग गाइडलाइंस में EMI की पारदर्शिता और शुल्कों की स्पष्ट जानकारी देना अनिवार्य कर दिया गया है। अब सभी विनियमित संस्थाओं- बैंकों, NBFCs, HFCs और उनके डिजिटल पार्टनर्स को EMI, फीस और कलेक्शन प्रैक्टिसेज के बारे में स्पष्ट जानकारी देनी होगी। RBI के ये नए नियम EMI लोन लेने वालों के लिए पारदर्शिता और विकल्प बढ़ाने की दिशा में एक बड़ा कदम हैं। इससे आप बेहतर निर्णय ले सकते हैं। अपनी वित्तीय योजना को मजबूत बना सकते हैं और अनचाहे खर्चों से बच सकते हैं।
स्पष्ट जानकारी: लोन लेते समय आपको यह पता होगा कि ब्याज दर बढ़ने पर EMI बढ़ेगी या अवधि बढ़ेगी।
विकल्प की आजादी: फ्लोटिंग से फिक्स्ड रेट पर स्विच करने का विकल्प मिलता है, जिससे आप अपनी सुविधा के अनुसार निर्णय ले सकते हैं।
ब्याज और EMI की जानकारी: हर तिमाही स्टेटमेंट से आपको पता चलता रहेगा कि आपने कितना भुगतान किया, कितना बाकी है और ब्याज दर क्या है।
डिजिटल लोन में पारदर्शिता: EMI और अन्य शुल्कों की पूरी जानकारी आपको पहले से मिलती है, जिससे आप बेहतर निर्णय ले सकते हैं।