
सांकेतिक इमेज (सोर्स- Chatgpt)
दक्षिण कोरिया की सेना ने दावा किया कि उत्तर कोरिया ने ईस्ट सी (जापान सागर) की ओर एक अज्ञात प्रोजेक्टाइल दागा है। योनहाप न्यूज एजेंसी के मुताबिक दक्षिण कोरिया के ज्वाइंट चीफ्स ऑफ स्टाफ (JCS) ने दोपहर करीब 3 बजे (स्थानीय समयानुसार) मीडिया को भेजे एक संदेश में इस लॉन्च की पुष्टि की, हालांकि प्रोजेक्टाइल के प्रकार और उसकी उड़ान दूरी को लेकर विश्लेषण अभी जारी बताया गया।
कोरिया टाइम्स और कोरिया जूंगआंग डेली की रिपोर्टों के अनुसार, अगर इसकी पुष्टि बैलिस्टिक मिसाइल के तौर पर होती है, तो यह पिछले 8 दिनों में उत्तर कोरिया का पहला बैलिस्टिक मिसाइल परीक्षण होगा। इससे पहले 12 सितंबर को भी प्योंगयांग ने वॉनसन इलाके से ईस्ट सी की तरफ कई कम दूरी की बैलिस्टिक मिसाइलें दागी थीं।
JCS के मुताबिक ये मिसाइलें करीब 250 किलोमीटर की दूरी तय कर समुद्र में गिरी थीं। कोरिया जूंगआंग डेली के अनुसार यह प्रक्षेपण दक्षिण कोरिया, अमेरिका और जापान के बीच संपन्न हुए त्रिपक्षीय सैन्य अभ्यास "फ्रीडम एज" के एक दिन बाद हुआ था, जिसे प्योंगयांग के विरोध के तौर पर देखा गया। उत्तर कोरिया ने बाद में अपने सरकारी मीडिया के जरिए बताया कि यह अभ्यास क्रूज और बैलिस्टिक मिसाइलों, मल्टीपल रॉकेट लॉन्चरों और अटैक ड्रोन सहित कई तरह के हथियारों का इस्तेमाल कर की गई फायरपावर स्ट्राइक ड्रिल का हिस्सा था।
इस साल गर्मियों में उत्तर कोरिया की सैन्य गतिविधियां लगातार अमेरिका-दक्षिण कोरिया के संयुक्त अभ्यासों से जुड़ी रही हैं। 12 अगस्त को भी उत्तर कोरिया ने पूर्व दिशा में एक कम दूरी की बैलिस्टिक मिसाइल दागी थी, जिसे अमेरिका और दक्षिण कोरिया के बीच हो रहे 'उल्ची फ्रीडम शील्ड' सैन्य अभ्यास के विरोध में देखा गया। टास्क एंड पर्पस और कोरिया हेराल्ड की रिपोर्टों के मुताबिक, यह अभ्यास मूलतः 17 से 27 अगस्त तक ग्यारह दिनों के लिए तय था, लेकिन राष्ट्रपति ट्रंप के 16 अगस्त के निर्देश पर पेंटागन ने इसे घटाकर 21 अगस्त तक सीमित कर दिया, यानी करीब एक हफ्ता पहले ही समाप्त कर दिया गया।
दक्षिण कोरियाई रक्षा अधिकारियों के अनुसार यह फैसला वाशिंगटन के अनुरोध पर लिया गया था। इसके अलावा 20 अगस्त को भी प्योंगयांग ने ईस्ट सी की ओर एक मिसाइल दागी थी, जिसकी रेंज दक्षिण कोरियाई सेना के मुताबिक करीब 300 किलोमीटर आंकी गई थी। इस बीच, परमाणु कार्यक्रम को लेकर भी उत्तर कोरिया और अंतरराष्ट्रीय बिरादरी के बीच तनातनी जारी है। अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) ने वियना में आयोजित अपने 70वें महासम्मेलन में एक प्रस्ताव पारित कर दोहराया कि परमाणु अप्रसार संधि (NPT) के तहत उत्तर कोरिया को परमाणु हथियार संपन्न देश का दर्जा नहीं दिया जा सकता, और प्योंगयांग से तत्काल संबंधित गतिविधियां रोकने को कहा गया।
कोरिया टाइम्स और ब्लूमबर्ग की रिपोर्टों के अनुसार किम जोंग उन की बहन और वर्कर्स पार्टी की वरिष्ठ अधिकारी किम यो-जोंग ने पहले गुरुवार को ही डिन्यूक्लियराइजेशन की कोशिशों को खारिज करते हुए कहा था कि इस दिशा में यकीन रखने वाले लोग "दुनिया की सच्चाई से अनजान" हैं, और उत्तर कोरिया का परमाणु हथियार संपन्न देश का दर्जा "अपरिवर्तनीय" है।
इसके बाद शनिवार को उन्होंने IAEA के औपचारिक प्रस्ताव को भी "बेमतलब और अप्रभावी" बताते हुए खारिज कर दिया और कहा कि उत्तर कोरिया अमेरिका और पश्चिमी देशों की "सहनशीलता" के आगे अपनी संप्रभुता और सुरक्षा का अधिकार कभी गिरवी नहीं रखेगा। कुल मिलाकर कोरियाई प्रायद्वीप पर तनाव की यह श्रृंखला मिसाइल परीक्षणों से लेकर परमाणु दर्जे पर विवाद तक पिछले कुछ महीनों से लगातार बनी हुई है। अमेरिका-दक्षिण कोरिया-जापान के त्रिपक्षीय सैन्य सहयोग तथा IAEA जैसी अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं के दबाव के बावजूद प्योंगयांग अपने रुख पर कायम है।
Updated on:
20 Sept 2026 02:23 pm
Published on:
20 Sept 2026 02:22 pm
