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भारतीय वायुसेना में शामिल होंगे 60 नए ट्रांसपोर्ट विमान; 1 लाख करोड़ का सौदा मंजूर, पुराने बेड़े को मिलेगा नया रूप

भारतीय वायुसेना (IAF) के परिवहन बेड़े (Transport Fleet) को और अधिक मजबूती मिलेगी। रक्षा मंत्रालय पुराने हो चुके सोवियत दौर के एंटोनोव AN-32 विमानों को बदलने के लिए 60 मीडियम ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट खरीदने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।
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Sep 21, 2026
sixty new aircraft for indian air force
सांकेतिक इमेज (सोर्स- Chatgpt)

भारतीय वायुसेना (IAF) का परिवहन बेड़ा जल्द ही बड़ी मजबूती हासिल कर सकता है। रक्षा मंत्रालय ने सोवियत दौर के पुराने एंटोनोव AN-32 और इल्युशिन IL-76 विमानों को बदलने के लिए 60 मध्यम परिवहन विमान (Medium transport aircraft) खरीदने की दिशा में औपचारिक कदम बढ़ा दिए हैं। रक्षा अधिग्रहण परिषद (DAC) ने 27 मार्च 2026 को इस कार्यक्रम को स्वीकृति दी थी। इसके बाद मंत्रालय ने 12 अगस्त 2026 को इसके लिए औपचारिक प्रस्ताव अनुरोध (RFP) जारी किया।

करीब 1 लाख करोड़ का सौदा मंजूर

वायुसेना के लिए ट्रांसपोर्ट विमान खरीदने का सौदा लगभग 1 लाख करोड़ रुपये में तय हुआ है। इसके तहत 60 विमान खरीदे जाएंगे, जिनमें से 12 विमान पूरी तरह तैयार अवस्था में मिलेंगे, जबकि शेष 48 विमानों का निर्माण भारत में लाइसेंस के तहत किया जाएगा। अनुबंध पर हस्ताक्षर के 36 महीनों के भीतर आपूर्ति शुरू होने की शर्त रखी गई है। विमानों की भार वहन क्षमता 18 से 30 टन के बीच तय की गई है, जो मौजूदा एएन-32 बेड़े से कहीं अधिक है। साथ ही वायुसेना को सामरिक व परिचालन स्तर पर बड़ी लचीलापन देगी।

विमानों की दौड़ में किसका मुकाबला?

इस श्रृंखला में मुख्य रूप से दो विमान आमने-सामने हैं। लॉकहीड मार्टिन का सी-130जे-30 सुपर हरक्यूलिस, जिसे वायुसेना पहले से एक दशक से अधिक समय से संचालित कर रही है। इसके अलावा ब्राजील की कंपनी एम्ब्रेयर का जेट-इंजन आधारित सी-390 मिलेनियम।

सी-130जे-30 की अधिकतम पेलोड क्षमता करीब 19-20 टन है, जबकि सी-390 करीब 26 टन तक भार उठा सकता है। यह अस्थायी या कच्चे रनवे से भी संचालन में सक्षम है। एयरबस का बड़ा A400M विमान भी शुरू में चर्चा में था, लेकिन उसकी करीब 37 टन क्षमता तय सीमा से कहीं ज्यादा होने के कारण अब उसे इस दौड़ में बाहरी दावेदार माना जा रहा है।

औद्योगिक भागीदारी के तहत लॉकहीड मार्टिन ने सितंबर 2024 में ही टाटा एडवांस्ड सिस्टम्स लिमिटेड (TASL) के साथ करार किया था, जबकि एम्ब्रेयर ने महिंद्रा डिफेंस के साथ साझेदारी की है। इसके अलावा टेंडर पांच भारतीय कंपनियों टाटा एडवांस्ड सिस्टम्स, महिंद्रा, अडानी डिफेंस एंड एयरोस्पेस, हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) और रिलायंस डिफेंस को भेजा गया है, जिनमें से हर एक को किसी विदेशी विमान निर्माता के साथ मिलकर बोली लगानी है।

भारत के लिए क्यों अहम है यह डील?

सीमावर्ती इलाकों में परिचालन क्षमता: भारत की उत्तरी और पूर्वोत्तर सीमाएं, जिनमें लद्दाख जैसे ऊंचाई वाले क्षेत्र शामिल हैं, दुनिया के सबसे चुनौतीपूर्ण सैन्य परिचालन इलाकों में गिनी जाती हैं। नए विमान अधिक भार क्षमता और कच्चे/अर्ध-तैयार रनवे पर उतरने की क्षमता के साथ इन क्षेत्रों में सैनिकों, हथियारों और राहत सामग्री की आपूर्ति को तेज व भरोसेमंद बनाएंगे।

स्वदेशी विनिर्माण को बढ़ावा: 60 में से 48 विमान भारत में बनेंगे और उनमें उच्च स्वदेशी सामग्री की अपेक्षा है। इससे यह कार्यक्रम केवल सैन्य आधुनिकीकरण तक सीमित न रहकर 'मेक इन इंडिया' और घरेलू एयरोस्पेस पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूती देने वाला बड़ा औद्योगिक अवसर भी बन जाता है।

मानवीय सहायता क्षमता: आधुनिक परिवहन बेड़ा भारत की अंतरराष्ट्रीय आपदा राहत भूमिका को भी मजबूत करता है। इसका ताजा उदाहरण 'ऑपरेशन अमिस्ताद' है। 24 जून 2026 को वेनेजुएला में आए विनाशकारी भूकंप के बाद भारत ने 26 जून को दो सी-17 ग्लोबमास्टर विमानों से 60 पैरा फील्ड हॉस्पिटल की 41 सदस्यीय मेडिकल टीम, दो भीष्म क्यूब पोर्टेबल अस्पताल, 30 टन राहत सामग्री और 6 टन दवाइयां वेनेजुएला भेजी थीं। यह अभियान जुलाई 2026 के मध्य में सफलतापूर्वक पूरा हुआ, जिसमें भारतीय टीम ने 8,000 से अधिक चिकित्सा प्रक्रियाएं और 20 से अधिक बड़ी सर्जरी कीं।

Updated on:
21 Sept 2026 05:57 pm
Published on:
21 Sept 2026 05:57 pm