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महिलाओं के लिए करियर की नई चुनौतियां और अवसर; जानें गांव से शहर तक का सफर कितना कठिन?

आपने कभी सोचा है कि गांव की तंग गलियों से निकलकर शहर की चमक में कदम रखने वाली युवा महिलाओं को क्या-क्या चुनौतियों का सामना करना पड़ता है? इस सफर में न केवल करियर के नए द्वार खुलते हैं, बल्कि खुद को साबित करने का एक अनोखा मौका भी मिलता है।
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भारत

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Vinay Shakya

Aug 21, 2026

New career challenges for women

सांकेतिक इमेज (सोर्स-ChatGpt)

महिलाएं गांव की सीमाओं को पार करके शहर की ओर कदम बढ़ाती हैं, तो उनके सामने सिर्फ नई नौकरी नहीं, बल्कि एक पूरी दुनिया बदल जाती है। यह बदलाव सिर्फ भौगोलिक नहीं, बल्कि सामाजिक, आर्थिक और मानसिक स्तर पर भी होता है। इस सफर में महिलाओं के सामने आने वाली चुनौतियों, नए अवसर और कौन-कौन सी समस्याओं का सामना करना पड़ता है, आइए जानते हैं।

ग्रामीण और शहरी श्रम भागीदारी

राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (NSO) के 2019–20 के PLFS (Periodic Labour Force Survey) के अनुसार, ग्रामीण महिलाओं की श्रम भागीदारी दर 24.0% थी। वहीं, शहरी महिलाओं की यह भागीदारी केवल 16.8% थी। यह अंतर बताता है कि गांव में महिलाएं पारंपरिक कृषि, घरेलू उद्योग या अनौपचारिक कामों में अधिक शामिल हैं, जबकि शहर में उनकी भागीदारी अपेक्षाकृत कम है।

शहरी अवसर और चुनौतियां

शहरों में IT, स्टार्टअप, निजी क्षेत्र और सेवा उद्योग में रोजगार के विकल्प अधिक हैं। हालांकि, यह अवसर हमेशा सहज नहीं होते। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, ग्रामीण महिलाओं को कौशल की कमी, सामाजिक मान्यताएं, पारिवारिक अपेक्षाएं, सीमित गतिशीलता और औपचारिक कार्यस्थलों का अनुभव न होना जैसी बाधाओं का सामना करना पड़ता है।

ग्रामीण और शहरी महिलाओं की कार्यशैली

एक अध्ययन में पाया गया कि ग्रामीण महिलाएं अक्सर आर्थिक जरूरत या पारिवारिक दबाव के कारण काम करती हैं, जबकि शहरी महिलाएं आत्म-संतुष्टि, करियर विकास और वित्तीय स्वतंत्रता जैसी वजहों से काम में शामिल होती हैं। यह अंतर यह भी दर्शाता है कि शहरी महिलाएं काम को व्यक्तिगत विकास का माध्यम मानती हैं, जबकि ग्रामीण महिलाएं इसे परिवार की आर्थिक जरूरत से जोड़ती हैं।

समय की लचक और बाल देखभाल

एक अध्ययन के अनुसार, ग्रामीण महिलाओं के लिए काम और देखभाल जिम्मेदारियां एक साथ निभाना आसान होता है, क्योंकि उन्हें समय और स्थान की अधिक लचीलापन मिलता है। शहरी कामकाजी माहौल में यह लचीलापन कम होता है। जिससे मातृत्व और करियर को संतुलित करना मुश्किल हो जाता है।

सहज शुरुआत के लिए कौशल और मार्गदर्शन

शहरी नौकरी की तैयारी में कौशल प्रशिक्षण महत्वपूर्ण है, लेकिन उससे भी जरूरी है- परिवार और समुदाय का समर्थन। प्रशिक्षण के साथ-साथ पारिवारिक बातचीत, सामाजिक मान्यताओं को बदलना और काम के माहौल से परिचय कराना भी जरूरी है।

समर्थन नेटवर्क और मेंटरशिप

शहरी माहौल में अकेले कदम रखने वाली ग्रामीण महिलाएं अक्सर असहाय महसूस करती हैं। इसलिए स्थानीय महिला समूह, NGO या मेंटरशिप प्रोग्राम उन्हें आत्मविश्वास और मार्गदर्शन दे सकते हैं।

लचीले कार्य विकल्प और सुविधाएं

शहरी नियोक्ताओं को लचीले समय, वर्क-फ्रॉम-होम विकल्प और संस्थागत बाल देखभाल सुविधाएं प्रदान करनी चाहिए। इससे मातृत्व और करियर दोनों को संतुलित करना आसान होगा।

नीतिगत समर्थन और जागरूकता

गांव से शहर तक का सफर महिलाओं के लिए सिर्फ रोजगार का रास्ता नहीं, बल्कि आत्मनिर्भरता, पहचान और सामाजिक बदलाव का अवसर है। यह सफर आसान नहीं, लेकिन संभव है। जब कौशल, समर्थन, लचीलापन और नीतिगत मदद साथ हो, तो हर महिला के लिए यह एक नई शुरुआत हो सकती है।

सरकारी और गैर-सरकारी संस्थाओं को ग्रामीण से शहरी स्थानांतरण के दौरान महिलाओं की चुनौतियों को समझकर नीतियां बनानी चाहिए। जैसे कि सुरक्षित आवास, परिवहन, कौशल प्रशिक्षण और रोजगार के अवसर। ICRIER की I-JOT रिपोर्ट बताती है कि ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में रोजगार में वृद्धि हुई है, लेकिन ग्रामीण क्षेत्रों में गति धीमी हुई है और युवाओं में बेरोजगारी एक बड़ी चुनौती बनी हुई है।