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उत्तर कोरिया की दो मिसाइलों ने बढ़ाई 3 देशों की धड़कन: अमेरिका, जापान और द. कोरिया सतर्क, बनाई नई रणनीति

उत्तर कोरिया की ओर से दागी गई दो मिसाइलों ने एक साथ 3 देशों की चिंता बढ़ा दी है। उत्तर कोरिया द्वारा 2 बैलिस्टिक मिसाइलें दागे जाने के बाद दक्षिण कोरिया, अमेरिका और जापान सतर्क हो गए हैं।
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भारत

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Vinay Shakya

Sep 21, 2026

North korea missile test

सांकेतिक इमेज (सोर्स- Chatgpt)

उत्तर कोरिया द्वारा रविवार को दागी गई दो कम दूरी की बैलिस्टिक मिसाइलों पर दक्षिण कोरिया, अमेरिका और जापान के वरिष्ठ अधिकारियों ने सोमवार को फोन पर विस्तृत बातचीत की। तीनों पक्षों ने प्रक्षेपण से जुड़ी जानकारियां साझा कीं और आगे की स्थिति पर समन्वय बनाए रखने पर सहमति जताई।

दक्षिण कोरिया, अमेरिका और जापान सतर्क

दक्षिण कोरिया के विदेश मंत्रालय के मुताबिक, कोरियाई प्रायद्वीप नीति के महानिदेशक बाक योंग-जिन ने अमेरिका और जापान के अपने समकक्ष अधिकारियों से बात की। मंत्रालय ने कहा कि तीनों देश उत्तर कोरिया की मिसाइल गतिविधियों को लेकर सूचनाओं और आकलनों को तेजी से साझा करने की व्यवस्था बनाए हुए हैं, और सोल ने प्योंगयांग से ऐसे प्रक्षेपण रोकने का आग्रह करते हुए इन्हें संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्तावों का उल्लंघन बताया।

दो मिसाइलें, 3 घंटे का अंतर

दक्षिण कोरिया के ज्वाइंट चीफ्स ऑफ स्टाफ (जेसीएस) के अनुसार, पहली मिसाइल वॉनसान क्षेत्र से दोपहर करीब 3 बजे दागी गई और लगभग 450 किलोमीटर की दूरी तय कर पूर्वी सागर (ईस्ट सी) में गिरी। इसके करीब तीन घंटे बाद दागी गई दूसरी मिसाइल ने 600 किलोमीटर से अधिक दूरी तय की। जापान के रक्षा मंत्रालय ने भी दोनों प्रक्षेपणों की पुष्टि की, हालांकि उसने कहा कि मिसाइलें जापान के आर्थिक क्षेत्र (EEZ) से बाहर गिरीं। जापानी प्रधानमंत्री सनाए ताकाइची के कार्यालय ने दोनों बार तुरंत सतर्कता संदेश जारी किए।

उत्तर कोरिया ने इस साल 15 परीक्षण किए

जापान के रक्षा मंत्री शिंजीरो कोइज़ुमी ने बताया कि रविवार के प्रक्षेपणों के साथ इस साल उत्तर कोरिया के बैलिस्टिक मिसाइल प्रक्षेपणों की संख्या कम से कम 15 हो गई है, जो 9 अलग-अलग मौकों पर हुए हैं, जबकि पिछले साल इसी अवधि में यह आंकड़ा केवल 4 मौकों पर 5 मिसाइलों का था। उन्होंने इसे क्षेत्रीय सुरक्षा स्थिति के "लगातार गंभीर होने" का संकेत बताया। योनहाप न्यूज एजेंसी के मुताबिक 12 सितंबर को भी प्योंगयांग ने इसी इलाके से कई कम दूरी की मिसाइलें दागी थीं। यह प्रक्षेपण अमेरिका, दक्षिण कोरिया और जापान के पांच-दिवसीय त्रिपक्षीय सैन्य अभ्यास खत्म होने के एक दिन बाद हुआ था।

पैसिफिक वैनगार्ड अभ्यास खत्म, तनाव बरकरार

उत्तर कोरिया का यह प्रक्षेपण अमेरिका के नेतृत्व वाले बहुराष्ट्रीय नौसैनिक अभ्यास 'पैसिफिक वैनगार्ड 2026' के समाप्त होने के करीब दस दिन बाद हुआ। यह अभ्यास 29 अगस्त से 10 सितंबर तक गुआम के पास हुआ था, जिसमें अमेरिका के साथ दक्षिण कोरिया, जापान, ऑस्ट्रेलिया, कनाडा और न्यूजीलैंड की नौसेनाएं शामिल थीं।

अभ्यास के खत्म होते ही मिसाइल प्रक्षेपण से दो दिन पहले 18 सितंबर को, किम जोंग-उन की बहन और वर्कर्स पार्टी की उप निदेशक किम यो-जोंग ने केसीएनए के जरिए जारी बयान में इसे 'गुट-बंदी को बढ़ावा देने वाला धमकी भरा युद्धाभ्यास' करार दिया। उन्होंने कहा कि उत्तर कोरिया अपनी परमाणु प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के रास्ते से 'एक इंच भी पीछे नहीं हटेगा' और अगर सुरक्षा को गंभीर खतरा महसूस हुआ तो जवाब 'आनुपातिक या उससे भी अधिक आक्रामक' हो सकता है। हालांकि रविवार के दो प्रक्षेपणों पर उत्तर कोरिया की सरकारी समाचार एजेंसी केसीएनए ने अभी तक कोई अलग बयान जारी नहीं किया है।

कूटनीति की राह अब भी मुश्किल

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पहले भी किम जोंग-उन के साथ बातचीत फिर शुरू करने की इच्छा जता चुके हैं, लेकिन वाशिंगटन टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार यह ताजा प्रक्षेपण प्योंगयांग द्वारा अमेरिका के साथ नए सिरे से कूटनीतिक बातचीत के प्रस्तावों को ठुकराए जाने के कुछ ही दिन बाद हुआ है, जिससे संभावित संपर्क की राह और चुनौतीपूर्ण बन गई है।

संयुक्त राष्ट्र सत्र से ठीक पहले परीक्षण

उत्तर कोरिया का प्रक्षेपण संयुक्त राष्ट्र महासभा के 81वें सत्र के उच्चस्तरीय सप्ताह (21-25 सितंबर) और आम बहस शुरू होने से ठीक पहले हुआ है। इसी हफ्ते अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग की 24 सितंबर के आसपास वाशिंगटन में मुलाकात प्रस्तावित है, जो मई में बीजिंग में हुई उनकी बैठक के बाद पहली आमने-सामने मुलाकात होगी।

ऐसे व्यस्त कूटनीतिक कैलेंडर के बीच उत्तर कोरिया की सैन्य गतिविधि ने क्षेत्रीय सुरक्षा को लेकर चिंता और बढ़ा दी है। दक्षिण कोरिया ने रविवार के प्रक्षेपण के बाद राष्ट्रीय सुरक्षा कार्यालय की आपात बैठक बुलाई, जिसमें रक्षा मंत्रालय और जेसीएस अधिकारियों ने स्थिति व संभावित सुरक्षा प्रभावों की समीक्षा की। सेना ने कहा कि वह अतिरिक्त प्रक्षेपणों की आशंका में सतर्कता बढ़ा चुकी है।