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रिसर्चः डायबिटीज की दवा से बढ़ सकता है गंभीर खतरा, जानें किन मरीजों को ज्यादा सावधानी की जरूरत

SGLT2 inhibitors टाइप 2 डायबिटीज के इलाज में उपयोगी दवाएं हैं, लेकिन कुछ मरीजों में इनसे डायबिटिक कीटोएसिडोसिस का जोखिम बढ़ सकता है। मरीजों को उल्टी, पेट दर्द, तेज सांस और अत्यधिक कमजोरी जैसे लक्षणों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।
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Sep 05, 2026
Diabetes Medicine
सांकेतिक इमेजः Gemini

टाइप 2 डायबिटीज के इलाज में इस्तेमाल होने वाली कुछ दवाएं ब्लड शुगर नियंत्रित करने के साथ दिल और किडनी की सुरक्षा में भी मदद करती हैं। लेकिन हाल ही में सामने आई एक स्टडी ने इन दवाओं से जुड़े एक गंभीर खतरे की ओर ध्यान खींचा है। शोध के अनुसार,SGLT2 Inhibitors लेने वाले कुछ मरीजों में डायबिटिक कीटोएसिडोसिस यानी DKA का जोखिम बढ़ सकता है।

यह एक गंभीर मेडिकल स्थिति है, जिसमें शरीर में इंसुलिन की कमी के कारण कीटोन नामक पदार्थ तेजी से बनने लगते हैं। इससे खून में एसिड की मात्रा बढ़ जाती है और समय पर इलाज न मिलने पर स्थिति जानलेवा भी हो सकती है। हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि हर मरीज को यह दवा बंद कर देनी चाहिए। दवा का इस्तेमाल डॉक्टर की सलाह और नियमित निगरानी में करना जरूरी है।

क्या कहती है नई स्टडी?

स्वीडन, डेनमार्क और नॉर्वे के स्वास्थ्य रिकॉर्ड के आधार पर की गई इस स्टडी में टाइप 2 डायबिटीज से पीड़ित 2.80 लाख से अधिक मरीजों के आंकड़ों का विश्लेषण किया गया। शोधकर्ताओं ने यह जानने की कोशिश की कि SGLT2 inhibitors लेने वाले मरीजों में कीटोएसिडोसिस का खतरा किन परिस्थितियों में अधिक हो सकता है।

स्टडी में पाया गया कि जिन मरीजों का वजन कम था, ब्लड शुगर ज्यादा रहता था या जिन्हें पहले कीटोएसिडोसिस हो चुका था, उनमें जोखिम अधिक देखा गया। कुपोषण, इंसुलिन की कमी और पहले लो ब्लड शुगर की समस्या भी खतरे से जुड़ी पाई गईं। संक्रमण को कीटोएसिडोसिस का एक प्रमुख ट्रिगर बताया गया है।

SGLT2 inhibitors क्या हैं?

SGLT2 inhibitors एक प्रकार की डायबिटीज दवा है। इन्हें कई बार ग्लिफ्लोजिन दवाओं के नाम से भी जाना जाता है। ये दवाएं किडनी के माध्यम से अतिरिक्त ग्लूकोज को पेशाब के रास्ते शरीर से बाहर निकालने में मदद करती हैं। इससे ब्लड शुगर का स्तर कम होता है।

इन दवाओं का उपयोग कुछ मरीजों में हार्ट फेल्योर और किडनी से जुड़ी बीमारियों के जोखिम को कम करने के लिए भी किया जाता है। इसलिए डॉक्टर मरीज की स्थिति देखकर इनके फायदे और संभावित जोखिम का आकलन करते हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, दवा के फायदे महत्वपूर्ण हैं, लेकिन इसके संभावित साइड इफेक्ट को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।

कीटोएसिडोसिस में क्या होता है?

जब शरीर में पर्याप्त इंसुलिन नहीं होता, तो कोशिकाएं ऊर्जा के लिए ग्लूकोज का इस्तेमाल नहीं कर पातीं। ऐसे में शरीर फैट को ऊर्जा में बदलना शुरू करता है। इस प्रक्रिया में कीटोन बनते हैं। यदि कीटोन बहुत अधिक मात्रा में बनने लगें, तो खून अम्लीय हो सकता है।

SGLT2 inhibitors से जुड़ी कीटोएसिडोसिस की खास बात यह है कि इसमें ब्लड शुगर हमेशा बहुत ज्यादा नहीं होता। कई बार शुगर का स्तर 250 mg/dL से कम होने पर भी यह गंभीर स्थिति हो सकती है। इसी कारण केवल ग्लूकोमीटर की रीडिंग देखकर खतरे को नजरअंदाज करना सही नहीं है।

इन लक्षणों को न करें नजरअंदाज

SGLT2 inhibitors लेने वाले मरीजों को कुछ लक्षणों पर तुरंत ध्यान देना चाहिए। इनमें शामिल हैं:

  • लगातार जी मिचलाना या उल्टी होना
  • पेट में दर्द
  • अत्यधिक कमजोरी या थकान
  • भूख कम लगना
  • तेज या गहरी सांस लेना
  • सांस लेने में परेशानी
  • शरीर में पानी की कमी
  • भ्रम या बेहोशी जैसी स्थिति

यदि दवा लेने वाले मरीज में ऐसे लक्षण दिखाई दें, तो तुरंत डॉक्टर या नजदीकी अस्पताल से संपर्क करना चाहिए। यह जरूरी नहीं कि ब्लड शुगर बहुत ज्यादा हो, फिर भी कीटोएसिडोसिस की जांच की आवश्यकता हो सकती है।

किन परिस्थितियों में खतरा बढ़ सकता है?

कुछ स्थितियां इस जोखिम को बढ़ा सकती हैं। जैसे:

  • लंबे समय तक खाना कम खाना या उपवास करना
  • शरीर में पानी की कमी होना
  • तेज बुखार या संक्रमण
  • सर्जरी से पहले या बाद की स्थिति
  • इंसुलिन की खुराक कम कर देना
  • अत्यधिक शराब का सेवन
  • बहुत कम वजन या कुपोषण
  • पहले कीटोएसिडोसिस हो चुका होना
  • अग्न्याशय से जुड़ी बीमारी

बीमारी, उल्टी या डिहाइड्रेशन की स्थिति में दवा जारी रखने या रोकने का फैसला मरीज को खुद नहीं करना चाहिए। डॉक्टर से तुरंत सलाह लेना जरूरी है। कुछ मेडिकल प्रक्रियाओं से पहले डॉक्टर SGLT2 inhibitors को अस्थायी रूप से रोकने की सलाह दे सकते हैं।

मरीजों को क्या सावधानी रखनी चाहिए?

SGLT2 inhibitors लेने वाले मरीजों को पर्याप्त पानी पीना चाहिए, जब तक कि डॉक्टर ने किसी अन्य कारण से पानी सीमित करने को न कहा हो। बीमारी के दौरान खाना-पीना कम हो जाए, उल्टी हो या बुखार रहे, तो डॉक्टर से संपर्क करें।

दवा की खुराक खुद से कम या ज्यादा न करें और न ही बिना सलाह के दवा बंद करें। डॉक्टर को अपनी सभी दवाओं, किडनी की स्थिति, पिछले संक्रमण और किसी भी सर्जरी की जानकारी दें।

सबसे जरूरी बात यह है कि मरीजों को कीटोएसिडोसिस के लक्षणों की जानकारी होनी चाहिए। समय पर पहचान और इलाज से गंभीर जटिलताओं से बचा जा सकता है।

दवा बंद करना समाधान नहीं

SGLT2 inhibitors से जुड़े जोखिम की खबर सामने आने के बाद मरीजों में डर पैदा होना स्वाभाविक है। लेकिन इन दवाओं के कई प्रमाणित फायदे भी हैं। ये ब्लड शुगर नियंत्रित करने के साथ कुछ मरीजों में हृदय और किडनी की सुरक्षा में मदद करती हैं।

इसलिए दवा बंद करने के बजाय डॉक्टर से व्यक्तिगत जोखिम और लाभ पर चर्चा करना बेहतर है। सही मरीज का चयन, नियमित जांच और चेतावनी वाले लक्षणों की जानकारी इस खतरे को कम करने में मदद कर सकती है।

डायबिटीज की दवा हमेशा डॉक्टर की सलाह से लें। यदि SGLT2 inhibitors लेने के दौरान उल्टी, पेट दर्द, तेज सांस या अत्यधिक कमजोरी जैसे लक्षण हों, तो तुरंत मेडिकल सहायता लें।

(डिस्क्लेमरः यह लेख डॉक्टर की सलाह का विकल्प नहीं है। अधिक जानकारी के लिए और आवश्यकता पड़ने पर चिकित्सक से संपर्क करें।)

Updated on:
05 Sept 2026 03:28 pm
Published on:
05 Sept 2026 03:28 pm