
गेंदे की खेती। (सांकेतिक इमेजः एआई)
यह लेख युवा और सक्रिय किसान साथियों के लिए है, जो कम लागत में अच्छी आमदनी की तलाश में हैं। गेंदे (मैरीगोल्ड) की खेती ने कई स्थानों पर अपनी अच्छी आमदनी देकर किसानों का ध्यान आकर्षित किया है। आइए जानते हैं कि सीमित निवेश में यह खेती लाभ का मार्ग कैसे खोल सकती है और इस खेती को करते समय किन बातों का ध्यान रखें।
मध्य प्रदेश के सीधी जिले के किसान रवि सिंह ने पारंपरिक खेती छोड़कर गेंदे की खेती अपनाई। उन्होंने एक बीघा में केवल 7–8 हजार रुपये खर्च कर यह फसल लगाई और उससे 1 लाख से सवा लाख रुपये तक की आमदनी प्राप्त की। यह दिखाता है कि सीमित निवेश में भी गेंदे की खेती से सात गुना या उससे अधिक लाभ संभव है।
बिहार के जहानाबाद में एक किसान ने एक एकड़ में लगभग 40 हजार रुपये खर्च कर गेंदे की खेती की। यदि बाजार भाव अच्छा रहा, तो इस निवेश से 1 लाख रुपये तक की आमदनी हो सकती है। यह उदाहरण दिखाता है कि सही देखभाल और समय पर बिक्री से मुनाफा दोगुना या उससे भी अधिक हो सकता है।
हरियाणा के करनाल जिले में 2020–21 के एक अध्ययन में पाया गया कि एक हेक्टेयर पर कुल लागत लगभग ₹1,83,411 थी और सकल आमदनी ₹4,62,250 रही, जिससे शुद्ध लाभ ₹2,78,839 हुआ। लाभ-लागत अनुपात (Benefit-Cost रेशियो) 2.52 रहा, जो खेती की लाभप्रदता को बताता है।
उत्तरी कर्नाटक में एक अध्ययन में प्रतिहेक्टेयर लागत ₹66,942.55 और शुद्ध लाभ ₹88,111.98 पाया गया, जबकि अनुबंध खेती (Contract Farming) में लाभ कम था।
कर्नाटक के बेलगावी जिले में एक अन्य अध्ययन में प्रति एकड़ लागत ₹41,664.24, सकल आमदनी ₹81,736.67 और शुद्ध लाभ ₹40,072.43 पाया गया, लाभ-लागत अनुपात लगभग 1.96 रहा।
जनवरी 2026 में प्रकाशित एक समीक्षा में बताया गया कि मल्टी-लेयर्ड (बहु-स्तरीय) खेती से प्रति हेक्टेयर उत्पादन 2.5–3.2 गुना तक बढ़ सकता है। लागत-लाभ अनुपात 1:2.43 से 1:2.87 तक पाया गया, और शुद्ध मुनाफा ₹1.8 लाख से ₹3.4 लाख प्रति हेक्टेयर तक हो सकता है। यह तकनीक सीमित भूमि में अधिक उत्पादन और बेहतर मुनाफा दिला सकती है।
गेंदे की खेती की विशेषता यह है कि इसकी मांग वर्षभर बनी रहती है, लेकिन त्योहारों और धार्मिक आयोजनों में यह और बढ़ जाती है। इसके अलावा, यह फसल कम देखभाल में तैयार हो जाती है और इसमें बीमारियों का प्रकोप भी कम होता है।
कुछ किस्में जैसे अर्का भानु (F1) में लंबे तने, घनी पंखुड़ियां और लंबा शेल्फ लाइफ होता है, जिससे यह माला, सजावट और कट-फ्लावर बाजार में लोकप्रिय है। इसकी कीमत ₹130–200 प्रति किलो तक मिलती है और माला बनाने में भी अच्छा रिटर्न मिलता है।
- मंडी भाव में उतार-चढ़ाव हो सकता है। सही समय पर कटाई और बिक्री आवश्यक है।
- कुछ बीमारियां जैसे पत्ती छेदक या तना छेदक फसल को प्रभावित कर सकती हैं, सावधानी और समय पर उपचार जरूरी है।
- उन्नत तकनीक अपनाने से पहले लागत और लाभ का संतुलन समझें, बड़े निवेश से पहले स्थानीय कृषि विभाग या कृषि विज्ञान केंद्र से सलाह लें।
Updated on:
21 Aug 2026 08:59 pm
Published on:
21 Aug 2026 08:59 pm
