
भागदौड़ भरी जिंदगी और बिजी लाइफ स्टाइल में महिलाओं को स्वस्थ और मानसिक तनाव से मुक्त रहना बेहद जरूरी है। तनाव, चिंता और भावनात्मक असंतुलन जैसी चुनौतियां न केवल कामकाजी महिलाओं, बल्कि छात्राओं और हर उम्र की महिलाओं के लिए चिंता का विषय हैं। महिलाओं की इन समस्याओं का समाधान योग करने से हो सकता है। योग, सदियों पुरानी भारतीय विधा है। योग का प्रभाव आज के जीवन में और भी प्रासंगिक हो गया है। योग के आसान और प्रभावी तरीके महिलाओं के स्वास्थ्य को बेहतर रखने में मदद कर सकते हैं।
एक इरानी अध्ययन में पाया गया कि 12 सत्रों (4 सप्ताह, प्रति सप्ताह 3 सत्र, प्रत्येक में 60- 70 मिनट) के नियमित हठ योग अभ्यास से महिलाओं में तनाव, चिंता और अवसाद में महत्वपूर्ण कमी आई है। इसी प्रकार, जर्मनी में किए गए एक नियंत्रित अध्ययन में, 3 महीने तक इयंगर योग (प्रति सप्ताह दो 90 मिनट के सत्र तक) करने वाली महिलाओं में तनाव, चिंता, अवसाद और थकान में स्पष्ट सुधार देखा गया। इसके साथ ही शाम के सत्र के बाद लार में कोर्टिसोल (तनाव हार्मोन) का स्तर भी घटा।
एक अन्य हालिया अध्ययन में 25 से 55 वर्ष की महिलाओं पर 8 सप्ताह का हठ योग अभ्यास कराया गया। इसमें तनाव और चिंता दोनों में महत्वपूर्ण कमी देखी गई। इसके साथ ही यह पाया गया कि मध्यम से तीव्र शारीरिक गतिविधि की आवश्यकता नहीं थी। नियमित उपस्थिति और सत्र की संरचना ही पर्याप्त थी।
परिमेनोपॉजल महिलाएं: बेंगलुरु के स्वामी विवेकानंद योग अनुसंधान संस्थान के एक यादृच्छिक नियंत्रित अध्ययन में 40–55 वर्ष की महिलाओं ने 8 सप्ताह तक सूर्य नमस्कार, प्राणायाम और चक्र ध्यान (सायक्लिक मेडिटेशन) किया। इस दौरान योग करने वाली महिलाओं में तनाव, न्यूरोटिसिज्म (भावनात्मक अस्थिरता) और गर्मी संबंधी लक्षणों में नियंत्रण समूह की तुलना में बेहतर सुधार हुआ।
गर्भवती महिलाएं: गुजरात में किए गए एक अध्ययन में 180 गर्भवती महिलाओं को योग और संगीत चिकित्सा समूहों में विभाजित किया गया। योग समूह (हर दिन 30 मिनट, दो सप्ताह) में तनाव स्कोर में अधिक गिरावट आई, जबकि संगीत समूह में यह गिरावट कम थी।
कामकाजी महिलाएं और पीएमएस: मुंबई और दिल्ली की 23–38 वर्ष की 76 कामकाजी महिलाओं पर 12 सप्ताह का ऑनलाइन योग मॉड्यूल (प्रति सप्ताह 5 सत्र, 18 से 24 मिनट प्रति सत्र) लागू किया गया। योग समूह में 14 में से 11 भावनात्मक, शारीरिक और व्यवहार संबंधी पीएमएस लक्षणों में सुधार देखा गया।
भारत में ग्रामीण महिलाएं (COVID-19 के दौरान): एक पायलट RCT (Yoga‑M2 trial) में 12–24 सप्ताह की गर्भवती महिलाओं को योग आधारित हस्तक्षेप दिया गया। यद्यपि यह अध्ययन प्रारंभिक था, लेकिन मानसिक स्वास्थ्य और प्रतिरक्षा प्रणाली पर योग के सकारात्मक प्रभावों की संभावना दर्शाता है।
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने हाल ही में (26 जून 2026) एक टिप्पणी में कहा कि नियमित योग अभ्यास तनाव कम करने, भावनात्मक संतुलन बनाए रखने और मानसिक-शारीरिक स्वास्थ्य सुधारने में सहायक हो सकता है। WHO पारंपरिक चिकित्सा को स्वास्थ्य प्रणालियों में शामिल करने की वकालत कर रहा है।
योग, महिलाओं के मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य के लिए एक भरोसेमंद साथी है। यह तनाव, चिंता, पीएमएस, गर्भावस्था संबंधी मानसिक चुनौतियों और जीवन के अन्य चरणों में संतुलन बनाए रखने में मदद करता है। वैज्ञानिक अध्ययनों और WHO की मान्यता इसे और भी विश्वसनीय बनाती है। यदि आप अपनी दिनचर्या में योग को शामिल करें, तो यह न केवल आज की चुनौतियों से निपटने में मदद करेगा, बल्कि आने वाले कल के लिए भी आपको मजबूत बनाएगा।