
सांकेतिक इमेज (सोर्स- Chatgpt)
उत्तर कोरिया के परमाणु परीक्षणों का असर सिर्फ भू-राजनीतिक तनाव तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसने जमीन के नीचे भी गहरी उथल-पुथल मचा दी है। दक्षिण कोरिया की पुसान नेशनल यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर किम क्वांग-ही के नेतृत्व में हुई एक नई स्टडी के मुताबिक, उत्तर कोरिया के मुख्य परमाणु परीक्षण स्थल पुंगये-री और उसके आसपास स्थित माउंट मंटैप में 2008 से 2025 के बीच कुल 1,399 भूकंप दर्ज किए गए हैं।
उत्तर कोरिया के मुख्य परमाणु परीक्षण स्थल पुंगये-री और उसके आसपास स्थित माउंट मंटैप में 2008 से 2025 के बीच कुल 1,399 भूकंप दर्ज किए गए हैं। यह शोध चेंगदू यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्नोलॉजी के प्रोफेसर फान शिंगली, चाइनीज एकेडमी ऑफ साइंसेज, चाइना अर्थक्वेक एडमिनिस्ट्रेशन और शानदोंग यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं के साथ मिलकर किया गया और बीते शुक्रवार को प्रतिष्ठित जर्नल 'साइंस' में प्रकाशित हुआ।
शोध टीम ने दक्षिण कोरिया और उत्तर-पूर्वी चीन में दर्ज की गई 17 साल की भूकंपीय तरंगों के आंकड़ों का विश्लेषण किया, जिसमें ज्ञात भूकंपों के वेवफॉर्म को टेम्पलेट के तौर पर इस्तेमाल कर बैकग्राउंड शोर में छिपे बेहद हल्के भूकंपों तक की पहचान की गई। इस विश्लेषण में 1,399 भूकंप सामने आए, जिनमें से 955 का सटीक स्थान भी तय किया जा सका। अधिकांश भूकंप बेहद हल्के थे, जिनकी रिक्टर पैमाने पर तीव्रता 2 से 3 के बीचत रही। हालांकि, कोरिया टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार सबसे तेज भूकंप 3.4 तीव्रता तक का दर्ज हुआ।
उत्तर कोरिया ने 2006 से 2017 के बीच माउंट मंटैप के नीचे कुल छह भूमिगत परमाणु परीक्षण किए, जिनमें 2017 में किया गया छठा और सबसे बड़ा परीक्षण सबसे विनाशकारी माना जाता है। अमेरिकी भूगर्भीय सर्वेक्षण (USGS) के मुताबिक इस विस्फोट से पैदा हुए भूकंपीय झटके की तीव्रता 6.3 आंकी गई थी।
इसके करीब साढ़े आठ मिनट बाद एक और झटका दर्ज हुआ जिसे सुरंग या विस्फोट-कक्ष के धंसने से जोड़कर देखा गया। सैटेलाइट रडार विश्लेषण में यह भी सामने आया कि पहाड़ की चोटी और ढलान कई मीटर तक खिसक गए थे, जिसके बाद अगले पांच महीनों में 15 किलोमीटर के दायरे में 2.5 या उससे अधिक तीव्रता के 10 उथले भूकंप दर्ज किए गए थे।
शोधकर्ताओं के मुताबिक, माउंट मंटैप क्षेत्र में पिछले करीब 2,000 वर्षों के ऐतिहासिक भूकंपीय रिकॉर्ड में कोई खास गतिविधि दर्ज नहीं थी। यह इलाका भूगर्भीय रूप से लगभग पूरी तरह शांत माना जाता था। नई श्रृंखला का पहला भूकंप 2013 में, यानी उत्तर कोरिया के तीसरे परमाणु परीक्षण के बाद दर्ज हुआ, लेकिन 2017 तक भूकंपीय गतिविधि अपेक्षाकृत कम ही रही। छठे और सबसे बड़े परीक्षण के बाद स्थिति नाटकीय रूप से बदल गई। आम तौर पर परमाणु विस्फोटों के बाद भूकंपीय गतिविधि धीरे-धीरे कम होती जाती है, लेकिन माउंट मंटैप में यह ठीक उलटा हुआ। 2025 तक भूकंपों की आवृत्ति और उनकी कुल ऊर्जा (सिस्मिक मोमेंट) दोनों में लगातार बढ़ोतरी दर्ज की गई।
अध्ययन के मुताबिक, भूकंपों का भौगोलिक पैटर्न भी अहम संकेत देता है। ये उत्तर-उत्तरपश्चिम दिशा में फैली दो समानांतर रेखाओं के साथ केंद्रित पाए गए। इनमें से एक रेखा दशकों पहले माउंट मंटैप के दक्षिण में मैप की गई एक फॉल्ट लाइन की अनुमानित निरंतरता से मेल खाती है, जबकि दूसरी का सतह पर कोई पूर्व-ज्ञात निशान नहीं है।
प्रोफेसर किम के अनुसार बार-बार हुए भूमिगत परमाणु विस्फोटों ने धीरे-धीरे ऊपरी भूपर्पटी (शैलो क्रस्ट) को नुकसान पहुंचाया और आसपास की फॉल्ट लाइनों पर पड़ने वाले दबाव को बदल दिया, जिससे पहले से तनाव में मौजूद, लेकिन शांत फॉल्ट जोन सक्रिय हो गए। किम ने कहा कि यह पैटर्न पाठ्यपुस्तकों में बताए गए सामान्य मामलों से पूरी तरह अलग है और शुरुआत में उनकी टीम को इससे बेहद आश्चर्य हुआ।
स्टडी में एक चिंताजनक पहलू की ओर भी इशारा किया गया है। कोरिया यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर एमेरिटस ली जिन-हान के मुताबिक अगर भविष्य में इस क्षेत्र में 6.5 या उससे अधिक तीव्रता का भूकंप आता है। उसका रप्चर उत्तर दिशा में फैलता है, तो यह माउंट पैकटू ज्वालामुखी के नीचे मौजूद मैग्मा चैंबर तक पहुंचकर संभावित रूप से विस्फोट को ट्रिगर कर सकता है। बता दें कि एमेरिटस ली जिन-हान ने 2017 में इंसानी गतिविधि से जुड़े पोहांग भूकंप का अध्ययन किया था। शोधकर्ताओं ने चेताया है कि परमाणु परीक्षणों के खत्म होने के बाद भी भूकंपीय गतिविधि पर लंबे समय तक नजर रखने और आंकड़े जुटाते रहने की जरूरत है।
Updated on:
20 Sept 2026 07:28 pm
Published on:
20 Sept 2026 07:28 pm
