Patrika+

आर्थिक तंगी और मानसिक स्वास्थ्य से बिगड़ा रिश्तों का तानाबाना, जानें क्यों बन रहे हैं अपने ही प्रियजनों की जान के दुश्मन

क्या आपने कभी सोचा है कि एक परिवार के भीतर का तनाव कितनी भयावहता को जन्म दे सकता है?मुंबई से एक ऐसा ही मामला सामने आया है। भारतीय नौसेना के एक नाविक ने कथित तौर पर जून में 15 दिनों की पितृत्व अवकाश (Parental Leave) ली थी, लेकिन इसके बाद वह ड्यूटी पर वापस नहीं लौटा। उसने अपने दो बच्चों और पत्नी की हत्या के बाद आत्महत्या कर लिया। आइए ऐसी ही कुछ घटनाएं जहां रिश्तों में प्यार की जगह नफरत ने ले ली हो, उसके बारे में विस्तार से समझते हैं।
4 min read
Aug 18, 2026
Suicide Cases in India
भारत में परिवार के लोगों की हत्या के मामले बढ़ रहे हैं (Representative Image : ChatGpt)

पुलिस के अनुसार, मुंबई स्थित अपने घर में पत्नी और दो बच्चों की कथित हत्या करने के बाद भारतीय नौसेना के नाविक ने खुद आत्महत्या कर ली। नौसेना का जवान 15 दिनों के पितृत्व अवकाश पर घर आया हुआ था। जांचकर्ताओं की नजर नाविक और उसके भाई-बहनों के बीच चल रहे संपत्ति और पैसों से जुड़े विवादों पर भी है। पुलिस को आशंका है कि इन विवादों ने उसकी मानसिक स्थिति पर असर डाला होगा और संभवतः उसके अवसाद को बढ़ाया होगा। पुलिस ने बताया कि नाविक अवसाद की दवाएं भी ले रहा था।

भारतीय नौसेना के नाविक पूर्णमल मेहरा मृत मिले

यह घटना 15 अगस्त को सामने आई, जब कफ परेड पुलिस को नेवी नगर स्थित एक घर में एक व्यक्ति के फांसी लगाने की सूचना मिली। पुलिस की टीम मौके पर पहुंची तो भारतीय नौसेना के नाविक पूर्णमल मेहरा मृत मिले। उनकी पत्नी ओमा, तीन साल के बेटे यश और दो महीने के बच्चे को भी बिस्तर पर अचेत अवस्था में पाया गया। प्रारंभिक जांच में पुलिस को आशंका है कि नाविक ने पत्नी और दोनों बच्चों की हत्या करने के बाद खुदकुशी की।

मोरेना में पति ने पत्नी और दो बेटों की कुल्हाड़ी से हत्या कर दी

मोरेना, मध्य प्रदेश (27 जून 2026): मोरेना जिले के किशनपुर गांव में बलराम कुशवाहा ने अपनी पत्नी रविता और दो छोटे बेटों की कुल्हाड़ी से हत्या करने के बाद रेलवे ट्रैक पर जाकर ट्रेन के आगे कूदकर आत्महत्या कर ली। प्रारंभिक जांच से पता चला कि यह घरेलू कलह का परिणाम था, जो पत्नी के धार्मिक कार्यक्रम में नृत्य करने के बाद बढ़ गया था। पुलिस ने पोस्टमॉर्टम कराया है और गवाहों व फोरेंसिक साक्ष्यों के आधार पर जांच जारी है।

दुर्ग, छत्तीसगढ़ (22 मई 2026): दुर्ग जिले में एक दंपती ने पारिवारिक विवाद के चलते अपने दो नाबालिग बच्चों की हत्या कर आत्महत्या कर ली। गोविंद साहू (45) और उनकी पत्नी चंचल (40) को फांसी पर लटका पाया गया, जबकि उनकी बेटी (13) और बेटा (11) मृत अवस्था में बिस्तर पर मिले। प्रारंभिक जांच में पत्नी द्वारा लिखे गए कथित नोट में पारिवारिक विवाद का उल्लेख था।

बेंगलुरु ग्रामीण, कर्नाटक (सितंबर 2025): एक दंपती ने बढ़ती आर्थिक कठिनाइयों के चलते अपने दो बच्चों को गला घोंटकर मार डाला और आत्महत्या का प्रयास किया। पति शिवा कुमार (32) ने फांसी लगाकर जान दे दी, जबकि पत्नी मंजुला बच गई और उसे गिरफ्तार कर लिया गया।

क्या कहते हैं शोध और आंकड़े

गुजरात, जामनगर (2000–2004): जर्नल ऑफ फॉरेंसिक एंड लीगल मेडिसिन में प्रकाशित एक अध्ययन के अनुसार, पांच वर्षों में 179 हत्याओं में से 8 मामले ‘मर्डर–सुसाइड’ के थे, जिनमें 13 बच्चों की हत्या की गई और सभी मामलों में आरोपी माताएं थीं। पीड़ित बच्चों की उम्र 6 महीने से 7 वर्ष तक थी।

भारत (2014): इंडियन जर्नल ऑफ फॉरेंसिक मेडिसिन एंड टॉक्सिकोलॉजी में प्रकाशित एक अध्ययन के अनुसार, 2014 में एनसीआरबी के आंकड़ों के अनुसार 4,358 हत्या के मामलों में से 72 मामले मर्डर–सुसाइड से संबंधित थे। इनमें 91.66% आरोपी पुरुष थे। प्रमुख कारण घरेलू कलह, वित्तीय तनाव, कर्ज और मानसिक तनाव थे।

दक्षिण भारत (2007–2021): एक दक्षिण भारतीय टर्शियरी केयर सेंटर के अध्ययन में पाया गया कि 15 वर्षों में 43 बाल हत्याओं में 74.4% मामलों में परिवार के सदस्य ही आरोपी थे। सबसे अधिक प्रभावित आयु 1–5 वर्ष थी। प्रमुख मृत्यु के कारण थे दम घुटना (अस्फिक्सिया), यांत्रिक चोटें और जलना।

केरल (2000): केरल के चार जिलों में हुई 32 पारिवारिक आत्महत्याओं में कुल 99 लोग मारे गए। इनमें अधिकांश मामले जहर खाने, डूबने, जलने और फांसी से जुड़े थे। आधे मामलों में सुसाइड नोट मिला। मुख्य कारण आर्थिक संकट था।

एक केस रिपोर्ट (हरियाणा): एक मां ने अपने बेटे को तकिए से दम घोंटकर मारने के बाद स्वयं आत्महत्या कर ली। फोरेंसिक जांच और सुसाइड नोट से मानसिक स्थिति की जानकारी मिली।

क्या यह समझने में मदद करता है?

इन मामलों से स्पष्ट होता है कि परिवार के भीतर तनाव, आर्थिक दबाव, मानसिक स्वास्थ्य समस्याएं और घरेलू कलह अक्सर ऐसे दुखद निर्णयों के पीछे होते हैं। शोध बताते हैं -

  • अधिकांश मामलों में आरोपी पुरुष होते हैं (जैसे 2014 का एनसीआरबी डेटा)।
  • बच्चों की उम्र प्रायः बहुत कम होती है (जामनगर अध्ययन, दक्षिण भारत का डेटा)।
  • घरेलू कलह, कर्ज, तनाव और मानसिक बीमारी प्रमुख प्रेरक कारण होते हैं।
  • आत्महत्या से पूर्व हत्या करने वाले मामलों में अक्सर सुसाइड नोट या मानसिक असंतुलन के संकेत मिलते हैं।

क्या इससे कुछ सीख मिलती है?

यह समझना आवश्यक है कि ये घटनाएं केवल अपराध नहीं, बल्कि सामाजिक और मानसिक संकट का परिणाम होती हैं। इसलिए

  • घरेलू कलह, तनाव और कर्ज जैसी समस्याओं को हल करने के लिए समय रहते सहायता लेना आवश्यक है।
  • मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच बढ़ानी चाहिए, विशेषकर ग्रामीण और कम संसाधन वाले क्षेत्रों में।
  • परिवार और समाज को इस प्रकार के संकेतों (जैसे आत्महत्या की बातें, तनाव, असामान्य व्यवहार) को गंभीरता से लेना चाहिए।
  • पुलिस और फोरेंसिक जांच में सुधार से इन मामलों की सही पहचान और रोकथाम संभव हो सकती है।

आगे क्या कदम हो सकते हैं?

सरकारी और गैर-सरकारी संस्थाओं को मिलकर:

  • घरेलू कलह और मानसिक स्वास्थ्य पर जागरूकता अभियान चलाने चाहिए।
  • प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में मानसिक स्वास्थ्य काउंसलिंग उपलब्ध करानी चाहिए।
  • एनसीआरबी जैसे संस्थानों को पारिवारिक आत्महत्या और मर्डर–सुसाइड के आंकड़ों को नियमित रूप से प्रकाशित करना चाहिए, ताकि नीति निर्माता और समाज बेहतर समझ सकें।

इन दुखद घटनाओं का सामना करना आसान नहीं है, लेकिन तथ्यात्मक समझ और समय पर हस्तक्षेप से भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने में सहायता मिल सकती है।

Updated on:
18 Aug 2026 12:07 pm
Published on:
18 Aug 2026 12:07 pm