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अमेरिकी ग्रीनकार्ड का इंतजार और लंबा: EB-1 कोटा पर ‘अनुपलब्ध’ का खतरा, भारतीयों को लग सकता है बड़ा झटका

वीजा को लेकर अमेरिका लगातार सख्ती कर रहा है। इसका खामियाजा बड़ी संख्या में भारतीयों को भी भुगतना पड़ रहा है। अब EB-1 कैटेगरी के तहत अमेरिकी ग्रीनकार्ड का इंतजार कर रहे भारतीयों को झटका लग सकता है।
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Sep 09, 2026
us green card
सांकेतिक इमेज (सोर्स- Chatgpt)

अमेरिका में ग्रीनकार्ड के इंतजार में बैठे भारतीय पेशेवरों के लिए एक और झटका लगने की आशंका बढ़ गई है। अमेरिकी स्टेट डिपार्टमेंट ने सितंबर 2026 के वीजा बुलेटिन में साफ चेतावनी दी है कि EB-1 इंडिया, EB-2 (सभी देशों के लिए) और EB-5 अनरिजर्व्ड श्रेणियां 30 सितंबर को वित्त वर्ष 2026 खत्म होने से पहले ही "अनुपलब्ध" (Unavailable) हो सकती हैं या रेट्रोग्रेस यानी पीछे खिसक सकती हैं। ट्रंप प्रशासन के कार्यकाल में अमेरिका पहले से ही वीजा नियमों को लेकर सख्ती बढ़ाता रहा है और इसका सीधा असर बड़ी संख्या में भारतीय आवेदकों पर पड़ रहा है।

भारतीयों आवेदकों पर असर

अमेरिका के स्टेट डिपार्टमेंट के आंकड़ों के अनुसार, वित्त वर्ष 2026 के लिए दुनियाभर में रोजगार-आधारित (एम्प्लॉयमेंट-बेस्ड) प्राथमिकता श्रेणियों की कुल सीमा 1,86,317 तय की गई है। बुलेटिन में खासतौर पर EB-1 के लिए कहा गया है कि इस श्रेणी में भारतीय आवेदकों की ओर से अत्यधिक मांग और वीजा नंबरों के तेज इस्तेमाल के चलते आने वाले हफ्तों में इसे "अनुपलब्ध" घोषित करना पड़ सकता है।

अगर भारत की तय सीमा (प्रो-रेटेड लिमिट) वित्त वर्ष खत्म होने से पहले पूरी हो जाती है। असाधारण क्षमता वाले वैज्ञानिकों, शिक्षकों, कलाकारों और कारोबारियों के लिए मानी जाने वाली यह "फर्स्ट प्रेफरेंस" श्रेणी अभी सितंबर बुलेटिन में भारत के लिए 15 अक्टूबर 2022 की फाइनल एक्शन डेट पर टिकी है। यानी सिर्फ वही आवेदक आगे बढ़ पा रहे हैं जिनकी प्रायोरिटी डेट इससे पहले की है। यह तारीख जुलाई 2026 से लगातार तीन महीनों से नहीं बदली, हालांकि जुलाई में ही इसे 15 दिसंबर 2022 से दो महीने पीछे खिसकाया (रेट्रोग्रेस) जा चुका है।

भारतीयों के लिए EB-2 श्रेणी की स्थिति कठिन

उच्च डिग्री और असाधारण क्षमता वाले पेशेवरों के लिए बनी EB-2 श्रेणी की स्थिति भारतीय आवेदकों के लिए फिलहाल सबसे कठिन है। बुलेटिन के मुताबिक EB-2 इंडिया जुलाई, अगस्त और अब सितंबर तीनों महीनों से "अनुपलब्ध" (अनऑथराइज्ड) दर्ज है। यानी भारत में जन्मे आवेदकों के लिए इस श्रेणी में अभी कोई भी नया ग्रीनकार्ड जारी नहीं हो सकता।

इसके अलावा स्टेट डिपार्टमेंट ने यह भी आगाह किया है कि बढ़ती मांग के चलते सभी देशों के लिए लागू सामान्य EB-2 श्रेणी में भी वित्त वर्ष खत्म होने से पहले फाइनल एक्शन डेट पीछे खिसक सकती है या यह श्रेणी अस्थायी रूप से पूरी तरह बंद हो सकती है। तीसरी प्राथमिकता वाली EB-3 श्रेणी में भारत के लिए बैकलॉग सबसे पुराना है। इसकी फाइनल एक्शन डेट अभी भी 1 जनवरी 2014 पर अटकी है, जो बताता है कि इस श्रेणी में सालों पुराने आवेदन भी अब तक निपट नहीं पाए हैं।

भारतीय आवेदकों के पास क्या विकल्प हैं?

भारत उन चंद देशों में शामिल है, जिनमें चीन, मेक्सिको और फिलीपींस भी आते हैं जो हर साल तय प्रति-देश (पर-कंट्री) सीमा को समय से बहुत पहले ही पार कर जाते हैं, क्योंकि रोजगार-आधारित याचिकाओं में भारतीय आवेदकों की संख्या इस सीमा से कहीं ज्यादा है। जब यह सीमा वित्त वर्ष खत्म होने से पहले ही पूरी हो जाती है, तो स्टेट डिपार्टमेंट के पास सिर्फ दो विकल्प बचते हैं। पहला विकल्प फाइनल एक्शन डेट को पीछे खिसकाना, या श्रेणी को पूरी तरह अस्थायी रूप से बंद करना। फिलहाल EB-1 और EB-2 इंडिया के साथ होने की आशंका जताई जा रही है।

राहत की बात सिर्फ यह है कि यह स्थिति स्थायी नहीं रहेगी। 1 अक्टूबर 2026 से वित्त वर्ष 2027 शुरू होते ही सभी श्रेणियों के लिए नए सिरे से वीजा नंबर उपलब्ध हो जाएंगे और जो श्रेणियां सितंबर में "अनुपलब्ध" घोषित हुई होंगी, वे फिर से खुल जाएंगी। लेकिन इससे भारतीय आवेदकों के सामने खड़ी बुनियादी समस्या यानी मांग और तय सालाना कोटे के बीच भारी असंतुलन खत्म नहीं होगी। आप्रवासन कानून विशेषज्ञों की सलाह है कि जिन आवेदकों के केस नेशनल विजा सेंटर में लंबित हैं या एडजस्टमेंट ऑफ स्टेटस दाखिल करने वाले हैं। वे अपने कागजात पूरी तरह तैयार रखें, ताकि अक्टूबर में नई तारीखें खुलते ही वे बिना देरी आगे बढ़ सकें।

Updated on:
09 Sept 2026 08:48 pm
Published on:
09 Sept 2026 08:48 pm