
चीन के हांगझोऊ शहर में अब ट्रैफिक व्यवस्था संभालने में इंसानी पुलिसकर्मियों के साथ रोबोट भी तैनात किए गए हैं। ये रोबोट सड़कों और चौराहों पर ट्रैफिक नियमों की निगरानी करने के साथ-साथ नियम तोड़ने वाले वाहन चालकों और पैदल यात्रियों को मौके पर ही चेतावनी देते हैं। चीन में इस प्रयोग को शहरी यातायात प्रबंधन में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और रोबोटिक्स के बढ़ते इस्तेमाल की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है।
हांगझोऊ में तैनात इन रोबोटों को 'SUPCON Information' कंपनी ने विकसित किया है। कंपनी के अनुसार, मई 2026 से शहर में 15 ट्रैफिक मैनेजमेंट रोबोट काम कर रहे हैं। कंपनी का दावा है कि इन रोबोटों ने अब तक 1.70 लाख से अधिक बार गैर-मोटर चालित वाहनों और पैदल यात्रियों को नियमों के उल्लंघन पर चेतावनी दी है। आधिकारिक हांगझोऊ सूचना पोर्टल के मुताबिक, इन रोबोटों को वेस्ट लेक क्षेत्र, ह्यूबिन बिजनेस एरिया और शहर की प्रमुख सड़कों के महत्वपूर्ण चौराहों पर तैनात किया गया है।
ट्रैफिक व्यवस्था संभाल रहे रोबोट का प्रमुख काम पुलिस के उन दोहराए जाने वाले कार्यों को संभालना है, जिनमें पुलिसकर्मियों को लंबे समय तक चौराहों पर निगरानी करनी पड़ती है। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, इन रोबोटों में कैमरे, रडार और ऑनबोर्ड कंप्यूटिंग सिस्टम लगाए गए हैं। इनकी मदद से ये सड़क पर होने वाली कुछ सामान्य यातायात गलतियों को पहचान सकते हैं। इनमें ई-बाइक चलाते समय हेलमेट नहीं पहनना, ई-बाइक पर यात्री बैठाना, स्टॉप लाइन पार करके वाहन रोकना और लाल बत्ती पर पैदल यात्री का सड़क पार करना शामिल है।
रोबोट बनाने वाली कंपनी 'SUPCON' के अनुसार, रोबोट की नियमों का उल्लंघन पहचानने की क्षमता 95 प्रतिशत से अधिक है। कंपनी की आधिकारिक जानकारी में कुछ विशेष गैर-मोटर वाहन और पैदल यात्री उल्लंघनों के लिए पहचान विश्लेषण की सटीकता 90 प्रतिशत से अधिक बताई गई है। इसलिए 95 प्रतिशत का आंकड़ा कंपनी का दावा है, जिसे स्वतंत्र रूप से सत्यापित आंकड़ा नहीं माना जाना चाहिए।
सड़कों पर तैनात T2 रोबोट की ऊंचाई करीब 1.88 मीटर यानी लगभग 6 फीट 2 इंच है और इसका वजन करीब 98 किलोग्राम है। यह पहियों वाले मोबाइल चेसिस पर चलता है। इसका डिजाइन हांगझोऊ ट्रैफिक पुलिस की वर्दी से प्रेरित है। यह सड़क पर दूर से भी आसानी से नजर आ जाता है। रोबोट 4 पहियों वाले मोबाइल प्लेटफॉर्म पर चलता है और इसे ट्रैफिक पुलिस के साथ मिलकर काम करने के लिए तैयार किया गया है।
इन रोबोटों को सिर्फ निगरानी के लिए ही नहीं बनाया गया है। वे लोगों को रास्ते, पार्किंग और ट्रैफिक नियमों से जुड़ी जानकारी भी दे सकते हैं। किसी आपात स्थिति में इनका सिस्टम व्यक्ति को स्थानीय पुलिस से जोड़ने में भी सक्षम है। इस तरह इन्हें एक तरह के स्मार्ट ट्रैफिक असिस्टेंट के रूप में भी इस्तेमाल किया जा रहा है।
इन रोबोटों की एक खासियत उनका मैकेनिकल आर्म सिस्टम है। इनके हाथ ट्रैफिक पुलिस द्वारा इस्तेमाल किए जाने वाले संकेतों की नकल कर सकते हैं। रोबोट ट्रैफिक सिग्नल के साथ तालमेल बनाते हुए अपने हाथों से दिशा संबंधी संकेत देता है। इसका उद्देश्य केवल तकनीकी प्रदर्शन करना नहीं, बल्कि चौराहे पर मौजूद वाहन चालकों और पैदल यात्रियों को स्पष्ट संकेत देकर यातायात को व्यवस्थित करना है।
चीन की सरकारी समाचार एजेंसी शिन्हुआ की रिपोर्ट के अनुसार, 1 मई से हांगझोऊ में 15 'हांगझोउ स्मार्ट ट्रैफिक' रोबोटों ने काम शुरू किया था। इन्हें शहर के प्रमुख इलाकों में मानव ट्रैफिक पुलिस के साथ मिलकर काम करने के लिए तैनात किया गया। ये जरूरत के अनुसार लोगों को आवाज के जरिए चेतावनी भी देते हैं।
ये रोबोट सामान्य तौर पर सुबह 7 बजे से शाम 6 बजे तक तय स्थानों पर काम करते हैं और केंद्रीय प्लेटफॉर्म के जरिए इनकी निगरानी की जाती है। कंपनी ने इन्हें पर्यटक इलाकों, स्कूल जोन, बिजनेस डिस्ट्रिक्ट, पीक ट्रैफिक और खराब मौसम जैसी अलग-अलग परिस्थितियों में हजारों घंटे परीक्षण करने की बात कही है। हालांकि, तेज धूप, बारिश और अत्यधिक तापमान जैसी परिस्थितियां कैमरों और रडार की क्षमता को प्रभावित कर सकती हैं।
रोबोट बनाने वाली कंपनी 'SUPCON' के अनुसार, मई में तैनाती के बाद 15 रोबोट करीब 5,200 घंटे से अधिक ड्यूटी कर चुके हैं। इस दौरान 1.70 लाख से अधिक गैर-मोटर वाहन और पैदल यात्री उल्लंघनों पर चेतावनी, 500 घंटे से ज्यादा ट्रैफिक डायरेक्शन और 8,000 से ज्यादा नागरिक सुविधा सेवाएं दी गईं।
रोबोटों की सबसे महत्वपूर्ण सीमा यह है कि इनके पास पुलिसकर्मी जैसी गिरफ्तारी या दंड देने की शक्ति नहीं है। इनका उद्देश्य नियम तोड़ने वालों को पकड़ना या सजा देना नहीं, बल्कि गलती के समय ही उन्हें चेतावनी देकर व्यवहार सुधारने में मदद करना है। पुलिस कार्रवाई और कानून लागू करने की जिम्मेदारी इंसानी अधिकारियों के पास ही रहती है। SUPCON कंपनी का कहना है कि रोबोटों की तैनाती के बाद हेलमेट के बिना ई-बाइक चलाने और स्टॉप लाइन पार करने जैसे कुछ उल्लंघनों में मासिक स्तर पर 40 प्रतिशत से अधिक कमी देखी गई है।
हांगझोऊ का प्रयोग अब केवल एक शहर तक सीमित रहने की संभावना नहीं है। SUPCON ने बताया है कि ऐसे करीब 50 रोबोट चीन के आठ शहरों और 3 प्रांतों में काम कर रहे हैं और वर्ष के अंत तक इनकी संख्या करीब 200 तक पहुंचाने की उम्मीद है। इससे संकेत मिलता है कि चीन शहरी प्रबंधन में रोबोटों के इस्तेमाल को प्रयोग से आगे बढ़ाकर बड़े स्तर पर लागू करने की दिशा में बढ़ रहा है।
विशेषज्ञों ने रोबोट के इस्तेमाल को लेकर कुछ चुनौतियां बताई हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि अलग-अलग मौसम और सड़क परिस्थितियों में सेंसर की विश्वसनीयता, तकनीकी खराबी, डेटा सुरक्षा और मानव पुलिस व्यवस्था के साथ तालमेल जैसे सवालों का समाधान जरूरी होगा। इसके बावजूद हांगझोऊ का यह प्रयोग दिखाता है कि AI और रोबोटिक्स अब केवल फैक्ट्रियों या प्रयोगशालाओं तक सीमित नहीं हैं। आने वाले समय में इनका इस्तेमाल शहरों की ट्रैफिक व्यवस्था, नागरिक सहायता और सार्वजनिक सेवाओं में और बढ़ सकता है।