
सऊदी अरब की रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण ईस्ट-वेस्ट क्रूड ऑयल पाइपलाइन (पेट्रोलाइन) 10-11 सितंबर 2026 को इराक से लॉन्च किए गए ड्रोन हमलों से क्षतिग्रस्त होने के बाद बंद पड़ी है। सऊदी ऊर्जा मंत्रालय और विदेश मंत्रालय के अनुसार, यह पाइपलाइन एहतियातन बंद कर दी गई है।
सऊदी के इस पाइपलाइन से रोजाना करीब 40 से 50 लाख बैरल तेल रेड सी के यानबू बंदरगाह तक पहुंचाया जाता था, जो वैश्विक तेल आपूर्ति का लगभग 4 से 5 प्रतिशत हिस्सा है। होर्मुज जलडमरूमध्य में जारी व्यवधानों के बीच यह रूट सऊदी अरब के लिए वैकल्पिक निर्यात मार्ग बन चुका था।
रियाद ने अब तक नुकसान की सटीक सीमा या मरम्मत का आधिकारिक समय नहीं बताया है। उद्योग सूत्रों और रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, यानबू बंदरगाह पर निर्यात जारी रखने के लिए मात्र 5-7 दिन का भंडार बचा है। यानबू की भंडारण क्षमता करीब 3.5 करोड़ बैरल है, जबकि मिस्र के ऐन सुखना और सिदी केरिर बंदरगाहों पर क्रमशः 1.8 करोड़ और 2 करोड़ बैरल क्षमता है, लेकिन ये भंडार पूरी तरह भरे नहीं हैं।
कुछ सूत्रों का कहना है कि मरम्मत में पांच से छह हफ्ते लग सकते हैं, जबकि अमेरिका के ऊर्जा सचिव क्रिस राइट ने कहा कि यह कुछ दिनों में आंशिक रूप से फिर शुरू हो सकती है। सैटेलाइट इमेजरी में पंपिंग स्टेशनों पर आग और नुकसान के निशान दिखे हैं।
पाइपलाइन पर हुआ यह हमला ईरान-अमेरिका संघर्ष और होर्मुज जलडमरूमध्य की प्रभावी बंदिश के संदर्भ में हुआ है। सऊदी विदेश मंत्रालय ने इराक से आए ड्रोनों की निंदा की है। इराकी प्रधानमंत्री के अनुरोध पर फिलहाल जवाबी कार्रवाई से परहेज किया है। इराक ने मयसान प्रांत के कमांडर को बर्खास्त कर जांच शुरू की है। कोई समूह आधिकारिक रूप से जिम्मेदारी नहीं ले रहा है। हालांकि अमेरिका के राष्ट्रपति ने ईरान की संभावित भूमिका का संकेत दिया है।
यमन के हूती विद्रोहियों ने भी दबाव बढ़ाया है। उन्होंने नजरान समेत सऊदी सैन्य ठिकानों पर मिसाइल-ड्रोन हमलों का दावा किया है। यमन की सरकारी सेना के अनुसार, पिछले एक महीने में हूतियों से लड़ाई में 500 से अधिक सैनिक मारे गए। इसके साथ ही करीब 1,500 घायल हुए, जबकि हूतियों के 1,000 से ज्यादा लड़ाके मारे गए। हूतियों ने रेड सी तट पर रणनीतिक क्षेत्रों पर कब्जा कर बाब अल-मंदब जलडमरूमध्य को और खतरे में डाल दिया है।
अमेरिका ने सऊदी अरब को खुफिया सहयोग दिया है, लेकिन प्रत्यक्ष सैन्य हस्तक्षेप से बचा है। पाकिस्तान-तुर्किए के साथ हुए मक्का समझौते का भी सैन्य मदद के रूप में लाभ नहीं मिला, क्योंकि पाकिस्तान ने स्पष्ट किया कि हूती जैसे संगठनों के हमलों पर सैन्य सहायता शामिल नहीं थी। अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी के अनुसार, इस साल वैश्विक तेल आपूर्ति में पहले से ही करोड़ों बैरल की गिरावट का अनुमान है। अगस्त में सऊदी उत्पादन घटकर करीब 62 लाख बैरल प्रतिदिन रह गया, जो युद्ध से पहले के स्तर से काफी कम है। आईईए ने सऊदी आपूर्ति को दशकों के निचले स्तर पर बताया है।
ब्रेंट क्रूड की कीमतें 108-109 डॉलर प्रति बैरल के आसपास पहुंच गई हैं, जो हाल के उच्च स्तरों में शामिल हैं। भारतीय विदेश व्यापार संस्थान के पूर्व वाइस चांसलर राकेश जोशी के अनुसार, मिडिल ईस्ट संघर्ष के बाद से कच्चे तेल की कीमतें बढ़ रही हैं। सऊदी पाइपलाइन बंद होने से वैश्विक कीमतों में और उछाल आ सकता है। सऊदी अरब भारत का प्रमुख तेल आपूर्तिकर्ता है। पहली तिमाही में भारत ने सऊदी से कुल आयात का करीब 16 प्रतिशत तेल खरीदा। आपूर्ति बाधित होने और ग्लोबल प्राइस बढ़ने से भारत में पेट्रोल-डीजल की कीमतें प्रभावित हो सकती हैं, जिससे महंगाई और परिवहन लागत बढ़ेगी।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि पाइपलाइन लंबे समय तक बंद रही तो एशियाई बाजारों, खासकर भारत, चीन और जापान पर दबाव बढ़ेगा। सऊदी अरामको ने पहले ही कुछ यूरोपीय कार्गो रद्द या विलंबित किए हैं। वैश्विक स्तर पर तेल आपूर्ति का यह संकट मुद्रास्फीति को और बढ़ा सकता है।
सऊदी अरब और अंतरराष्ट्रीय समुदाय मरम्मत और वैकल्पिक रूटों पर काम कर रहे हैं, लेकिन होर्मुज और रेड सी दोनों तरफ के खतरों के बीच स्थिति तनावपूर्ण बनी हुई है। आगे की घटनाएं वैश्विक ऊर्जा बाजार और भारत की अर्थव्यवस्था दोनों के लिए निर्णायक साबित हो सकती हैं।