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गर्भ में पल रहे बच्चों पर असर डाल रहा DJ का शोर: 85 डेसिबल से ऊपर की आवाज से बड़ा खतरा, क्या कहता है विज्ञान?

शादी, त्योहार एवं अन्य तमाम आयोजनों में बजने वाले DJ की तेज आवाज गर्भवती महिलाओं और गर्भस्थ शिशु के लिए परेशानी का कारण बन रहा है। विशेषज्ञों के अनुसार 85-90 डेसिबल से अधिक शोर नुकसानदायक हो सकता है।
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Oct 07, 2026
Effect of DJ on pregnant women
सांकेतिक इमेज (सोर्स- Chatgpt)

शादी, त्योहार और जुलूसों में बजने वाला तेज डीजे अब गर्भवती महिलाओं के लिए चिंता का विषय बन रहा है। चिकित्सकों का कहना है कि लगातार या बहुत तेज शोर मां में घबराहट और रक्तचाप बढ़ा सकता है और इसका असर गर्भ में पल रहे शिशु तक पहुंच सकता है। हालांकि, शोध की तस्वीर पूरी तरह एकसमान नहीं है। इसलिए दावों को सावधानी से समझना जरूरी है।

85 डेसिबल की सीमा क्या कहती है?

अमेरिकी CDC के अनुसार 85 डेसिबल या उससे ऊपर की आवाज को तेज माना जाता है। अधिक समय तक इसके संपर्क में रहना वयस्क के सुनने की क्षमता के लिए जोखिम भरा है। गर्भावस्था पर हुए ज्यादातर अध्ययन भी इसी स्तर (85 dBA) के आसपास काम करने वाली महिलाओं पर केंद्रित हैं। स्वीडन की राष्ट्रव्यापी स्टडी में पाया गया कि गर्भावस्था के दौरान पूर्णकालिक रूप से 85 डीबी से ऊपर के शोर में काम करने वाली महिलाओं में कम वजन के बच्चे और गर्भावधि के हिसाब से छोटे आकार के शिशु का खतरा बढ़ा था। उसी अध्ययन में समय से पहले प्रसव से स्पष्ट संबंध नहीं दिखा।

शिशु कब सुनना शुरू करता है?

सुनने से जुड़ी संरचनाएं गर्भ के तीसरे से छठे सप्ताह के बीच बनना शुरू होती हैं। करीब 20वें सप्ताह तक शिशु की सुनने से जुड़ी संरचनाएं अच्छी तरह स्थापित हो जाती हैं। चिकित्सकों के अनुसार शिशु 18 से 20 सप्ताह के आसपास बाहरी आवाजें पकड़ने लगता है और 24 सप्ताह के बाद आवाजों में फर्क समझने लगता है। फ्रांस के नैंसी अस्पताल के शोध-प्रस्ताव के मुताबिक 27 से 29 सप्ताह में भ्रूण करीब 40 डेसिबल की आवाज महसूस करता है और 33वें सप्ताह से मां की आवाज पहचानने लगता है। इसलिए तीसरी तिमाही में शोर के प्रति सतर्कता ज्यादा जरूरी मानी जाती है।

क्या गर्भाशय शिशु को बचा लेता है?

एक पुराने मेडिकल रिव्यू (ऑब्स्टेट्रिकल एंड गायनेकोलॉजिकल सर्वे) के अनुसार मां का शरीर बाहरी आवाज को काफी कम कर देता है। कम आवृत्ति की आवाज में यह कमी करीब 20 डेसिबल और ऊंची आवृत्ति में 70 डेसिबल या उससे अधिक तक होती है। उसी समीक्षा में कहा गया कि गर्भ के भीतर की पृष्ठभूमि आवाज ही करीब 85 डेसिबल होती है, और बाहरी शोर से भ्रूण की सुनने की क्षमता को सीधा नुकसान साबित करने वाली नियंत्रित रिपोर्ट तब नहीं मिली थी। यानी बहरेपन का सीधा खतरा अभी निर्णायक रूप से सिद्ध नहीं है।

नया शोध क्या कहता है?

हालिया समीक्षाएं बताती हैं कि पर्यावरणीय शोर का संबंध कम वजन के शिशु, समय से पहले प्रसव और गर्भावस्था में हाई बीपी जैसी समस्याओं से जोड़ा गया है, पर कई अध्ययनों में प्रमाणों की निश्चितता कम है और कुछ में कोई संबंध नहीं मिला। एक विश्लेषण में 65 डेसिबल से ज्यादा लंबे समय के शोर और कम वजन के जोखिम के बीच संबंध दिखा। यानी सबसे मजबूत सबूत लगातार शोर के हैं, एक रात के डीजे के नहीं।

DJ की आवाज और कानून

खबरों में डीजे की आवाज का वास्तविक स्तर दूरी, जगह और उपकरण पर निर्भर करता है। ध्वनि प्रदूषण (विनियमन और नियंत्रण) नियम, 2000 के तहत आवासीय क्षेत्र में दिन में 55 और रात में 45 डेसिबल की सीमा है। रात 10 बजे से सुबह 6 बजे तक लाउडस्पीकर या सार्वजनिक संबोधन प्रणाली पर रोक है, सिवाय बंद परिसरों के। सार्वजनिक स्थान पर लाउडस्पीकर की आवाज परिवेशीय मानक से 10 डीबी ज्यादा या 75 डीबी से अधिक नहीं होनी चाहिए। राज्य त्योहारों में छूट दे सकते हैं, जैसे दिल्ली में रामलीला और दुर्गा पूजा के दौरान आधी रात तक अनुमति। शिकायत पुलिस या राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से की जा सकती है।

गर्भवती महिलाओं के लिए व्यवहारिक सुझाव

  • गर्भवती महिलाओं तेज डीजे से दूरी बनाएं और भीड़भाड़ वाले आयोजनों में लंबे समय तक न रुकें।
  • तेज शोर से घबराहट, सीने में दर्द, सिर दर्द, बीपी बढ़ने या शिशु की गतिविधि में असामान्य बदलाव महसूस हो तो तुरंत स्त्री रोग विशेषज्ञ से संपर्क करें।
  • परिवार और आयोजक भी बुजुर्गों, बच्चों और गर्भवती महिलाओं के लिए शांत जगह रखें और आवाज सीमा में रखें।
Updated on:
07 Oct 2026 06:33 pm
Published on:
07 Oct 2026 06:33 pm