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विश्व अल्जाइमर दिवस 2026: डिमेंशिया के शुरुआती संकेतों को न करें नजरअंदाज, समय पर रोग की पहचान से कम होगा जोखिम

अल्जाइमर के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए हर वर्ष 21 सितंबर को विश्व अल्जाइमर दिवस मनाया जाता है। जितनी जल्दी आपको बीमारी के बारे में पता चलेगा, उतना ही बेहतर तरीके से आगे की तैयारी और जरूरी सहायता की जा सकती है।
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भारत

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Vinay Shakya

Sep 20, 2026

Dementia symptoms

सांकेतिक इमेज (सोर्स- Chatgpt)

हर साल 21 सितंबर को दुनियाभर में विश्व अल्जाइमर दिवस मनाया जाता है। इस साल यह दिन रविवार को पड़ रहा है। अल्जाइमर्स डिजीज इंटरनेशनल (ADI) द्वारा 1994 में एडिनबर्ग में अपने वार्षिक सम्मेलन के दौरान इस दिवस की शुरुआत की गई थी और सितंबर 2026 पूरे विश्व अल्जाइमर माह के 15वें साल को चिह्नित कर रहा है। इस वर्ष के अभियान का आधिकारिक विषय है - जितनी जल्दी आपको पता चलेगा, उतना ही बेहतर आप कर पाएंगे: डिमेंशिया का निदान मायने रखता है, जो शुरुआती पहचान की अहमियत पर केंद्रित है।

विश्व में कितने लोग डिमेंशिया के शिकार?

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) और ADI के हवाले से मिली जानकारी के मुताबिक, 2021 में दुनियाभर में करीब 5.7 करोड़ लोग डिमेंशिया के साथ जी रहे थे। हर साल करीब एक करोड़ नए मामले सामने आते हैं। अल्जाइमर, डिमेंशिया का सबसे सामान्य रूप है और यह कुल मामलों के करीब 60 से 70 फीसदी हिस्से के लिए जिम्मेदार है।

WHO के मुताबिक डिमेंशिया फिलहाल दुनियाभर में मौत का सातवां सबसे बड़ा कारण है। इसके साथ ही बुजुर्गों में विकलांगता व दूसरों पर निर्भरता का भी एक प्रमुख कारण है। हालांकि, WHO स्पष्ट करता है कि डिमेंशिया बढ़ती उम्र का अनिवार्य हिस्सा नहीं है, भले ही 65 वर्ष की उम्र के बाद यह ज्यादा देखने को मिलता है।

अल्जाइमर से क्या दिक्कत होती है?

अल्जाइमर एक ऐसी बीमारी है, जिसमें व्यक्ति की याददाश्त, सोचने-समझने और रोजमर्रा के काम करने की क्षमता धीरे-धीरे प्रभावित होने लगती है। दिक्कत यह है कि शुरुआती लक्षणों को अक्सर बढ़ती उम्र का सामान्य असर मानकर नजरअंदाज कर दिया जाता है, जबकि समय रहते इन्हें पहचानना आगे की देखभाल और सहायता की बेहतर योजना बनाने में मदद कर सकता है। विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि अगर ऐसे बदलाव किसी में लगातार दिखाई दें, तो उन्हें केवल उम्र का असर मानने के बजाय डॉक्टर या स्वास्थ्य विशेषज्ञ से सलाह लेनी चाहिए, क्योंकि समय पर निदान से उपचार, देखभाल और सहयोग के सही विकल्प चुनने में मदद मिलती है।

अल्जाइमर के शुरुआती संकेत

  • समय या स्थान को लेकर भ्रम की स्थिति पैदा होना।
  • रोजमर्रा की योजना बनाने या किसी समस्या को सुलझाने में कठिनाई।
  • पहले से परिचित और आसान कामों को करने में परेशानी महसूस होना।
  • ऐसी याददाश्त की कमी, जो दैनिक जीवन को प्रभावित करने लगे।
  • काम या सामाजिक गतिविधियों से धीरे-धीरे दूरी बनाना।

बचाव के लिए क्या करें?

चिकित्सा विशेषज्ञों और स्वास्थ्य संगठनों के मुताबिक, अल्जाइमर और डिमेंशिया के खतरे को कम करने के लिए शारीरिक, मानसिक और सामाजिक रूप से सक्रिय रहना जरूरी है, जैसे-

नियमित व्यायाम: रोजाना टहलना, योग या क्षमता के अनुसार शारीरिक गतिविधियां शरीर के साथ मानसिक स्वास्थ्य के लिए भी फायदेमंद हैं।

सामाजिक जुड़ाव: दोस्तों और परिवार से नियमित मेलजोल, बातचीत और सामूहिक गतिविधियों में हिस्सा लेना मानसिक व भावनात्मक रूप से सक्रिय रखता है।

संतुलित आहार: फल-सब्जियों से भरपूर पौष्टिक भोजन को प्राथमिकता देना।

पर्याप्त नींद: सोने-जागने का समय लगभग तय रखना और नियमित नींद लेना।

मानसिक सक्रियता: किताबें पढ़ना, नया कौशल सीखना, संगीत या रचनात्मक गतिविधियों में रुचि लेना दिमाग को सक्रिय बनाए रखता है। साथ ही, ऐसी गतिविधियों के लिए समय निकालना जिनसे खुशी और संतुष्टि मिले, भी सेहत के लिए जरूरी माना जाता है।

WHO का वैश्विक डिमेंशिया कार्ययोजना (2017-2031), जिसे मई 2017 में सभी 194 सदस्य देशों ने अपनाया था, डिमेंशिया को सार्वजनिक स्वास्थ्य प्राथमिकता मानते हुए जागरूकता, जोखिम में कमी, निदान-उपचार-देखभाल, देखभालकर्ताओं के समर्थन और शोध जैसे 7 क्षेत्रों पर काम करने का लक्ष्य तय करती है।

ADI, जो दुनियाभर के 100 से अधिक अल्जाइमर संगठनों का वैश्विक महासंघ है और WHO के साथ आधिकारिक संबंध में काम करता है। हर साल सितंबर में जागरूकता माह के तहत सोशल मीडिया अभियान, पोस्टर और सूचना सामग्री जारी करता है ताकि कलंक और भेदभाव को कम किया जा सके। विशेषज्ञों का मानना है कि जागरूकता ही इस बीमारी से निपटने का सबसे कारगर पहला कदम है।