
सांकेतिक इमेज (सोर्स- Chatgpt)
अचानक आधी रात में सिरदर्द की वजह से नींद खुल जाना शारीरिक और मानसिक रूप से परेशानी पैदा कर सकता है। खासकर अगर दर्द पिछले सिरदर्द से अलग महसूस हो, तब मन में सबसे पहला सवाल यही उठता है कि सोते समय अचानक यह सिरदर्द क्यों हुआ? डॉक्टर बताते हैं कि इसके आम कारणों में माइग्रेन, नींद ठीक से न आना, स्लीप एपनिया, दांत पीसना या दवा का असर कम होना शामिल हो सकता है।
अगर सिरदर्द का स्वरूप अचानक बदल जाए, दर्द धीरे-धीरे बढ़ता जाए। इसके साथ उल्टी आए, देखने में दिक्कत हो, कमजोरी या बोलने में परेशानी जैसे लक्षण दिखें तो यह किसी गंभीर स्थिति का संकेत हो सकता है। ऐसी स्थिति में बिल्कुल भी लापरवाही न करें, तुरंत डॉक्टर से सलाह लें।
सह्याद्रि सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल नासिक में इंटरवेंशनल न्यूरोलॉजिस्ट और स्ट्रोक विशेषज्ञ डॉ. श्रीपाल शाह का कहना है कि सिरदर्द के कई कारण हो सकते हैं। सिर्फ इसलिए कि सिरदर्द रात में हुआ, यह तय नहीं किया जा सकता कि कोई खास स्थिति ही इसकी वजह है। ऐसी समस्या के पीछे कई कारण हो सकते हैं-
माइग्रेन की समस्या- माइग्रेन की वजह से भी आपकी नींद खुल सकती है। कुछ लोगों में माइग्रेन का अटैक सोते समय शुरू होता है और दर्द इतना बढ़ जाता है कि उनकी नींद खुल जाती है। सुबह-सुबह होने वाला सिरदर्द भी माइग्रेन से जुड़ा हो सकता है।
स्लीप एपनिया- एक और संभावित कारण स्लीप एपनिया है। इस स्थिति में सोते समय सांस बार-बार रुकती और शुरू होती है, जिससे नींद में बार-बार खलल पड़ सकता है। इसके लक्षणों में जोर से खर्राटे लेना, सोते समय सांस लेने में दिक्कत या दम घुटने जैसा महसूस होना, रात में बार-बार जागना, दिन में बहुत ज्यादा नींद आना और सुबह सिरदर्द होना शामिल हो सकते हैं।
दांत पीसने या जबड़े को कसकर भींचने की आदत- कभी-कभी, दांत पीसने या जबड़े को कसकर भींचने की आदत से सुबह या रात में सिरदर्द हो सकता है। ऐसे मामलों में, सिरदर्द के साथ जबड़े में दर्द या अकड़न भी हो सकती है।
अन्य कारण- पर्याप्त पानी न पीना, खाने का समय अनियमित होना, तनाव, शराब का सेवन, नींद के पैटर्न में बदलाव या दर्द की दवाओं का बार-बार इस्तेमाल भी सिरदर्द का कारण बन सकते हैं।
डॉ. श्रीपाल शाह का कहना है कि जरूरी नहीं कि रात में सिरदर्द होना किसी खास मेडिकल स्थिति का संकेत ही है। हिपनिक हेडेक (hypnic headache) नाम की एक दुर्लभ स्थिति होती है। इसे कभी-कभी अलार्म क्लॉक हेडेक भी कहा जाता है, क्योंकि यह व्यक्ति को नींद से जगा सकता है। इस स्थिति में, सिरदर्द आमतौर पर नींद के दौरान शुरू होता है और व्यक्ति को बार-बार जगा देता है।
इंटरनेशनल क्लासिफिकेशन ऑफ हेडेक डिसऑर्डर के अनुसार, इसकी पहचान तब की जाती है, जब ऐसे दौरे लंबे समय तक बार-बार पड़ते हैं। आमतौर पर तीन महीने से ज्यादा समय तक, महीने में कम से कम 10 दिन, और जागने के बाद दर्द 15 मिनट से लेकर चार घंटे तक बना रहता है। लेकिन, यह ध्यान रखना जरूरी है कि रात में बार-बार होने वाले सिरदर्द को तुरंत हाइपनिक सिरदर्द नहीं मान लेना चाहिए। डॉक्टर को पहले दूसरे संभावित कारणों की जांच करनी चाहिए, जैसे- स्लीप एपनिया, रात में ब्लड प्रेशर का बढ़ना, लो ब्लड शुगर, दवा से जुड़ी दिक्कतें और दूसरी अंदरूनी मेडिकल कंडीशन।
विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसी स्थिति में घबराएं नहीं। ध्यान दें कि दर्द कब शुरू हुआ और कितना तेज था? कितनी देर तक सिर दर्द रहा और क्या इसके साथ कोई और लक्षण भी थे? अगर ऐसा बार-बार होता है, तो सिरदर्द की डायरी रखना फायदेमंद हो सकता है। आप इसमें सोने का समय, सिरदर्द शुरू होने का समय, खान-पान, दवाइयां और इससे जुड़े किसी भी लक्षण जैसी जानकारी लिख सकते हैं। इससे डॉक्टर को पैटर्न समझने में मदद मिल सकती है।
(डिस्क्लेमर: यह लेख सामान्य जानकारी के लिए है। किसी भी मेडिकल इमरजेंसी के समय डॉक्टर्स से सलाह अवश्य लें।)
Updated on:
15 Sept 2026 08:46 pm
Published on:
15 Sept 2026 08:46 pm
