
सिंगापुर में लगातार गिरती जन्म दर की स्थिति चिंता का विषय बनी हुई है। इस देश की आबादी लगातार गिर रही है। इस समस्या से निपटने के लिए सिंगापुर के प्रधानमंत्री लॉरेंस वोंग ने 23 अगस्त को नेशनल डे रैली के भाषण में नई 'SG चाइल्ड सपोर्ट पैकेज' योजना का ऐलान किया, जो मौजूदा बेबी बोनस स्कीम और लार्ज फैमिलीज स्कीम की जगह लेगी। नई योजना के तहत सिंगापुर में जन्म लेने वाले बच्चे को जन्म से लेकर 17 साल की उम्र तक करीब 70 हजार सिंगापुर डॉलर की मदद दी जाएगी। मौजूदा विनिमय दर (करीब 71 रुपए प्रति सिंगापुर डॉलर) के हिसाब से यह रकम लगभग 50 लाख रुपए बैठती है।
नई योजना के तहत बच्चे के जन्म पर परिवार को 10 हजार सिंगापुर डॉलर (करीब 7 लाख रुपए) का 'बेबी गिफ्ट' मिलेगा, जो जन्म के 12 महीनों के भीतर दो किस्तों में दिया जाएगा। इसके अलावा बच्चे की उम्र 16 साल होने तक हर साल 2 हजार डॉलर के हिसाब से कुल 32 हजार डॉलर के 'चाइल्ड क्रेडिट्स' मिलेंगे।
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, बच्चे को दिए जाने वाले फंड में 5 हजार डॉलर का चाइल्ड डेवलपमेंट अकाउंट फर्स्ट-स्टेप ग्रांट, सरकार की तरफ से 5 हजार डॉलर तक की सह-बचत और उच्च शिक्षा खाते में 10 हजार डॉलर का टॉप-अप भी शामिल है। मौजूदा मेडिसेव ग्रांट (5 हजार डॉलर) और सालाना एजुसेव योगदान (करीब 2,500 डॉलर) जोड़ने पर ही कुल मदद लगभग 70 हजार डॉलर तक पहुंचती है। यह नई व्यवस्था अप्रैल 2027 से लागू होगी।
सिंगापुर की नई पॉलिसी अप्रैल 2027 से लागू होगी। सिंगापुर के प्रधानमंत्री कार्यालय की नेशनल पॉपुलेशन एंड टैलेंट डिवीजन के अनुसार, इससे करीब 3 लाख 80 हजार परिवारों के 6 लाख 10 हजार बच्चों को फायदा मिलने की उम्मीद है। पैकेज में प्री-स्कूल फीस घटाकर 150 डॉलर मासिक करने, बच्चों की संख्या के आधार पर पेड चाइल्डकेयर लीव बढ़ाने और हर बच्चे पर सार्वजनिक आवास (बीटीओ फ्लैट) के लिए एक अतिरिक्त बैलट चांस देने का प्रावधान भी है। जो बच्चे पहले से मौजूदा बेबी बोनस स्कीम के तहत भुगतान पा रहे हैं, उन्हें मार्च 2027 तक पुरानी दर पर भुगतान मिलता रहेगा, उसके बाद जरूरत पड़ने पर टॉप-अप देकर उनकी मदद को भी 10 हजार डॉलर तक पहुंचाया जाएगा।
सिंगापुर की समस्या नई नहीं, लेकिन हालात अब सबसे खराब स्तर पर पहुंच गए हैं। रिपोर्टों के अनुसार, साल 2025 में सिंगापुर की रेजिडेंट प्रजनन दर घटकर 0.87 रह गई, जो 2024 में 0.97 थी। इसी दौरान देश में सिर्फ 30,004 बच्चे पैदा हुए, जो पिछले साल की तुलना में 11 प्रतिशत कम है। आबादी को स्थिर बनाए रखने के लिए जरूरी मानी जाने वाली 2.1 की प्रजनन दर से सिंगापुर बहुत पीछे है।
बता दें कि सिंगापुर ने तत्कालीन प्रधानमंत्री गोह चोक टोंग के कार्यकाल में अप्रैल 2001 में ही बेबी बोनस योजना शुरू कर दी थी, जब वहां की प्रजनन दर 1.41 थी। IMF की एक रिपोर्ट के मुताबिक इतनी योजनाओं और भारी खर्च (2001 के 50 करोड़ डॉलर के बजट से बढ़कर 2013 तक 2 अरब डॉलर तक) के बावजूद प्रजनन दर 2018 तक घटकर 1.16 पर आ गई थी। यानी नकद प्रोत्साहन के बावजूद सिंगापुरी दंपती बच्चे पैदा करने में हिचकिचा रहे हैं।
सिंगापुर की जनगणना एजेंसी सिंगस्टैट के आंकड़े बताते हैं कि 40 से 49 साल की विवाहित निःसंतान महिलाओं का अनुपात 2004 के 7.1 प्रतिशत से बढ़कर 2024 में 15 प्रतिशत हो गया है। हालांकि इंस्टीट्यूट ऑफ पॉलिसी स्टडीज़ (आईपीएस) के 2023 के एक सर्वे में 21 से 34 साल के अविवाहित या रिलेशनशिप में मौजूद 76 प्रतिशत युवाओं ने कहा था कि वे भविष्य में बच्चे चाहते हैं। यानी चाहत और असल फैसले के बीच बड़ा फासला दिखता है।
सिंगापुर के अलावा अन्य कई देशों में भी आबादी लगातार गिर रही है। इस समस्या से निपटने के लिए दक्षिण कोरिया, जापान, हंगरी, फ्रांस, रूस और चीन भी समय-समय पर नकद प्रोत्साहन, बेहतर मातृत्व-पितृत्व अवकाश और टैक्स छूट जैसी योजनाएं ला चुके हैं। ज्यादातर विकसित देशों में प्रजनन दर अब भी प्रतिस्थापन स्तर से नीचे बनी हुई है। सिंगापुर का नया पैकेज दिखाता है कि सरकारें अब सिर्फ शुरुआती नकद बोनस तक सीमित न रहकर बच्चे के 17-18 साल के होने तक लंबी अवधि की मदद पर ध्यान दे रही हैं।