
सांकेतिक इमेज (सोर्स- Chatgpt)
न्यूजीलैंड की संसद ने बुधवार को भारत के साथ हुए फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) को लागू करने वाले कानून को भारी बहुमत से मंजूरी दे दी। संसद में 93 वोट पक्ष में और 29 वोट विरोध में पड़े। इस ऐतिहासिक फैसले के बाद दोनों देशों के बीच व्यापारिक रिश्ते नई ऊंचाई पर पहुंचने वाले हैं।
न्यूजीलैंड के प्रधानमंत्री क्रिस्टोफर लक्सन ने दोनों देशों के बीच हुए FTA की उपलब्धि पर खुशी जाहिर की है। PM लक्सन ने कहा कि इससे बड़ी संख्या में नौकरियां पैदा होंगी और दोनों देशों के द्विपक्षीय व्यापार को मजबूत बढ़ावा मिलेगा। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ पर पोस्ट करते हुए PM लक्सन ने लिखा- लोगों ने मुझसे कहा था कि भारत के साथ फ्री ट्रेड एग्रीमेंट मुमकिन नहीं है, लेकिन आज उस समझौते को संसद से मंजूरी मिल गई है। उन्होंने आगे कहा कि नेशनल पार्टी ने अपने पहले कार्यकाल में भारत के साथ एफटीए करने का वादा किया था और उन्होंने उसे पूरा करके दिखाया है।
न्यूजीलैंड-भारत फ्री ट्रेड एग्रीमेंट दोनों देशों के बीच एक व्यापक व्यापार समझौता है, जिसका उद्देश्य शुल्क बाधाओं को कम करना, बाजार पहुंच बढ़ाना और आर्थिक सहयोग को मजबूत करना है। यह समझौता अप्रैल 2026 में नई दिल्ली में हस्ताक्षरित हुआ था। इसमें वस्तुओं के व्यापार के साथ-साथ सेवाओं, निवेश, शिक्षा, पर्यटन और पेशेवर आवाजाही जैसे क्षेत्रों को भी शामिल किया गया है। न्यूजीलैंड की तरफ से भारतीय उत्पादों को लगभग 100 प्रतिशत ड्यूटी-फ्री पहुंच देने का प्रावधान है, जबकि भारत की तरफ से न्यूजीलैंड के अधिकांश निर्यात पर शुल्क कटौती या समाप्ति का इंतजाम है।
समझौते में सीमा शुल्क प्रक्रियाओं को सरल बनाने, निवेश बढ़ाने (न्यूजीलैंड की तरफ से 15 साल में 20 अरब डॉलर के निवेश की प्रतिबद्धता) और स्किल्ड प्रोफेशनल्स के लिए अवसर बढ़ाने जैसे प्रावधान भी शामिल हैं। यह दोनों देशों के लिए ‘जनरेशन में एक बार’ वाला समझौता माना जा रहा है।
न्यूजीलैंड के प्रधानमंत्री क्रिस्टोफर लक्सन के अनुसार, इस अहम समझौते का मतलब है कि न्यूजीलैंड के लोगों के लिए ज्यादा नौकरियां और ज्यादा आमदनी होगी। 1.4 अरब भारतीय ग्राहकों तक पहुंचने का रास्ता खुलने से भारत में न्यूजीलैंड के अधिक उत्पाद बिकेंगे। यह अर्थव्यवस्था को आगे बढ़ाने और नागरिकों को तरक्की में मदद करने का एक महत्वपूर्ण तरीका है। न्यूजीलैंड के व्यापार और निवेश मंत्री टॉड मैक्ले ने संसद की मंजूरी का स्वागत करते हुए कहा कि जब यह समझौता लागू होगा, तो भारत को होने वाले न्यूजीलैंड के 57 प्रतिशत निर्यात पर कोई शुल्क नहीं लगेगा।
पूरी तरह नियम लागू होने पर 95 प्रतिशत निर्यात पर शुल्क हटा दिए जाएंगे या काफी कम कर दिए जाएंगे। मैक्ले ने बताया कि इससे सीमा पर तेजी से क्लीयरेंस मिलेगी और भारत के बढ़ते मध्यम वर्ग तक बेहतर पहुंच सुनिश्चित होगी। यह वर्ग भोजन, टेक्नोलॉजी, शिक्षा, पर्यटन, प्रोफेशनल सेवाओं और अन्य उत्पादों की मांग बढ़ा रहा है। उन्होंने याद दिलाया कि दोनों देशों के बीच बातचीत की घोषणा मार्च 2025 में की गई थी और सरकार को उम्मीद है कि यह समझौता इस साल के अंत तक लागू हो जाएगा।
इस समझौते से दोनों देशों को कई क्षेत्रों में फायदा होने की उम्मीद है। न्यूजीलैंड के लिए सबसे बड़ा लाभ 1.4 अरब की भारतीय आबादी और बढ़ते मध्यम वर्ग तक सीधी पहुंच है। कीवीफ्रूट, ऊन, मांस, लकड़ी, समुद्री उत्पाद, शहद और औद्योगिक सामान जैसे निर्यात पर शुल्क कम होने से निर्यातकों की लागत घटेगी और प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी। केवल कीवीफ्रूट उद्योग को पांच साल में लगभग 125 मिलियन डॉलर के शुल्क बचत की उम्मीद है। इससे स्थानीय स्तर पर रोजगार और आय में वृद्धि होगी।भारत के लिए भी यह समझौता लाभकारी है।
भारतीय कपड़ा, चमड़ा, फुटवियर, इंजीनियरिंग उत्पाद, प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थ, सिरेमिक, कालीन और ऑटोमोबाइल जैसे सामान न्यूजीलैंड में ड्यूटी-फ्री पहुंच पा सकेंगे। सेवा क्षेत्र, शिक्षा और पर्यटन में भी नए अवसर खुलेंगे। दोनों देशों के बीच व्यापार दोगुना करने का लक्ष्य 2030 तक हासिल करने में यह समझौता महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। निवेश बढ़ने से रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे और आर्थिक विकास को गति मिलेगी।
PM लक्सन ने इस बात पर भी जोर दिया कि एफटीए से न्यूजीलैंड के निर्यातकों को अपने बिजनेस संबंध बढ़ाने में मदद मिलेगी। इससे भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और न्यूजीलैंड के प्रधानमंत्री क्रिस्टोफर लक्सन द्वारा 2030 तक दोनों देशों के बीच व्यापार को दोगुना करने के लक्ष्य को भी समर्थन मिलेगा। दोनों देशों के बीच मौजूदा द्विपक्षीय व्यापार लगभग 4 अरब न्यूजीलैंड डॉलर के आसपास है। भारत न्यूजीलैंड का नौवां सबसे बड़ा निर्यात बाजार है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह समझौता सिर्फ व्यापार तक सीमित नहीं रहेगा। यह दोनों देशों के बीच सांस्कृतिक और रणनीतिक संबंधों को भी मजबूत करेगा। न्यूजीलैंड की संसद से मंजूरी मिलने के बाद अब दोनों देशों को अपने-अपने घरेलू अनुमोदन प्रक्रियाओं को पूरा करना है। उम्मीद है कि समझौता अक्टूबर 2026 के आसपास लागू हो सकता है। कुल मिलाकर, न्यूजीलैंड की संसद द्वारा भारत-न्यूजीलैंड एफटीए को मंजूरी देना दोनों देशों के आर्थिक संबंधों में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है।
पीएम लक्सन के शब्दों में, यह सिर्फ एक व्यापार समझौता नहीं, बल्कि न्यूजीलैंड की अर्थव्यवस्था को आगे बढ़ाने और नागरिकों को बेहतर अवसर देने का माध्यम है। भारतीय निर्यातकों और व्यवसायों के लिए भी यह नई संभावनाओं का द्वार खोलता है। अब नजर इस बात पर है कि दोनों देश कितनी तेजी से इसे लागू करते हैं और व्यापार में वास्तविक बढ़ोतरी कितनी होती है।
Updated on:
16 Sept 2026 04:43 pm
Published on:
16 Sept 2026 04:43 pm
