
सैनिकों को फ्री रेल यात्रा की सुविधा (इमेज सोर्स- IANS)
देश की रक्षा के लिए अदम्य साहस, वीरता और बलिदान का परिचय देने वाले सैनिकों तथा उनके परिवारों के सम्मान में रक्षा मंत्रालय ने बड़ा निर्णय लिया है। देश के लिए असाधारण साहस दिखाने वाले सैनिकों को अब भारतीय रेल में आजीवन मुफ्त यात्रा की सुविधा मिलेगी। इसकी प्रक्रिया पूरी तरह डिजिटल कर दी गई है।
रक्षा मंत्रालय ने सेना मेडल, नौ सेना मेडल और वायु सेना मेडल (वीरता) से सम्मानित सैनिकों के लिए भारतीय रेलवे की फर्स्ट क्लास (FC), सेकंड AC (2A) और AC चेयर कार (CC) श्रेणी में आजीवन फ्री यात्रा की सुविधा को मंजूरी दी है। यह सुविधा सैनिकों के जीवनसाथी, विधवा या विधुर (पुनर्विवाह तक) और अविवाहित मरणोपरांत पुरस्कार विजेताओं के माता-पिता को भी मिलेगी।
सेना ने बुधवार को बताया कि सरकारी स्वीकृति को लागू करने के लिए एक सुविधाजनक और कागज रहित डिजिटल प्रक्रिया तैयार की गई है। पात्र लाभार्थी भारतीय रेलवे रियायत कार्ड पोर्टल (IRCCP) पर ऑनलाइन पंजीकरण कर सकेंगे। सत्यापन के बाद ई-पास ऑनलाइन जारी होंगे और IRCTC वेब पोर्टल के जरिए टिकट बुकिंग 1 नवंबर 2026 से शुरू होगी।
सैनिकों को दी गई सुविधा के तहत लाभार्थी का एक सहयात्री (कंपेनियन) भी मुफ्त में यात्रा कर सकेगा। यह लाभ केवल वीरता (गैलेंट्री) श्रेणी के पदकों पर लागू है, विशिष्ट सेवा (डिस्टिंग्विश्ड सर्विस) श्रेणी पर नहीं। यानी सेना मेडल (विशिष्ट सेवा) पाने वाले इस दायरे में नहीं आते।
यह कोई एक दिन में लिया गया निर्णय नहीं है। 16 मार्च 2026 के एक आधिकारिक पत्राचार में यह प्रस्ताव रक्षा मंत्रालय के समक्ष रखा गया, जिसे मंत्रालय ने मंजूरी दी। इसके बाद सेना के एडजुटेंट जनरल ब्रांच ने रक्षा लेखा महानियंत्रक (सीजीडीए) के साथ मिलकर क्रियान्वयन की व्यवस्था तय करनी शुरू की। मार्च 2026 के अंत में रेल मंत्रालय ने रक्षा मंत्रालय के परामर्श से औपचारिक आदेश जारी किया।
इसके बाद रेलवे बोर्ड ने 17 अगस्त 2026 के पत्र में प्रस्तावित किया कि पंजीकरण प्रक्रिया 15 सितंबर 2026 से शुरू हो और टिकट बुकिंग सुविधा 1 नवंबर 2026 तक चालू कर दी जाए। इसी पत्र में बताया गया कि क्रिस (CRIS) और आईआरसीटीसी मिलकर एक आरडीएस मॉड्यूल विकसित करेंगे, जिसमें रक्षा मंत्रालय की ओर से अग्रिम जमा (एडवांस डिपॉजिट) की व्यवस्था हो सकती है, जिसके एवज में पात्र विजेता टिकट बुक कर सकेंगे। पात्र लाभार्थी ऑनलाइन के साथ-साथ कंप्यूटरीकृत पीआरएस काउंटरों से भी आरक्षित टिकट बुक कर सकेंगे।
सरकार के इस फैसले का असली महत्व वरीयता क्रम में छिपा है। सेना मेडल, नौ सेना मेडल और वायु सेना मेडल (वीरता) वीर चक्र और शौर्य चक्र के बाद वरीयता क्रम में चौथे स्थान पर आते हैं। केंद्र सरकार वीरता पुरस्कार विजेताओं को आर्थिक लाभ, हवाई व रेल यात्रा रियायत और बच्चों के लिए शैक्षणिक संस्थानों में आरक्षण जैसी कई सुविधाएं देती है, जबकि राज्य सरकारें अपनी नीतियों के तहत अलग लाभ देती हैं। इस पहल से सेना, नौ सेना और वायु सेना मेडल (वीरता) विजेता जो शौर्य चक्र के ठीक बाद आते हैं। परम वीर चक्र, महावीर चक्र, वीर चक्र, अशोक चक्र, कीर्ति चक्र और शौर्य चक्र विजेताओं के बराबर आ गए, जिन्हें पहले से ऐसी रेल रियायत मिलती रही है।
सैनिकों को दी गई फ्री रेल यात्रा की सुविधा 3 दशक पुरानी व्यवस्था का ही विस्तार है। रेल मंत्रालय के 23 फरवरी 1996 के पत्र संख्या E(W)96PS 56/22 के तहत परम वीर चक्र, अशोक चक्र, महावीर चक्र, कीर्ति चक्र, वीर चक्र और शौर्य चक्र विजेताओं तथा मरणोपरांत विजेताओं की विधवाओं को एक सहयात्री के साथ फर्स्ट क्लास/सेकंड एसी में मुफ्त यात्रा की सुविधा दी गई थी।
बाद में 2003 में भारतीय रेल के 150वें वर्ष पर परम वीर चक्र, महावीर चक्र और वीर चक्र विजेताओं के पास राजधानी के एसी-2/एसी-3 और शताब्दी/जन शताब्दी की चेयर कार में भी मान्य कर दिए गए। इसके बाद अशोक चक्र और कीर्ति चक्र विजेताओं को एग्जीक्यूटिव क्लास में आजीवन मुफ्त यात्रा की पात्रता दी गई, जिससे वे परम वीर चक्र और महावीर चक्र विजेताओं के समकक्ष आ गए। यह प्रावधान कोलकाता मेट्रो रेलवे को छोड़कर पूरे रेल नेटवर्क पर लागू होता है।
लाभार्थियों की संख्या हर साल बढ़ रही है। 15 अगस्त 2026 को देश के 80वें स्वतंत्रता दिवस पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने 78 वीरता पुरस्कारों को मंजूरी दी थी, जिनमें 9 कीर्ति चक्र (7 मरणोपरांत), 19 शौर्य चक्र (1 मरणोपरांत), 36 सेना मेडल (वीरता) (5 मरणोपरांत), 5 बार टु सेना मेडल (वीरता), 3 नौ सेना मेडल (वीरता) और 5 वायु सेना मेडल (वीरता) शामिल थे। यानी अकेले इस साल के स्वतंत्रता दिवस पर घोषित पुरस्कारों में से 44 विजेता इस नई रेल सुविधा के दायरे में आते हैं।
रक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि इसे सिर्फ किराये में छूट के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। ऑनलाइन पंजीकरण, डिजिटल सत्यापन और ई-पास की व्यवस्था से हजारों पूर्व सैनिकों और शहीदों के परिजनों को जोनल रेलवे कार्यालयों के चक्कर लगाने से मुक्ति मिलेगी। चूंकि इस साल दिवाली 8 नवंबर को है, टिकट बुकिंग की शुरुआत ठीक त्योहारी सीजन से पहले हो रही है, जब रेल यात्रा की मांग साल के उच्चतम स्तर पर होती है।
Updated on:
16 Sept 2026 02:45 pm
Published on:
16 Sept 2026 02:45 pm
